Poems For Kids

Poetry for children: Our large assortment of poems for children include evergreen classics as well as new poems on a variety of themes. You will find original juvenile poetry about trees, animals, parties, school, friendship and many more subjects. We have short poems, long poems, funny poems, inspirational poems, poems about environment, poems you can recite

चंदन बन डूब गया – किशन सरोज

छोटी से बड़ी हुईं तरुओं की छायाएं धुंधलाईं सूरज के माथे की रेखाएं मत बांधो‚ आंचल मे फूल चलो लौट चलें वह देखो! कोहरे में चंदन वन डूब गया। माना सहमी गलियों में न रहा जाएगा सांसों का भारीपन भी न सहा जाएगा किन्तु विवशता यह यदि अपनों की बात चली कांपेंगे आधर और कुछ न कहा जाएगा। वह देखो! …

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चांद का कुर्ता – रामधारी सिंह दिनकर

हठ कर बैठा चांद एक दिन माता से यह बोला सिलवा दो मां मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला सन सन चलती हवा रात भर जाड़े में मरता हूं ठिठुर ठिठुर कर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूं आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का न हो अगर तो ला दो मुझको कुर्ता ही भाड़े का बच्चे की …

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चंद अशआर गुनगुनाते हैं – अरुणिमा

यों ही हम जहमतें उठाते हैं चंद अशआर गुनगुनाते हैं वे बताते हैं राह दुनियां को अपनी गलियों को भूल जाते हैं लेते परवाज़ अब नहीं ताइर सिर्फ पर अपने फड़फड़ाते हैं पांव अपने ही उठ नहीं पाते वे हमे हर लम्हें बुलाते हैं आप कहते हैं –क्या कलाम लिखा? और हम हैं कि मुस्कुराते हैं जिनको दरिया डुबो नहीं …

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चलती रहीं तुम – बुद्धिनाथ मिश्र

मैं अकेला था कहाँ अपने सफर में साथ मेरे छांह बन चलती रहीं तुम। तुम कि जैसे चांदनी हो चंद्रमा में आब मोती में, प्रणय आराधना में चाहता है कौन मंजिल तक पहुँचना जब मिले आनंद पथ की साधना में जन्म जन्मों में जला एकांत घर में और बाहर मौन बन जलती रहीं तुम। मैं चला था पर्वतों के पार …

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बोआई का गीत – धर्मवीर भारती

गोरी-गोरी सौंधी धरती-कारे-कारे बीज बदरा पानी दे! क्यारी-क्यारी गूंज उठा संगीत बोने वालो! नई फसल में बोओगे क्या चीज ? बदरा पानी दे! मैं बोऊंगा बीर बहूटी, इन्द्रधनुष सतरंग नये सितारे, नयी पीढियाँ, नये धान का रंग बदरा पानी दे! हम बोएंगे हरी चुनरियाँ, कजरी, मेहँदी राखी के कुछ सूत और सावन की पहली तीज! बदरा पानी दे! ∼ धर्मवीर …

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बुनी हुई रस्सी – भवानी प्रसाद मिश्र

बुनी हुई रस्सी को घुमाएं उल्टा तो वह खुल जाती है और अलग अलग देखे जा सकते हैं उसके सारे रेशे मगर कविता को कोई खोले ऐसा उल्टा तो साफ नहीं होंगे हमारे अनुभव इस तरह क्योंकि अनुभव तो हमें जितने इसके माध्यम से हुए हैं उससे ज्यादा हुए हैं दूसरे माध्यमों से व्यक्त वे जरूर हुए हैं यहां कविता …

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ब्याह की शाम – अजित कुमार

ब्याह की यह शाम‚ आधी रात को भाँवर पड़ेंगी। आज तो रो लो तनिक‚ सखि। गूँजती हैं ढोलके– औ’ तेज स्वर में चीखते– से हैं खुशी के गीत। बंद आँखों को किये चुपचाप‚ सोचती होगी कि आएंगे नयन के मीत सज रहे होंगे नयन पर हास‚ उठ रहे होंगे हृदय में आश औ’ विश्वास के आधार नाचते होंगे पलक पर …

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बोलो माँ – अंजना भट्ट

तिनका तिनका जोड़ा तुमने अपना घर बनाया तुमने, अपने तन के सुंदर पौधे पर हम बच्चों को फूल सा सजाया तुमने, हमारे सब दुख उठाये और हमारी खुशियों में सुख ढूँढा तुमने, हमारे लिये लोरियाँ गाईं और हमारे सपनों में खुद के सपने सजाए तुमने। हम बच्चे अपनी राह चले गये, और तुम, दूर खड़ी अपना मीठा आशीर्वाद देती रहीं। …

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अन्त में हम दोनों ही होंगे

अन्त में हम दोनों ही होंगे

भले ही झगड़े, गुस्सा करे, एक दूसरे पर टूट पड़े एक दूसरे पर दादागिरि करने के लिये, अन्त में हम दोनों ही होंगे जो कहना हे, वह कह ले, जो करना हे, वह कर ले एक दुसरे के चश्मे और लकड़ी ढूँढने में, अन्त में हम दोनों ही होंगे मैं रूठूं तो तुम मना लेना, तुम रूठो ताे मै मना …

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हर घट से: चिंतन पर नीरज की प्रेरणादायक हिंदी कविता

Gopal Das Neeraj

This is a famous poem of Niraj. One has to be selective in life, put in sustained efforts and be patient in order to succeed. हर घट से: गोपाल दास नीरज हर घट से अपनी प्यास बुझा मत ओ प्यासे! प्याला बदले तो मधु ही विष बन जाता है! हैं बरन बरन के फूल धूल की बगिया में लेकिन सब ही …

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