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भालू की शादी

भालू की शादी में आए, बन्दर और बटेर। हाथी आया, अजगर आया, आया बूढ़ा शेर। बन्दर ने ढोलकी बजाई, कोयल ने शहनाई। बिल्ली मौसी बेहद खुश थी, खाकर दूध–मलाई।

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Doodle-art Products Back In Demand

The so-called aimless drawings have taken a new avatar and can be seen everywhere — from mugs, trays, key chains to wall posters, wedding cards, and even T-shirts, sarees, scarves Printed images, mostly in black and white, and many a time in colour, are finding new surfaces. These are seen almost everywhere — homes, offices, roadsides, hotels, coffee shops and …

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शेर निराला हिम्मतवाला

शेर निराला हिम्मत वाला, लम्बी लम्बी मूंछों वाला, तेज नुकीले दांतों वाला, सब का दिल दहलाने वाला, हटो–हटो आया शेर, भागो–भागो आया शेर।

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एक चिड़िया के बच्चे चार

एक चिड़िया के बच्चे चार, घर से निकले पंख पसार। पूरब से पश्चिम को जाएँ, उत्तर से फिर दक्षिण को आएं। घूमघाम जब घर को आएं, मम्मी को एक बात सुनाएं। देख लिया हमने जग सारा, अपना घर है सबसे प्यारा।

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टिम्बकटू भई टिम्बकटू – डॉ. फहीम अहमद

टिम्बकटू भई टिम्बकटू, मैं तो हरदम हँसता हूँ। ठीक शाम को चार बजे जब, आया नल में पानी। छोड़ दिया नल खुला हुआ, की थोड़ी सी शैतानी। पानी फ़ैल गया आँगन में, नैया उसमे तैराऊं। पुंछ हिलाता मुहं बिचकाता, आया नन्हा बन्दर। उसे खिलाई मैंने टाफी, आलू और चुकंदर। मै लेटा तो मेरे सर से, बन्दर लगा ढूंढने जूं। खोला …

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तुम – नवीन कुमार अग्रवाल

शोर में शांति सी तुम, भोर में आरती सी तुम। पंछी में पंखों सी तुम, बंसी में छिद्रों सी तुम। हकीकत में भ्रान्ति सी तुम, स्वप्न में जीती जागती सी तुम। कला में सृजन सी तुम, प्रेम में समर्पण सी तुम। धड़कनों के लिए ह्रदय सा केतन हो तुम, जानते हुआ बनता जो अंजान, वो अवचेतन हो तुम। ∼ नवीन …

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अहा टमाटर बड़ा मजेदार

अहा, टमाटर बड़ा मजेदार, अहा, टमाटर बड़ा मजेदार। इक दिन इसको चुहे ने खाया, बिल्ली को भी मार भगाया, बिल्ली को भी मार भगाया। अहा, टमाटर बड़ा मजेदार। इक दिन इसको चींटी ने खाया, हाथी को भी मार भगाया, हाथी को भी मार भगाया। अहा, टमाटर बड़ा मजेदार। इक दिन इसको पतलू ने खाया, मोटू को भी मार भगाया, मोटू …

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तूफ़ान – नरेश अग्रवाल

यह कितनी साधारण सी बात है रात में तूफान आये होंगे तो घर उजड़ गए होंगे घर सुबह जगता हूँ तो लगता है कितनी छोटी रही होगी नींद धुप के साथ माथे पर पसीना पेड़ गिर गए, टूट गए कितने ही गमले, मिटटी बिखर गयी इतनी सारी और सभी चीजें कहती हैं हमें वापस सजाओ पूरी करी नींद हमारी भी, …

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वीणा की झंकार भरो – मनोहर लाल ‘रत्नम’

कवियों की कलमों  में शारदे, वीणा की झंकार  भरो। जन – गण – मन  तेरा  गुण गाये, फिर ऐसे आधार करो॥ तेरे बेटों ने तेरी झोली में डाली हैं लाशें, पीड़ा, करुणा और रुदन चीखों की डाली हैं सांसें। जन – गण मंगल दायक कर आतंक मिटा दो धरती से- दानव कितने घूम रहे हैं, फैंक रहे हैं अपने पासे॥ …

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