जन्म दिन मुबारक हो – मूलचंद गुप्ता

जन्म दिन मुबारक हो, मुबारक हो जन्मदिन।
आपके जीवन में, बार – बार आये यह दिन॥

दुनिया का मालिक, आपको बख्शे अच्छी सेहत।
खुशियाँ ही खुशियाँ, बरसाती रहे उसकी नेमत॥

माना आइना नहीं जाता मेघ मल्हार, बुजुर्गों के किये।
फिर भी बहुत कुछ हो सकता है बुजुर्गों के लिए॥

शारीरिक शक्ति, अगर कुछ कम हो भी गयी तो क्या है?
तजुर्बे का खज़ाना बुजुर्गों ने जमा किया है॥

आपका वक़्त था, नौजवान थे, पहनाई थी जीवन साथी ने जयमाला।
अब भी वक्क्त है, बुद्धिमानी, परोपकार, सेवा पर नहीं लगा ताला॥

परिवर्तन है नियम कुदरत का, सिर झुकाकर आपने कबुल किया।
जो भी चाहा जिंदगी में, इज़्ज़त, ईमानदारी से वसूल किया ॥

बदलते वक़्त ने नहीं छोड़ा इस लायक, दिखाए नजाकत।
बता कर रास्ता नौजवान पीढ़ी को, दिखाएं अपनी लियाकत॥

सुखा गुलाब, जवान लोगों को नहीं देता आनंद।
सुखी पंखुड़ियां, बन सकती औषधि, बनती गुलकंद॥

जन्म दिन मुबारक हो, मुबारक हो जन्मदिन।

∼ मूलचंद गुप्ता

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