करीबी रिश्तों में निकाह से पैदा होता स्वास्थ्य संकट: क्या है जेनेटिक बीमारी MPS

करीबी रिश्तों में निकाह से पैदा होता स्वास्थ्य संकट: क्या है जेनेटिक बीमारी MPS

गुजरात के जावेद की टेढ़ी हड्डियाँ, ₹4 करोड़ का सालाना खर्च और PAK के ‘रैट चिल्ड्रन’

आपसी रिश्तों में शादियाँ कई जेनेटिक बीमारियों का कारण बनता है। जावेद के अब्बू ने अपनी खाला की बेटी से निकाह किया था। इसलिए वह आनुवांशिक बीमारी एमपीएस से ग्रसित है। पाकिस्तान में ऐसी बीमारियाँ आम हैं क्योंकि यहाँ 80 फीसदी निकाह फर्स्ट कजिन या सेकेंड कजिन से होता है।

मुस्लिम समाज में आपसी रिश्तदारों में निकाह आम है। ऐसे दंपति के बच्चों में आनुवांशिक बीमारियाँ ज्यादा होती हैं, क्योंकि दोषपूर्ण जीन होने की संभावना बढ़ जाती है। गुजरात का जावेद भी ऐसे ही आनुवांशिक बीमारी से जुझ रहा है। उसके अब्बू मोहम्मद आजी ने अपनी खाला की बेटी से निकाह किया था। नतीजतन जावेद को MPS IV नाम की आनुवांशिक बीमारी हो गई। 18 साल से वह हर दिन मौत की दुआ माँगते हुए जीता है। उसकी बहन भी ऐसी ही बीमारी से ग्रसित है। लेकिन वह चल फिर पाती है।

करीबी रिश्तों में निकाह से पैदा होता स्वास्थ्य संकट

Morquio syndrome, also known as mucopolysaccharidosis type IV (MPS IV), is a rare metabolic disorder in which the body cannot process certain types of sugar molecules called glycosaminoglycans (also known as GAGs, or mucopolysaccharides)

पाकिस्तान में माना जाता है कि करीब 80 फीसदी निकाह फर्स्ट कजिन और सेकेंड कजिन में होता है। इसलिए यहाँ आनुवांशिक बीमारियों के मरीज भी ज्यादा हैं। हालात तो ये है कि माइक्रोसेलफी से पीड़ित बच्चों को ‘रैट चिल्ड्रन’ कह कर उनका शोषण भी किया जाता है।

दुर्लभ बीमारी से ग्रस्त है जावेद

गुजरात के अहमदाबाद में रहने वाले 26 साल के जावेद को म्यूकोपोलीसेकेरिडोसिस टाइप IV (Mucopolysaccharidosis IV) बीमारी है। जन्मजात होने वाली इस बीमारी का पता बच्चे में तुरंत नहीं चलता। कई बार 2-4 साल में उसके लक्षण दिखते हैं। लेकिन कई बार 7-8 साल तक इसका पता चलता है। 8 साल की उम्र में जावेद को इसका पता तब चला जब वह क्रिकेट खेलते-खेलते गिर गया और दर्द से कराहने लगा। जब उठाने की कोशिश की गई लेकिन उसे उठाया नहीं जा पा रहा था।

टीचर को उसने रोते हुए कहा कि उसके घुटने और पैरों में काफी दर्द है। टीचर ने उसके अम्मी अब्बू को फोन किया। उनके पहुँचने पर जावेद को अस्पताल ले जाया गया। उसे दवा देकर भेज दिया गया। डॉक्टरों को लगा कि गिरने से उसकी मासपेशियाँ खिंच गई होंगी। लेकिन घर पहुँचने पर उसकी स्थिति ठीक होने के बजाय बिगड़ गई। जब वह उठ नहीं पाया तो मौलवी के पास भी उसके अब्बू दौड़े और उसे 10 हजार रुपए का तेल दिया लेकिन वह भी बेकार गया। 18 साल से इसी तरह वह बेड़ पर पड़ा है।

दरअसल उसे काफी रेयर बीमारी म्यूकोपॉलीसेकेराइडोसिस टाइप 4 (Mucopolysaccharidosis Type 4 या MPS IV) हो गई है। यह जेनेटिक बीमारी होती है और करीबी रिश्ते में जब शादियाँ होती हैं, तो उनके बच्चों में ये बीमारी होने की आशंका होती है। यही वजह है कि जावेद की बहन भी इसी बीमारी की शिकार है। उसके ज्वाइंट पर दर्द रहते हैं, घुटने-केहुनियाँ में सूजन आती है। उसकी हालत जावेद से बेहतर है, लेकिन उसका निकाह नहीं हो पा रहा है।

राँची की डॉक्टर श्वेता शेखर के मुताबिक, MPS कई तरह की होती है। कई MPS के मरीजों को हड्डियों के टेढ़े-मेड़े होने, सिर बढ़ा होने, पैर में कमजोरी, कम उम्र में बूढ़ा होना, आँखों, ह्रदय, साँस लेने में तकलीफ, गर्दन छोटी होना, पसलियों का टेढ़ा होना, दाँतों में खराबी समेत दूसरी दिक्कतों के साथ-साथ मानसिक बीमारी भी हो जाती है। लेकिन MPS 4 में सारी दिक्कत शारीरिक होती है। ऐसे मरीज की उम्र भी ज्यादा नहीं होती।

क्या होता है मॉर्कियो सिंड्रोम

म्यूकोपॉलीसेकेराइडोसिस टाइप 4 या मॉर्कियो सिंड्रोम (Morquio Syndrome) एक दुर्लभ आनुवंशिक और जन्मजात बीमारी है। यह किसी संक्रमण या खान-पान से नहीं होती, बल्कि माता-पिता के दोषपूर्ण जीन के कारण होती है। आपसी रिश्तों, जैसे चचेरे-ममेरे-फुफेरे भाई-बहनों में जब शादियाँ होती हैं, तो इसकी संभावना काफी बढ़ जाती है। यही वजह है कि मुस्लिम देशों में ऐसे बीमारियों के मरीज ज्यादा मिलते हैं।

दरअसल यह एक ऑटोसोमल रिसेसिव (Autosomal Recessive) बीमारी है यानी माता-पिता जब आपसी रिश्तेवाले होते हैं तो दोनों में ऐसे जीन कैरी करने की संभावना होती है। ऐसे में उनके होने वाले बच्चों को ये बीमारी ज्यादा होती है।

Rat Children
Rat Children

लाइलाज है बीमारी

इस बीमारी को एंजाइम थेरेपी से थोड़ा ठीक किया जा सकता है लेकिन इसका खर्च काफी है। करीब 4 करोड़ रुपए सालाना खर्च आता है। इसलिए जावेद का इलाज नहीं हो पा रहा। इस बीमारी में शरीर में कुछ विशेष एंजाइम नहीं बनते। इसके कारण ग्लाइकोसामिनोग्लाइकैन (GAGs) नामक पदार्थ शरीर में जमा होने लगता है। धीरे-धीरे यह हड्डियों, जोड़ों, हृदय, आँखों और दूसरे अँगों को नुकसान पहुँचाता है, इसलिए जावेद 26 साल में 90 साल का हो गया है यानी उसकी हड्डियाँ उतनी कमजोर है कि तेजी से उठने बैठने पर भी टूट जाती है।

वह दर्द से तड़पता है। टेडी मेड़ी हड्डियाँ शरीर के ऊपर से दिखती हैं। बिस्तर से उठना मुश्किल होता है। उठते ही लुढ़क जाता है। जन्मजात बीमारी है। दो महीने का होने पर शरीर सूखने लगा था। शरीर बदन के मुकाबले काफी बड़ा दिखता है। चलते फिरते गिर जाता है। पैर काफी कमजोर। स्कूल छुड़ाना पड़ा क्योंकि दूर भेजना मुश्किल था। एक दिन ट्यूशन गया तो रास्ते में गिर गया। केहूनी घुटने में चोट लगी। इसके बाद वह भी छूट गया। 26 साल की हालत में हड्डियों की हालत 90 साल वाली हो गई है।

डॉक्टर श्वेता शेखर के मुताबिक, ये बीमारी लाइलाज है यानी इसे पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन मरीज को तड़पने से बचाने के लिए एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी कराई जा सकती है। इसके अलावा ऑर्थोपेडिक सर्जरी, फिजियोथेरेपी, हार्ट और दूसरे अँगों का समय समय पर चेकअप कराना, सांस लेने में अगर दिक्कत आए तो उसे डॉक्टर को दिखाना जरूरी है। यहाँ तक कि कई बार स्पाइनल सर्जरी की भी जरूरत महसूस की जा सकती है।

कई बीमारियों को न्योता देता है करीबी रिश्तों में होने वाली शादियाँ

करीबी रिश्तेदारों में विवाह से किसी एक बीमारी का नहीं, बल्कि कई ऑटोसोमल रिसेसिव रोगों का जोखिम बढ़ जाता है। यही वजह है कि दुनियाभर में मुस्लिम समुदाय दूसरी जैनेटिक बीमारियों से भी परेशान हैं। इनमें MPS के अलग-अलग प्रकारों मसलन MPS 1, MPS IV, MPS IVA, MPS IVB के अलावा बेटा थैलिसीमिया, सिकल सेल डिजीज यानी एससीडी, सिस्टिक फाइब्रोसिस, स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी, फेनिलकेटोनुरिया, टे-सैक्स रोग समेत कई दुर्लभ मेटाबॉलिक बीमारियाँ शामिल हैं।

रैट चाइल्ड के रूप में कहे जाने वाले इन बच्चों में असामान्य रूप से छोटा सिर, गोल जबड़े और विकृत माथा होता है। पाकिस्तान के इस्लामिक गणराज्य के गुजरात शहर में ये बच्चे शाहदौला की दरगाह में शरण पाते हैं
रैट चाइल्ड के रूप में कहे जाने वाले इन बच्चों में असामान्य रूप से छोटा सिर, गोल जबड़े और विकृत माथा होता है। पाकिस्तान के इस्लामिक गणराज्य के गुजरात शहर में ये बच्चे शाहदौला की दरगाह में शरण पाते हैं

पाकिस्तान का बुरा हाल

पाकिस्तान की करीब 80 फीसदी जनसंख्या मुस्लिम है। यहाँ चचेरे-ममेरे-फुफेरे भाई-बहनों (फर्स्ट कजन) के बीच निकाह आम है। माना जाता है कि करीब 60% से 65% निकाह आपसी रिश्तों में होते हैं। कहा जाता है कि इससे ‘बेटियाँ घरों में रह जाएँगी’। रिश्तेदारों में निकाह का खामियाजा अगली पीढ़ी भुगतती है, जब बच्चा जेनेटिक बीमार से ग्रस्त पैदा होता है।

पाकिस्तान में ऐसे मरीजों का कोई राष्ट्रीय डेटा मौजूद नहीं है लेकिन कराची के आगा खान यूनिवर्सिटी अस्पताल, लाहौर के चिल्ड्रन अस्पताल , इस्लामाबाद के जिला केन्द्र पर ऐसे मरीज ज्यादा आते हैं। दरअसल जागरूकता और इलाज छोटे-छोटे शहरों में मौजूद ही नहीं है। ऐसे में बड़े शहरों के कुछ केन्द्रों पर ही मरीज के लिए आना मजबूरी है।

कराची के एक अध्ययन के मुताबिक, सिंध प्रांत में आनुवांशिक बीमारियों में MPS से पीड़ित 90 रोगियों में मोरक्वियो सिंड्रोम MPS IV के मरीज थे। इसके अलावा पंजाब, बलूचिस्तान जैसे प्रांत में एमपीएस के अलावा दूसरे मरीजों की संख्या ज्यादा थी।

पाकिस्तान के डॉक्टर आपसी रिश्तों में होने वाले निकाह के खिलाफ हैं। इनका मानना है कि पाकिस्तान ऐसा देश है, जहाँ फर्स्ट कजिन और सेकेंड कजिन में निकाह सबसे ज्यादा होता है। ऐसे में आनुवांशिक बीमारियों के होने का खतरा भी यहाँ ज्यादा है। इसको लेकर देश में जागरूकता बढ़ाने की बात भी डॉक्टर कहते हैं।

पाकिस्तान के ‘रैट चिल्ड्रन’ शोषण के शिकार

पाकिस्तान सिर्फ आनुवांशिक बच्चों को पैदा ही नहीं करता बल्कि उनका शोषण करने में भी अव्वल है। यहाँ आनुवांशिक बीमारी माइक्रोसेलफी से पीड़ित बच्चों को रैट चिल्ड्रन के नाम से शोषण होता है। ऐसे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास रुक जाता है। ऐसे बच्चों को ‘शाह डोला के चूहे’ माना जाता है। इनको दरगाह से जुड़े लोग और आसपास के गैंग भिखारी बनाते हैं और देश भर में भीख मँगवाते हैं।

इतना ही नहीं, ठीक बच्चों को रैट चिल्ड्रन बनाकर देश भर में भीख मँगवाया जाता है। दरअसल अंधविश्वास और रूढिवादिता से ग्रसित निसंतान दंपति शाह दौला की दरगाह पर मन्नत माँगने आते हैं। उनके लिए बच्चा पैदा होने पर पहले बच्चे को दरगाह को सौंपना अनिवार्य होता है। बताया जाता है कि अगर ऐसा नहीं किया तो आने वाले बच्चे विकृति वाले होंगे। इसके बाद जब दंपति अपने बच्चों को दरगाह को सौंप देते हैं तो उन्हें फिर जिंदगी में मिलना का मौका नहीं दिया जाता। बच्चा मिलने के बाद उन्हें ‘कृत्रिम माइक्रोसेफली’ का शिकार बनाया जाता है, जिसमें खोपड़ी के सामान्य विकास को रोकने के लिए उनके सिर पर लोहे की पट्टी बाँध दी जाती है।

इन अभागे बच्चों को हरे रंग के वस्त्र पहना कर दरगाह के आसपास भीख माँगने के लिए मजबूर किया जाता है। तीर्थयात्री यह सोचकर चिंतित रहते हैं कि अगर उनकी उपेक्षा की जाए तो उनका बुरा हाल हो सकता है, इसलिए वे बच्चों के भीख के कटोरे में नकद और सिक्के भर देते हैं। माता-पिता के संरक्षण से वंचित ये अशिक्षित बच्चे दरगाह प्रशासन की दया पर निर्भर रहते हैं। बच्चों को ‘नकली चूहे’ बना कर भीख मँगवाया जाता है।

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