होली पर हिंदी बाल-कविता: इस होली में

इस होली में: होली पर हिंदी बाल-कविता

पुराने समय में होली के अवसर पर जहां मंदिरों में कृष्ण और राम के भजन गूंजते थे, वहीं नगरों में लोगों द्वारा ढोलक मंजिरों के ताल पर लोकगीत गाए जाते थे। पर बदलते समय के साथ इस त्योहार का स्वरूप भी बदलता नज़र आ रहा है।

होली पर सभी संस्थान, संस्था व कार्यस्थल में छुट्टी दी जाती है पर छुट्टी से पहले स्कूलों में बच्चे तथा कार्यस्थल पर सभी कार्मचारी एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं देते हैं।

दिन भर रंगों से खेलने व नाच गाने के पश्चात सभी संध्या में नये वस्त्र पहनते हैं और अपने पड़ोसी व मित्रों के घरों में उनसे मिलने और होली की शुभकामना देने जाते हैं।

होली पर सभी टीवी चैनलों में होली के गीत, अनेक विशेष कार्यक्रम तथा न्यूज चैनलों के माध्यम से विभिन्न स्थानों की होली प्रसारित की जाती है।

होली पर सभी छोटे-बड़े दुकानदार अपने दुकानों के आगे स्टैंड आदि लगा कर विभिन्न प्रकार के चटकीले रंग, गुलाल, पिचकारी व होली के अन्य आकर्षक सामग्री जैसे रंग बिरंगे विग (wig) से अपने स्टॉल को भर देते हैं। राशन तथा कपड़ों की दुकानों पर खरीदारी के लिए विशेष भीड़ देखने को मिलती है। पर समय बितने के साथ ज्यादातर लोग अब स्वयं से कोई पकवान नहीं बनाते वे हर प्रकार की मिठाइयां बाजार से ही खरीद लेते हैं। इससे त्योहार की धूम का बाजारीकरण में खो जाने का भय है।

होली पर वह भी रंगों से भीग जाते हैं जो अपने घरों से नहीं निकलना चाहते और जैसे की भिगोने वालों का तकिया कलाम बन चुका होता है “बुरा ना मानो होली है“। कुछ लोग त्योहार का गलत फायदा उठा कर बहुत अधिक मादक पदार्थों का सेवन करते हैं और सड़क पर चल रहीं महिलाओं को परेशान करते हैं। यह सरासर गलत व्यवहार है।

इस होली में: डॉ देशबंधु ‘शाहजहांपुरी’ की होली पर हिंदी बाल-कविता

आओ बच्चों इस होली में
कुछ नवीन कर डालें,

ऊँच-नीच, निर्बल सबको हम
अपने गले लगा लें।

जिनके पास नहीं कुछ भी है
उनको भी हम रंग दें,

मित्र बना करके उन सबको
हम टोली का संग दें ।

खाते नहीं मिठाई, गुझिया
कुछ उनको भी बांटे,

प्रेम प्रीत का सबक सिखाएं
न दुत्कारे-डांटे।

यह संदेश होलिका माँ का
द्वार-द्वार पहुंचाएं,

जीवन जीते परहित में
वही महान कहलाए।

~ ‘इस होली में’ कविता by डॉ देशबंधु ‘शाहजहांपुरी’

आपको डॉ देशबंधु ‘शाहजहांपुरी’ जी की यह बाल-कविता “इस होली में” कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

Check Also

4th of July Night - Carl Sandburg

4th of July Night: USA Independence Day Poetry

America’s Independence Day, also referred to as the Fourth of July or July Fourth, is …