आचार्य चरक कौन थे और क्या है चरक संहिता

आचार्य चरक कौन थे और क्या है चरक संहिता

आचार्य चरक आयुर्वेद के विद्वान थे। उन्होंने आयुर्वेद के प्रमुख ग्रन्थों और उनके ज्ञान को इकट्ठा कर के उसे संकलित किया। चरक ने भ्रमण कर के चिकित्सकों के साथ बैठ कें कीं, विचार एकत्र किए और सिद्धांतों को प्रतिपादित किया तथा उसे पढ़ाई-लिखाई के योग्य बनाया।

आचार्य चरक कौन थे और क्या है चरक संहिता

चरक संहिता 8 भागों में विभाजित है और इसमें 120 अध्याय हैं। चरक संहिता में आयुर्वेद के सभी सिद्धांत हैं और जो इसमें नहों हैं, वे कहीं नहीं हैं। यह आयुर्वेद के सिद्धांत का पूर्ण ग्रंथ है।

चरक संहिता, को संस्कृत भाषा में लिखा गया है। इस ग्रंथ के प्रत्येक अध्याय की शुरुआत में भगवान अत्रेय का जिक्र किया गया है और अंत में यह लिखित है कि इसे आचार्य अग्निवेश ने तैयार किया, चरक ने इसका संपादन किया और दृढ़बल ने इसे संपूर्ण किया। अर्थात चरक संहिता में महर्षि अत्रेय के उपदेशों को अग्निवेश द्वारा संकलित किया गया और दृढ़बल ने इसमें कुछ अध्याय शामिल किए हैं।

महर्षि चरक, जिन्हें औषधि का जनक कहा जाता है, पहले ऐसे चिकित्सक थे जिन्होंने चयापचय, शरीर प्रतिरक्षा और पाचन से संबंधित रोगों को पहचाना और उनका निदान करने के उपाय बताए।

उन्होंने ही सर्वप्रथम मानव शरीर में मौजूद तीन स्थायी दोषों-वात, पित्त तथा कफ को पहचाना और इनकी अवधारणा को दुनिया के समक्ष प्रस्तुत किया।

Charaka Samhita is a Sanskrit text on Ayurveda, attributed to Charaka and later revised by Dṛḍhabala
Charaka Samhita is a Sanskrit text on Ayurveda, attributed to Charaka and later revised by Dṛḍhabala

महर्षि चरक का जन्म किस काल या समय में हुआ, भारत के पौराणिक इतिहास में इससे जुड़ा कोई तथ्य नहीं मिलता। “त्रिपिटक’ का जब चीनी अनुवाद हुआ तो उसमें चरक ऋषि को कनिष्क का राजवैद्य बताया गया लेकिन चरक संहिता बौद्ध मत का विरोध करती है, इसलिए यह बात प्रमाणित नहीं कही जा सकती।

हां, इस बात से यह अंदाजा जरूर लगाया जा सकता है कि चरक ऋषि का संबंध कनिष्क के काल से रहा होगा।

चरक संहिता में उत्तर भारत के बहुत से राज्यों का जिक्र है कहीं न कहीं यह इस बात को दर्शाता है कि ऋषि चरक का संबंध उत्तर भारत के ही किसी राज्य से रहा होगा।

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