Yearly Archives: 2015

America A Prophecy (Finis) – William Blake

Reveal the dragon thro’ the human; coursing swift as fire To the close hall of counsel, where his Angel form renews. In a sweet vale shelter’d with cedars, that eternal stretch Their unmov’d branches, stood the hall; built when the moon shot forth, In that dread night when Urizen call’d the stars round his feet; Then burst the center from …

Read More »

चंपा और चमेली – प्रतिभा सक्सेना

चंपा और चमेली - प्रतिभा सक्सेना

चंपा ने कहा, ‘चमेली, क्यों बैठी आज अकेली क्यों सिसक-सिसक कर रोतीं, क्यों आँसू से मुँह धोतीं क्या अम्माँ ने फटकारा, कुछ होगा कसूर तुम्हारा या गुड़ियाँ हिरा गई हैं या सखियाँ बिरा गई हैं। भइया ने तुम्हें खिजाया, क्यों इतना रोना आया? अम्माँ को बतलाती हूँ, मैं अभी बुला लाती हूँ’ सिसकी भर कहे चमेली, ‘मैं तो रह गई …

Read More »

आजा री निंदिया आजा – प्रतिभा सक्सेना

आजा री निंदिया आजा - प्रतिभा सक्सेना

आजा री निंदिया आजा, मुनिया/मुन्ना को सुला जा मुन्ना है शैतान हमारा रूठ बितता है दिन सारा हाट-बाट औ’अली-गली में नींद करे चट फेरी शाम को आवे लाल सुलावे उड़ जा बड़ी सवेरी। आजा निंदिया आजा तेरी मुनिया जोहे बाट सोने के हैं पाए जिसके रूपे की है खाट मखमल का है लाल बिछौना तकिया झालरदार सवा लाख हैं मोती …

Read More »

प्रथम पुरुष

First person

बहुत समय पहले बंगाल में महाराजा कृष्णचन्द्र का राज्य था। उनके दरबार में बहुत सारे विदूषक थे। सबसे ज्यादा लोकप्रिय था – गोपाल। गोपाल नाई था लेकिन सब लोग उसे गोपाल भांड कहकर बुलाते थे। भांड यानी मसखरा, जो लोगों को हंसा सकता हो। अपने चुटकलों, हावभाव, टीका – टिप्पणी और महाराज या अन्य लोगों को मूर्ख बनाने के तरीको …

Read More »