Poems For Kids

Poetry for children: Our large assortment of poems for children include evergreen classics as well as new poems on a variety of themes. You will find original juvenile poetry about trees, animals, parties, school, friendship and many more subjects. We have short poems, long poems, funny poems, inspirational poems, poems about environment, poems you can recite

जय शिव शंकर: महाशिवरात्रि भजन

Lord Shiva - Hindu God

जय शिव शंकर, स्वामी जय शिव शंकर कष्ट हरो स्वामी हमार, स्वामी कष्ट हरो हमार शरण में अपनी ले के भगवन, मौका दो अपनी सेवा का हे मेरे भोलेनाथ, यही विनती करता हूँ स्वामीनाथ क्या माया है क्या नहीं, मैं अज्ञानी नहीं जानू मेरे स्वामी मैं तो आपको सर्वस्व मानु अपना सेवक बना लो भगवन, मैं ना चाहुँ ये संसार …

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महाशिवरात्रि भजन: अरुणाचल शिवा साईं शंकरा

महाशिवरात्रि भजन

महाशिवरात्रि भजन अरुणाचल शिवा साईं शंकरा नाचो हे नटराज भस्म भूषण नागाभरणा नाचो हे शिवा राज तांडव प्रिया करा, नटना नटेश्वर, नाचो हे नटराज नाचो हे नटराज दमा दमा दमा दमा डमरू बजावो झना झना झना झना पायलिया धिमिकी धिमिकी धीमी, धिमिकी धिमिकी धीमी, नाचो हे नटराज नाचो हे नटराज महाशिवरात्रि भजन और गानों पर भोलेनाथ की भक्ती में झूम जाएंगे …

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माँ-बाप: बुजुर्ग माता पिता पर हिंदी कविता

माँ-बाप: बुजुर्ग माता पिता पर हिंदी कविता

देखते ही देखते जवान, माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं… सुबह की सैर में, कभी चक्कर खा जाते है, सारे मौहल्ले को पता है, पर हमसे छुपाते है… दिन प्रतिदिन अपनी, खुराक घटाते हैं, और तबियत ठीक होने की, बात फ़ोन पे बताते है… ढीली हो गए कपड़ों, को टाइट करवाते है, देखते ही देखते जवान, माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं…! …

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इनकम टैक्स पर हिंदी हास्य कविता: ये कहाँ आ गए हम

इनकम टैक्स पर हिंदी हास्य कविता: ये कहाँ आ गए हम

इनकम टैक्स क्या है? इनकम टैक्स कामकाजी लोगों द्वारा अर्जित आय पर लगाया जाने वाला टैक्स होता है। अधिकतर सरकारें अपने अधिकारक्षेत्र की सभी कंपनियों की फाइनेंशियल आय पर टैक्स लगाती हैं। सरकार की सभी गतिविधियों के लिए पैसों का इंतजाम मुख्य रूप से टैक्स से ही होता है। सभी बिज़नेस और व्यक्तियों को हर साल इनकम टैक्स रिटर्न दायर …

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झूठे लोग: आज के दौर पर कटाक्ष करती कविता

झूठे लोग: आज के दौर पर कटाक्ष करती कविता

आज का हिन्दू युवा बॉलीवुड, चलचित्रों, इंटरनेट आदि  द्वारा तेजी से धर्मविमुख हो रहा है इसके लिए माता-पिता को बचपन से ही धर्म की शिक्षा देनी चाहिए और कॉन्वेंट जैसे स्कूलों में नही पढ़ाकर गुरूकुलों में या  किसी ऐसे स्कूल में पढ़ाई के लिए भेजना चाहिए जहां धर्म का ज्ञान मिलता हो, नही तो बच्चों में संस्कार नही होंगे तो …

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बिहारी के प्रसिद्द दोहे हिंदी अर्थ सहित

बिहारी के प्रसिद्द दोहे

महाकवि बिहारीलाल का जन्म 1603 के लगभग ग्वालियर (Gwalior is a city in the central Indian state of Madhya Pradesh) में हुआ। उनके पिता का नाम केशवराय था व वे माथुर चौबे जाति से संबंध रखते थे। बिहारी का बचपन बुंदेल खंड में बीता और युवावस्था ससुराल मथुरा में व्यतीत की। बिहारी की एकमात्र रचना सतसई (सप्तशती) है। यह मुक्तक …

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आओ तुम्हे बताऊ के माँ क्या है: कैफ़ी आज़मी

आओ तुम्हें बताऊ के माँ क्या हैं - कैफ़ी आज़मी Hindi Film Song on Mother

आओ तुम्हे बताऊ के माँ क्या है: कैफ़ी आज़मी आओ आओ तुम्हे बताऊ के माँ क्या है माँ एक ज्योति जीवन है बाकी सब अन्धियारा है माँ एक ज्योति जीवन है बाकी सब अन्धियारा है साच्ची उसके दुनिया में भगवान ने प्यार उतारा है माँ का दूजा नाम है प्यार मेरे साथी मेरे यार आओ आओ तुम्हे बताऊ के माँ …

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आई अब की साल दिवाली: कैफ़ी आज़मी

आई अब की साल दिवाली मुँह पर अपने खून मले - कैफ़ी आज़मी

आई अब की साल दिवाली मुँह पर अपने खून मले आई अब की साल दिवाली चारों तरफ़ है घोर अन्धेरा घर में कैसे दीप जले आई अब की साल दिवाली… बालक तरसे फुलझड़ियों को (दीपों को दीवारें – २) माँ की गोदी सूनी सूनी (आँगन कैसे संवारे – २) राह में उनकी जाओ उजालों बन में जिनकी शाम ढले आई …

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कर चले हम फ़िदा जानो तन साथियो: कैफी आज़मी

देश प्रेम और देश के लिए कुछ कर गुज़रने का जज़्बा हर नागरिक में होता है। हिंदी सिनेमा ने भी इस मोहब्बत और जज़्बे को बख़ूबी अभिव्यक्त किया है। आज भी देशभक्ति के कई ऐसे गाने हैं जो लोकप्रिय हैं। बदलते वक़्त के साथ इनकी लोकप्रियता में इज़ाफ़ा ही हुआ है। कुछ ऐसे बेशक़ीमती गीत  है जो हर नागरिक को …

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हम देखेंगे: फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की विवादास्पद नज़्म

हम देखेंगे: फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की विवादास्पद नज़्म

साल 1985 में जनरल ज़िया उल हक़ के फ़रमान के तहत औरतों के साड़ी पहनने पर पाबंदी लगा दी गई थी। पाकिस्तान की मशहूर गुलुकारा इक़बाल बानो ने एहतिजाज दर्ज कराते हुए लाहौर के एक स्टेडियम में काले रंग की साड़ी पहन कर 50000 सामईन के सामने फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की ये नज़्म गाई। नज़्म के बीच बीच में सामईन …

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