सीजफायर के लिए गिड़गिड़ाते हुए आया था पाकिस्तान

सीजफायर के लिए गिड़गिड़ाते हुए आया था पाकिस्तान

‘सीजफायर के लिए गिड़गिड़ाते हुए आया था पाकिस्तान’: सिंगापुर के भारतीय हाई कमिश्नर ने कश्मीर पर अमेरिकी पेशकश ठुकराई, कहा – सिर्फ PoK पर होगी बात

भारत हमेशा से कहता आया है कि कश्मीर का मसला केवल नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच बातचीत से हल होगा। वहीं, पाकिस्तान ने ऐतिहासिक रूप से इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की माँग की है।

सीजफायर के लिए गिड़गिड़ाते हुए आया था पाकिस्तान: शिल्पक अंबुले

भारत के सिंगापुर में उच्चायुक्त (हाई कमिश्नर) शिल्पक अंबुले ने सोमवार (12 मई 2025) को कहा कि भारत-पाकिस्तान के हाल के झगड़े में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता की कोई बात नहीं है। सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त शिल्पक अंबुले ने सोमवार (12 मई 2025) को ब्लूमबर्ग टीवी पर हसलिंदा अमीन से बातचीत में कहा, “हमारे लिए कश्मीर एक द्विपक्षीय मुद्दा है, न कि अंतरराष्ट्रीय। कश्मीर के मामले में मध्यस्थता शब्द हमारे लिए काम नहीं करता।”

ऑपरेशन सिंदूर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने पहले हमला शुरू किया था। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान की 11 वायुसेना ठिकानों पर जोरदार हमले किए, जिसके बाद पाकिस्तान को सीजफायर (युद्धविराम) के लिए मजबूर होना पड़ा। यह बयान तब आया जब अमेरिका ने कश्मीर पर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की इच्छा जताई थी। भारत ने हमेशा से कश्मीर को अपने और पाकिस्तान के बीच का मामला माना है और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को सिरे से खारिज किया है।

अंबुले ने कहा कि भारत नहीं चाहता था कि मामला बढ़े। लेकिन पाकिस्तान ने भारत के नागरिक और सैन्य ठिकानों, जैसे अस्पतालों और धार्मिक स्थलों पर हमले शुरू किए। उन्होंने कहा, “अब पाकिस्तान को सोचना है। हमने सिर्फ सीमा पार आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए जवाब दिया। लेकिन पाकिस्तान ने नागरिकों पर हमले करके मामला और बिगाड़ा, तो हमें भी जवाबी हमला करना पड़ा।”

उन्होंने बताया कि कई दिनों की सीमा पर गोलीबारी के बाद पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) ने भारत के DGMO से बात की। अंबुले ने कहा, “पाकिस्तान का DGMO हमारे DGMO के पास गिड़गिड़ाने आया, जब हमने उनके 11 वायुसेना ठिकानों को तबाह कर दिया। तब जाकर उन्होंने सीजफायर माना।”

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा था कि उन्होंने सीजफायर में भूमिका निभाई। लेकिन अंबुले ने इन दावों को साफ नकार दिया। उन्होंने कहा, “कश्मीर का मसला भारत और पाकिस्तान के बीच का है। हम दूसरों से अपनी बात समझाते हैं, लेकिन मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं। कश्मीर कोई अंतरराष्ट्रीय मुद्दा नहीं है।”

सिंधु जल समझौते और पीओके पर भी रखी बात

इंडस वाटर ट्रीटी (सिंधु जल समझौता) के बारे में अंबुले ने कहा कि पाकिस्तान के आतंकवाद को बढ़ावा देने की वजह से भारत ने इस समझौते को रोक दिया है। इस मुद्दे पर अंबुले ने कहा, “यह समझौता पहले से ही पाकिस्तान की तरफ ज्यादा झुका था। जब तक सीमा पार आतंकवाद चलता रहेगा, यह समझौता लागू नहीं होगा।” पाकिस्तान के साथ बातचीत के सवाल पर उन्होंने भारत का पुराना रुख दोहराया, “आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं हो सकते। एकमात्र मुद्दा है – पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) जो गैरकानूनी है।”

इससे पहले, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शनिवार (10 मई 2025) को दावा किया था कि दोनों देश तटस्थ स्थान पर बातचीत के लिए सहमत हुए हैं। लेकिन अंबुले ने इसे साफ तौर पर खारिज करते हुए कहा, “भारत ने कभी ऐसा नहीं किया। आतंक और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।” यह बयान भारत की उस नीति को दर्शाता है, जो आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और कश्मीर पर अपनी संप्रभुता को प्राथमिकता देती है।

अंबुले ने कहा कि भारत तब तक पाकिस्तान पर दबाव बनाए रखेगा, जब तक वह सीमा पार आतंकवाद को बंद नहीं करता। दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों खासकर DGMO के बीच बातचीत जारी रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, “अगर पाकिस्तान आतंकवाद रोक दे, तो हम बातचीत के लिए तैयार हैं। लेकिन ध्यान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और 22 अप्रैल 2025 के हमले के पीड़ितों को इंसाफ दिलाने पर रहेगा।”

गौरतलब है कि चार दिन की तीखी झड़पों के बाद शनिवार (10 मई 2025) को दोनों देशों ने युद्धविराम पर सहमति जताई। युद्धविराम (Ceasefire) से पहले भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तानी वायुसेना की कमर तोड़ दी और आतंक के ठिकानों को चुन-चुन कर नष्ट कर दिया। भारत के आक्रमण से घबराए पाकिस्तान ने ही सीजफायर की गुहार लगाई। सिंगापुर में भारत के हाई कमिश्नर शिल्पक अंबुले ने भी इस बात को दोहराया।

शिल्पक अंबुले ने कहा कि पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस ने अपने भारतीय समकक्ष से संपर्क किया, जिसके बाद यह युद्धविराम संभव हुआ। इसमें किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं पड़ी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत ने “आतंकी ठिकानों को नष्ट करने” का अपना उद्देश्य हासिल कर लिया।

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