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नाश देवता – गजानन माधव मुक्तिबोध

नाश देवता – गजानन माधव मुक्तिबोध

घोर धनुर्धर‚ बाण तुम्हारा सब प्राणों को पार करेगा‚ तेरी प्रत्यंचा का कंपन सूनेपन का भार हरेगा। हिमवत‚ जड़‚ निःस्पंद हृदय के अंधकार में जीवन भय है। तेरे तीक्षण बाण की नोकों पर जीवन संचार करेगा। तेरे क्रुद्ध वचन‚ बाणों की गति से अंतर में उतरेंगे‚ तेरे क्षुब्ध हृदय के शोले‚ उर ही पीड़ा में ठहरेंगे। कोपित तेरा अधर संस्फुरण‚ …

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लो वही हुआ – दिनेश सिंह

लो वही हुआ – दिनेश सिंह

लो वही हुआ जिसका था डर‚ ना रही नदी‚ ना रही लहर। सूरज की किरण दहाड़ गई गरमी हर देह उधाड़ गई‚ उठ गया बवंडर‚ धूल हवा में अपना झंडाा गाड़ गई गौरैया हांफ रही डर कर‚ ना रही नदी‚ ना रही लहर। हर ओर उमस के चर्चे हैं‚ बिजली पंखों के खरचे हैं‚ बूढ़े महुए के हाथों से उड़ …

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Vocalist Jai Thirath Mevandi – Indian classical ragas can work as alternate medicine

Vocalist Jai Thirath Mevandi - Indian classical ragas can work as alternate medicine

Hindustani classical vocalist Jai Thirath Mevandi belongs to the land that has given gems like Pt Sawai Gandharva and Pt Bhimsen Joshi. Following his mother who hummed devotional songs while doing household chores, Jai Thirath took a liking to music right from his childhood. He started learning classical music under Pt Arjunsa Nakod at the age of 14. Inspired by …

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टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी – वंदना गोयल

टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी - वंदना गोयल

इस टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी को हंस के मैं पी रही हूं किस्तों में मिल रही है किस्तों में जी रही हूं कभी आंखों में छिपा रह गया था इक टुकड़ा बादल बरसते उन अश्कों को दिनरात मैं पी रही हूं अक्स टूटते बिखरते आईनों से बाहर निकल आते हैं मेरा समय ही अच्छा नहीं बस जज्बातों में जी रही हूं …

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कल और आज – नागार्जुन

कल और आज – नागार्जुन

अभी कल तक गालियां देते थे तुम्हें हताश खेतिहर, अभी कल तक धूल में नहाते थे गौरैयों के झुंड, अभी कल तक पथराई हुई थी धनहर खेतों की माटी, अभी कल तक दुबके पड़े थे मेंढक, उदास बदतंग था आसमान! और आज ऊपर ही ऊपर तन गए हैं तुम्हारे तंबू, और आज छमका रही है पावस रानी बूंदा बूंदियों की …

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Hindi Jokes

Hindi Jokes

गाय और बछड़ा सिपाही – यह गाय और बछड़ा किसका हैं? राम – गाय का तो मुझे पता नहीं, पर बछड़ा किसका हैं यह मैं जनता हूँ। सिपाही – किसका हैं? राम – जी गाय का। भिखारी भिखारी (सेठ से) – भगवान ने नाम पर कुछ दे दे सेठ जी। सेठ – अभी खुल्ले नहीं हैं कल ले लेना। भिखारी …

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हम आजाद हैं – केदारनाथ ‘सविता’

हम आजाद हैं - केदारनाथ ‘सविता’

हम आजाद हैं कहीं भी जा सकते हैं कुछ भी कर सकते हैं कहीं भी थूक सकते हैं कुछ भी फेंक सकते हैं हम आजाद हैं घर का कूड़ा छत पर से किसी पर भी फेंक सकते हैं गंगा की सफाई योजना की कर के सफाई हम किसी भी पवित्र नदी में घर की गंदगी बहा सकते हैं अरे, कहां …

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नन्हा पौधा – वेंकटेश चन्द्र पाण्डेय

नन्हा पौधा - वेंकटेश चन्द्र पाण्डेय

एक बीज था गया बहुत ही गहराई में बोया। उसी बीज के अंतर में था नन्हा पाौधा सोया। उस पौधे को मंद पवन ने आकर पास जगाया। नन्हीं नन्हीं बूंदों ने फिर उस पर जल बरसाया। सूरज बोला “प्यारे पौधे निंद्रा दूर भगाओ। अलसाई आंखें खोलो तुम उठ कर बाहर आओ। आंख खोल कर नन्हें पौधे ने तब ली अंगड़ाई। …

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