अमृत फल आँवला
महाभारत में एक कथा है। एक राजा अपनी युवा पुत्री ‘सुकन्या’ के साथ ऋषि आश्रम देखने के लिए वन में गये। एक स्थान पर देखा कि बैठे हुए आदमी के कद का एक मिट्टी का ढेर है। उसमें दो अधमुंदी आँखों जैसी चीज दिखाई पड़ रही थी। सुकन्या को जिज्ञासा हुई – यह क्या है? चंचलता के कारण उसने एक काँटा उठाकर उनमें से एक में चुभो दिया। जहाँ काँटा चुभा, वहाँ खून की धार निकल पड़ी और एक जोर की हरकत हुई। सारी मिट्टी झड़ गई और एक मुनि बैठा हुआ दिखाई पड़ा। उसकी आँखें क्रोध से लाल थीं, होंठ फड़क रहे थे। वास्तव में ऋषि समाधि में था। उस पर धूल, मिट्टी जमा हो गई थी। राजा और उसकी पुत्री सुकन्या डर के मारे काँपने लगे। राजा हाथ जोड़कर खड़ा हो गया और क्षमा माँगने लगा। तपस्वी बोला ही नहीं।
पर यह क्या! उसके चेहरे का रंग बदलने लगा। आँखों में लाली थी, किन्तु उसमें क्रोध की जगह प्रेम दिखाई पड़ने लगा। वह एकटक सुकन्या की ओर निहार रहा था। राजा की समझ में कुछ न आया। उन्होंने कहा, मुनि जी! हम दोषी हैं। सब प्रकार का प्रायश्चित करने को तैयार हैं। अब ऋषि बोले – हम क्षमा कर सकते हैं, किन्तु एक शर्त है। आपको इस कन्या के साथ मेरा विवाह करना होगा। राजा ऐसा करने को तैयार न थे क्योंकि कहाँ बहुत बड़ी अवस्था वाला तपस्वी और कहाँ राज-सुख में पली हुई युवती सुकन्या। किन्तु सुकन्या ने स्वयं ही मुनि से विवाह करना स्वीकार कर लिया। ऋषि का नाम च्यवन था। विवाह के बाद एक पाक बनाया। ऋषि का नाम च्यवन, इसलिए उनका बनाया हुआ पाक च्यवनप्राश के नाम से आज तक जाना जाता है। उन्होंने कुछ दिन इसका सेवन किया और वे बिल्कुल युवा हो गये और उनका गृहस्थ जीवन आनंद से बीता।

च्यवनप्राश और कुछ नहीं, आँवले से बनाया हुआ पाक है। आँवला अमृत फल है। इसमें पाए जाने वाले तत्व इस प्रकार हैं:
- विटामिन ‘सी’: 600 मिलीग्राम
- कैल्सियम: 50 मिलीग्राम
- फॉस्फोरस: 20 मिलीग्राम
- लौह: 1.2 मिलीग्राम
- ऑक्सलिक एसिड: 296 मिलीग्राम
- पोटैशियम: 225 मिलीग्राम
- सोडियम: 5 मिलीग्राम
- तांबा: 0.18 मिलीग्राम
- कोलाइम: 256 मिलीग्राम
इसके ताजे जूस में विटामिन ‘सी’ संतरे के जूस से 20 गुना अधिक होता है। जहाँ एक आँवले में 600 मिलीग्राम विटामिन ‘सी’ है, वहीं संतरे में 30.68 मिलीग्राम, नींबू में 26 मिलीग्राम, मीठे में (फल) 45 मिलीग्राम, अमरूद में 212 मिलीग्राम, सेब में 2 मिलीग्राम तथा अंगूर में 1 मिलीग्राम।
उपर्युक्त तालिका से स्पष्ट है कि आँवला कितना लाभदायक है। बड़े-बड़े वैद्यों का कथन है कि एक आँवला प्रतिदिन सेवन करने वाले को कोई रोग नहीं हो सकता। आँख, कान, नाक और पेट को नीरोग रखने के लिए आँवला संजीवनी औषधि है। स्वाद में कसैला होता है, किन्तु आँवले के खाने के बाद पानी बहुत ही मीठा लगता है।
आँवले का दोष केवल यह है कि यह बहुत सस्ता है और साल में केवल छह महीने – अक्टूबर से फरवरी तक प्राप्त होता है। इसको साल भर घरों में सेवन करने के लिए गृहिणियाँ निम्नलिखित उपाय कर सकती हैं:
मुरब्बा बनाने की विधि:
सामान: 5 किलो आँवला, 5 किलो चीनी
आँवलों को धोकर सुखा लेना चाहिए। नोंकदार चाकू या सलाई से थोड़ा गोद लें। उबलते पानी में आँवलों को डाल दें। तुरन्त नीचे उतार लें। पाँच मिनट बाद आँवलों को पानी से बाहर निकाल लें। छाया में उनका पानी सुखाने के लिए रख दें। अब पाँच किलो चीनी को आँच पर चढ़ा दें। इसमें दो गिलास पानी पड़ेगा। एक उबाल आने पर उतार कर नीचे रख दें। इसमें आँवले डाल दें। आँवलों समेत चाशनी को फिर आँच पर तीन मिनट के लिए चढ़ा दें। थोड़ा हिलाएँ। फिर चाशनी समेत आँवलों को नीचे उतार लें। 24 घंटे बाद फिर आँवले समेत चाशनी को आग पर चढ़ाएँ। एक उबाल देकर उतार दें। फिर चौबीस घंटे बाद इसी प्रकार चाशनी समेत आँवलों को आग पर चढ़ाएँ। एक उबाल देकर उन्हें नीचे उतार दें। अब छोटे चाय के चम्मच भर साइट्रिक एसिड डालकर आँवलों को ठंडा करके मर्तबान में भर दें।
चटनी:
5 किलो आँवले, 5 किलो तिल के तेल में पकाने के लिए आग पर चढ़ाएँ। पकते-पकते आँवले सारा तेल पी लेंगे। फिर भी उसे पकाते रहें और करछी से हिलाते रहें। गुलाबी रंग होने तक सारा तेल आँवले छोड़ देंगे। इसके बाद इन्हें आग पर से नीचे उतार लें। चावल छानने वाली छलनी में पलट कर तेल और आँवला अलग कर लें। अब अलग किये हुए आँवले की चटनी बनाएँ। आँवले पहले ही भुर्ता हो चुके हैं। छलनी में रखकर इनकी गुठलियाँ निकाल दें। छलनी में हाथ से दबाने पर गूदा नीचे चला जायेगा, जटाएँ ऊपर रह जायेंगी। इन जटाओं और गुठलियों को फेंक दें। गूदा को अलग रख दें।
50 ग्राम सूखा धनिया, 25 ग्राम सूखी मेथी, 50 ग्राम सौंफ को सूखी कढ़ाई में अलग-अलग भूनें। गुलाबी रंग होने पर उतार लें। इसमें 2 गुट्ठी लहसुन, 2 बड़े चम्मच राई, 2 चम्मच कलौंजी, नमक, हल्दी, लाल मिर्च मिलाकर पीस लें और चूर्ण को आँवले के गूदे में मिलायें। फिर से आग पर रखकर उसे भूनें। चटनी तैयार हो गई।
आँवले का तेल:
कूठकचरी, बालछड़, नागरमोथा, मेहंदी की हरी पत्तियाँ एक साथ कूटकर एक गिलास पानी में भिगो दें। 24 घंटे भीगने के बाद चटनी से बचे तेल में मिला दें। आग पर चढ़ा दें। तेल को खुले मुँह के बर्तन में पकाएँ। हिलाते रहें। पानी जल जाये, पर तेल बिल्कुल न जले। ठंडे पानी का छींटा डालकर देखें। जब पानी जल चुकेगा, उसमें छनन की आवाज आयेगी। तेल को उतार लें और ठंडा करके बोतलों में भर दें। यह तेल आँखों की ज्योति बढ़ाता है, मस्तिष्क को तेज करता है। बालों को लम्बा, घना और काला बनाता है।
अचार:
5 किलो हरे आँवलों को धोकर सुखाइये। पानी अच्छी तरह सूख जाने पर कढ़ाई में 1 किलो कनोडिया का सरसों का तेल चढ़ाइये। 1 पाव राई का बघार दें। आँवले उसमें डाल दें। धीमी आँच पर गर्म करें। सिद्ध होने पर उतार लें। 100 ग्राम सूखा धनिया, 50 ग्राम कलौंजी, 50 ग्राम सौंफ, 50 ग्राम मेथी दाना में से मेथी, धनिया और सौंफ हल्का भून लें। फिर हल्दी, नमक, लाल मिर्च अपने हिसाब से डालकर कलौंजी समेत का चूर्ण बनाकर तैयार आँवलों में डालकर मिला दें। अचार बन गया। ठंडा होने पर थोड़ा कच्चा सरसों का तेल डालकर रख दें। यह अचार कभी खराब नहीं होगा।
Kids Portal For Parents India Kids Network