भारतीय कढ़ाई के विभिन्न डिजाइन: कढ़ाई आकर्षक डिजाइन बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के धागे का उपयोग करके सुई के काम से कपड़े सजाने की एक कला है। भारत की कढ़ाई में विभिन्न क्षेत्रों द्वारा अलग-अलग क्षेत्रीय कढ़ाई शैलियों के दर्जनों शामिल हैं और विभिन्न सामग्रियों के उपयोग के कारण इसकी व्यापक विविधता है। विभिन्न प्रकार की भारतीय कढ़ाई में क्षेत्रीय विशेषता के विभिन्न पहलू होते हैं जैसे पश्चिम बंगाल की कांथा कढ़ाई, कश्मीर से काशीदा, पंजाब से फूलकारी, उत्तर प्रदेश से चिकनकारी, कर्नाटक से कसुती कढ़ाई आदि।
भारतीय कढ़ाई के विभिन्न डिजाइन
कढ़ाई यानी रंग-बिरंगे धागों से सुई-धागे की मदद से कुछ ऐसा काढ़ना, जो कपडे की सुन्दतरता बढ़ा दे. पुराने जमाने में कढाई हाथों से ही की जाती थी, लेकिन वक्त बदलने के साथ ही आज कढ़ाई मशीनों से भी की जाने लगी है. कढ़ाई करना तब भी बारीकी और हुनर का काम था और आज भी आज भी हुनर का काम माना जाता है. एक साधारण-से कपडे को खूबसूरती के नए मायनों में बदलती कढ़ाई की जानिये कौन-कौन सी हैं किस्में-
1. कांथा कढ़ाई (Kantha Kadai)
यह कढ़ाई बंगाल की प्राचीनतम कलाओं में से एक है. इस कढ़ाई में रंगीन धागों का खूबसूरती से प्रयोग किया जाता है. जिसमें फूल-पत्तियां,पशु और आम जनजीवन के दृश्यों को उकेरा जाता है.
2. चिकनकारी (Chikankari Kadai)
यह लखनऊ की मशहूर कढ़ाई है, जिसमें महीन कपड़े पर सुई-धागे से तरह-तरह के टांकों द्वारा हाथ से कढ़ाई की जाती है. चिकन की कढ़ाई में भी कई तरह की किस्में हैं, जिसमें कई तरह के टांके और जालियां होते हैं जैसे-मुर्री, फंदा, कांटा, तेपची, पंखड़ी, लौंग जंजीरा, राहत तथा बंगला जाली, मुंदराजी जाजी, सिद्दौर जाली, बुलबुल चश्म जाली, बखिया आदि.
3. फुलकारी (Phulkari Kadai)
रेशम के धागों से तरह-तरह की ज्यामितीय आकृतियों को बनाने की कढ़ाई ‘फुलकारी’ के नाम से जानी जाती है, जो खास तौर पर जम्मू और पंजाब में मशहूर है. फुलकारी में भी चार तरह की फुलकारी -बाघ, थिरमा, दर्शन द्वार और बावन फुलकारी ख़ास मानी जातीं हैं.
4. ज़रदोज़ी (Zardosi Kadai)
यह एक बहुत पुरानी और बहुत लोकप्रिय कढ़ाई है, जिसमें असली सोने और चाँदी से ज़री बनाकर कढ़ाई की जाती थी, लेकिन समय के साथ असली सोने और चांदी के तारों (ज़री) का स्थान नकली तारों ने ले लिया और अब बेहतरीन सिल्क पर इसी ज़री का काम किया जाता है, जो बिल्कुल असली ज़री जैसा ही लगता है.
5. कशीदाकारी या कश्मीरी कढ़ाई (Kashidakari Kadai)
ये कढ़ाई एक कपडे पर एक या दो स्टिच से की जाती है और इसमें आमतौर पर प्रकृति के खूबसूरत चित्र उकेरे जातें हैं. इस खूबसूरत कढ़ाई की शहरों के साथ-साथ फैशन इंडस्ट्री में भी ख़ासी मांग है.
6. सिंधी कढ़ाई (Sindhi Kadai)
सिंधी कढ़ाई आमतौर पर लेडीज़ सूट्स, कुशन कवर्स आदि पर की जाती है. इसकी ख़ास बात ये है कि इस कढ़ाई को हैरिंग बोन स्टिच द्वारा केवल हाथ से ही किया जाता है, जबकि इसके साथ इस्तेमाल किया जाने वाला शीशे का काम मशीन के द्वारा भी किया जा सकता है. ये कढ़ाई देखने में भी बहुत खूबसूरत लगती है.
विविधताओं से संपन्न भारत के हर राज्य की तमाम खूबियों में से एक वहाँ की अलबेली कढ़ाईयाँ भी हैं. हर कढ़ाई की अपनी खासियत और अपने प्रशंसक हैं. ख़ास बात ये है कि सुई-धागों और कलात्मकता के इस खूबसूरत ताने-बाने के प्रशंसक केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बहुत से लोग हैं. ये बात बताती है कि अच्छी चीजों के कद्रदान सारी दुनिया में मौजूद हैं.
भारतीय कढ़ाई के विभिन्न डिजाइन – 2 [12 May, 2022]
List of Indian Embroidery
आंध्र प्रदेश
- बंजारा कढ़ाई
- मनका कढ़ाई
बिहार
- कांथा कढ़ाई
- सुजनी कढ़ाई
गुजरात
- अहीर कढ़ाई
- बन्नी / हीर भारत कढ़ाई
- जाट कढ़ाई
- कांबी कढ़ाई
- काठी कढ़ाई
- खारेक कढ़ाई
- कच्छ कढ़ाई
- मिरर कढ़ाई
- मोची / अरी कढ़ाई
- मुतवा कढ़ाई
- पक्को कढ़ाई
- रबारी कढ़ाई
- SUF कढ़ाई
हिमाचल प्रदेश
- चंबा रूमाल कढ़ाई
जम्मू-कश्मीर
- कशीदाकारी कढ़ाई
- क्रूल कढ़ाई
- सोज़नी/दुरूख कढ़ाई
कर्नाटक
- लंबानी कढ़ाई
- कसूती कढ़ाई
मणिपुर
- शामिलामी कढ़ाई
- हिजाया माएक कढ़ाई
ओडिशा
- पिपली कढ़ाई पिपली
पंजाब
- फुलकारी कढ़ाई
- बाग कढ़ाई
राजस्थान
- दबका कढ़ाई
- डंका कढ़ाई
- गोटा पट्टी कढ़ाई
- कारचोबी कढ़ाई
- मेव कढ़ाई
- पिछवाई
तमिलनाडु
- कॉन्वेंट कढ़ाई
- टोडा कढ़ाई (पुखूर)
उत्तर प्रदेश
- चिकनकारी कढ़ाई
- मुकैश / बदला कढ़ाई
- पट्टी का काम कढ़ाई (अलीगढ़)
पश्चिम बंगाल
- कांथा कढ़ाई
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