सर्प क्यों इतने चकित हो: प्रसुन जोशी

सर्प क्यों इतने चकित हो: प्रसून जोशी की मोदी जी के बारे में नयी कविता

सर्प क्यों इतने चकित हो: Here is a nice poem by Prasoon Joshi. The poem is a metaphor for a person who repeated face severe adversities and comes out a winner. Prasoon Joshi recently read this poem for Prime Minister Narendra Modi in London.

सर्प क्यों इतने चकित हो: प्रसून जोशी

सर्प क्यों इतने चकित हो
दंश का अभ्यस्त हूं
पी रहा हूं विष युगों से
सत्य हूं अश्वस्त हूं

ये मेरी माटी लिये है
गंध मेरे रक्त की
जो कहानी कह रही है
मौन की अभिव्यक्त की
मैं अभय ले कर चलूंगा
ना व्यथित ना त्रस्त हूं

वक्ष पर हर वार से
अंकुर मेरे उगते रहे
और थे वे मृत्यु भय से
जो सदा झुकते रहे
भस्म की संतान हूं मैं
मैं कभी ना ध्वस्त हूं

है मेरा उद्गम कहां पर
और कहां गंतव्य है
दिख रहा है सत्य मुझको
रूप जिसका भव्य है
मैं स्वयम् की खोज में
कितने युगों से व्यस्त हूं

है मुझे संज्ञान इसका
बुलबुला हूं सृष्टि में
एक लघु सी बूंद हूं मैं
एक शाश्वत वृष्टि में
है नहीं सागर को पाना
मैं नदी संन्यस्त हूं।

~ Poem by ‘प्रसून जोशी

प्रसून जोशी (जन्म: 16 सितम्बर 1968) हिन्दी कवि, लेखक, पटकथा लेखक और भारतीय सिनेमा के गीतकार हैं। वे विज्ञापन जगत की गतिविधियों से भी जुड़े हैं और अन्तर्राष्ट्रीय विज्ञापन कंपनी ‘मैकऐन इरिक्सन‘ में कार्यकारी अध्यक्ष हैं। फ़िल्म ‘तारे ज़मीन पर’ के गाने ‘मां…’ के लिए उन्हें ‘राष्ट्रीय पुरस्कार‘ भी मिल चुका है। अब सेंसर बोर्ड के चेयरमैन हैं।

उनकी तीन पुस्तकें प्रकाशित हुई है। ‘दिल्ली ६’, ‘तारे ज़मीन पर’, ‘रंग दे बसंती’, ‘हम तुम’ और ‘फना’ जैसी फ़िल्मों के लिए कई सुपरहिट गाने लिखे हैं। फ़िल्म ‘लज्जा’, ‘आंखें’, ‘क्योंकि’ में संगीत दिया है। ‘ठण्डा मतलब कोका कोला’ एवं ‘बार्बर शॉप-ए जा बाल कटा ला’ जैसे प्रचलित विज्ञापनों के कारण उन्हे अन्तर्राष्ट्रीय मान्यता मिली।

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