अलिंद विकंपन (Atrial Fibrillation) हृदय की गति का अकस्मात नियमित रूप से तेज हो जाने का रोग है। दिल की सामान्य धड़कन विश्राम की स्थिति में एक मिनट में 60 से 80 तक होती है। लेकिन अलिंद विकम्पन में यह धड़कन 100 से 200 तक पहुँच जाती है, जो बहुत अधिक होती है। हृदय में मचा यह हड़कंप पीड़ित व्यक्ति को भयभीत करता है। छाती में दर्द, घबराहट, चक्कर आना, साँस लेने में कठिनाई, बेचैनी उसे स्तब्ध कर देती है।
हृदय में चार कोष्ठ (Chambers) होते हैं। दो ऊपर अलिंद (Atrial) और दो उनके नीचे निलय (Ventricles) होते हैं। साधारणत: ये चारों कोष्ठ एक ही गति, लय और सामंजस्य के साथ सिकुड़ते-फैलते हैं। हृदय की धड़कन के इस विशेष तालमेल को बनाए रखने की जिम्मेदारी दाएँ ऊपरी कोष्ठ (Atrial) की सतह पर मौजूद कोशिकाओं की पोटली (Sinoatrial node) की होती है। ये कोशिकाएं बिजली पैदा करती हैं तथा अपनी नसों के एक सर्किट के माध्यम से इन चारों कोष्ठों और हृदय की गति-लय-सामंजस्य को काबू में रखती हैं। बिजली के ये आवेग किसी भी कारण से गड़बड़ा जाने से हृदय की धड़कन बेकाबू हो जाती है। इस गड़बड़ी का कारण हरेक व्यक्ति में अलग-अलग होता है, जैसे कि बढ़ती उम्र, हृदय का कोई अन्य रोग, उच्च रक्तचाप, नशे की लत, तनाव, मोटापा या अन्य कोई चिरकालिक रोग तथा वात-पित्त के दोष आदि। लेकिन अभी तक रोग का कोई ठोस कारण डॉक्टर बता नहीं पाए हैं।

यह रोग जानलेवा नहीं होता, लेकिन परेशान बहुत करता है। हमारे पास ऐसे भी लोग आए हैं, जो ऑपरेशन या पेसमेकर लगाकर भी दुखी हैं। डॉक्टर रक्त पतला करने या इलेक्ट्रोलाइट कंट्रोल करने की दवाइयाँ देते हैं, परन्तु ये पूरी तरह सहायक नहीं हैं। अपनी जीवन-शैली (Lifestyle) को ठीक कर और प्रतिदिन का आसन-प्राणायाम-ध्यान का क्रमबद्ध अभ्यास सबसे अधिक लाभदायक होता है।
इस रोग से मुक्ति पाने के लिए अपने मानसिक और शारीरिक तनाव पर विजय पाएँ। भोजन को हल्का रखें और दिनचर्या चक्र का पालन करें। भोजन में मैग्नीशियम, पोटेशियम, सोडियम और कैल्शियम की मात्रा की कमी नहीं होने दें। ये इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर में बिजली पैदा करने में सहायक होते हैं। पुरुष दिन में चार और महिलाएँ तीन लीटर पानी पिएँ। लाभदायक आसन हैं – ताड़ासन, सूर्य नमस्कार, भुजंगासन, पवनमुक्तासन और मर्कटासन। प्राणायाम, जैसे कि अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और नाड़ी-शोधन उचित रहते हैं। रोग का हमला होने पर निम्नलिखित तरीकों का सहारा लें:
- लेट जाएं और पैरों को ऊपर की ओर किसी चीज के ऊपर रख लें। इससे रक्त हृदय की ओर सरलता से चला जाता है। लेटे-लेटे गहरे श्वासों का अभ्यास करें। श्वास नाक से भरें और पेट को दबाते हुए दुगुनी देर तक मुँह से निकालें। शांत रहने का प्रयास करें।
- पाँच मिनट बाद उठकर बैठ जाएँ और जोर-जोर से खॉाँसें। कुछ देर बैठकर खाँसने के बाद घुटनों पर खड़े हो जाएँ और झुक कर दोनों हाथ जमीन पर रख लें (Dog Position)। श्वास को मुँह खोलकर शक्ति-पूर्वक निकालें।
- दो-तीन मिनट के बाद शांत बैठ जाएँ। अधिकतर धड़कन काबू में आ चुकी होगी। मन और शरीर को शांत करें। बैठकर अपनी बायीं छाती के चारों ओर दाएँ हाथ की अंगुलियों से जोर देकर दबाते हुए चारों ओर गोलाकार रिथिति में दस चक्कर लगाएँ।
- बैठकर छाती के मध्य भाग में स्टर्नन (Sternum) पर दोनों हाथों की उंगलियों से ऊपर से नीचे की ओर सूखी मालिश करें। यह मालिश डायाफ्राम के नीचे तक करें।
- कानों के पीछे (Earlobes) बाएं कान के नीचे बाएं हाथ की दो उंगलियों तथा दाएं कान के नीचे दाएं हाथ की दो उंगलियों से वेगस नाड़ी को ऊपर से नीचे की ओर दबाएँ। वेगस नाड़ी का उकसाव (Stimulation) हृदय की माँसपेशियों में करंट को धीमा और नियमित करने में सहायक होता है।
अब तक धड़कन सामान्य हो चुकी होगी। ग्रीन टी या गरम पानी पीकर कुछ समय के लिए योग निद्रा करें या फिर सो जाएँ। उपरिलिखित सभी तरीके अनुभव जनित हैं और सभी नुस्खों से अधिक लाभदायक हैं। पीड़ित व्यक्ति अपने भोजन प्रबंधन और योगाभ्यास से इस रोग से पूर्णतः मुक्ति पा लेते हैं।
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