मैं नारी - अंतरराष्ट्रीय नारी दिवस पर एक कविता

अंतरराष्ट्रीय नारी दिवस पर हिंदी कविता: मैं नारी

अंतरराष्ट्रीय नारी दिवस पर हिंदी कविता: मैं नारी – 1933 से 1945 के बीच अमेरिका की फर्स्ट लेडी रहीं एलियानोर रूजवेल्ट ने कहा था, ‘महिला एक टीबैग की तरह है, जब तक आप उसे गर्म पानी में न डालें तब तक पता ही नहीं चलता कि वह कितनी स्ट्रॉन्ग है‘ उसने मां, बेटी, बहन और दोस्त जैसे न जाने कितने किरदारों में खुद को हर बार साबित किया है, लेकिन इन सब किरदारों से अलग उसकी अपनी पहचान ‘एक औरत’ होना है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर दुनिया भर में महिलाओं और उनके जज्बे को सलाम किया जा रहा है।

मैं नारी: अंतरराष्ट्रीय नारी दिवस के उपलक्ष में हिंदी कविता

मैं नारी सदियों से
स्व अस्तित्व की खोज में
फिरती हूँ मारी-मारी
कोई न मुझको माने जन
सब ने समझा व्यक्तिगत धन
जनक के घर में कन्या धन

दान दे मुझको किया अर्पण
जब जन्मी मुझको समझा कर्ज़
दानी बन अपना निभाया फर्ज़
साथ में कुछ उपहार दिए
अपने सब कर्ज़ उतार दिए
सौंप दिया किसी को जीवन

कन्या से बन गई पत्नी धन
समझा जहां पैरों की दासी
अवांछित ज्यों कोई खाना बासी
जब चाहा मुझको अपनाया
मन न माना तो ठुकराया
मेरी चाहत को भुला दिया
कांटों की सेज़ पे सुला दिया

मार दी मेरी हर चाहत
हर क्षण ही होती रही आहत
माँ बनकर जब मैनें जाना
थोडा तो खुद को पहिचाना
फिर भी बन गई मैं मातृ धन
नहीं रहा कोई खुद का जीवन

चलती रही पर पथ अनजाना
बस गुमनामी में खो जाना
कभी आई थी सीता बनकर
पछताई मृगेच्छा कर कर
लांघी क्या इक सीमा मैने
हर युग में मिले मुझको ताने

राधा बनकर मैं ही रोई
भटकी वन वन खोई खोई
कभी पांचाली बनकर रोई
पतियों ने मर्यादा खोई
दांव पे मुझको लगा दिया
अपना छोटापन दिखा दिया

मैं रोती रही चिल्लाती रही
पतिव्रता स्वयं को बताती रही
भरी सभा में बैठे पांच पति
की गई मेरी ऐसी दुर्गति
नहीं किसी का पुरुषत्व जागा
बस मुझ पर ही कलंक लागा

फिर बन आई झांसी रानी
नारी से बन गई मर्दानी
अब गीत मेरे सब गाते हैं
किस्से लिख-लिख के सुनाते हैं
मैने तो उठा लिया बीडा
पर नहीं दिखी मेरी पीडा

न देखा मैनें स्व यौवन
विधवापन में खोया बचपन
न माँ बनी मै माँ बनकर
सोई कांटों की सेज़ जाकर
हर युग ने मुझको तरसाया
भावना ने मुझे मेरी बहकाया

कभी कटु कभी मैं बेचारी
हर युग में मै भटकी नारी

Check Also

Population Explosion - English Poetry about Population

Population Explosion: Poetry On Over Population

Population Explosion: In biology or human geography, population growth is the increase in the number …