डिप्रैशन - अवसाद मनोरोग से कैसे बचें

डिप्रैशन – अवसाद मनोरोग से कैसे बचें

इंसान अक्सर दुनिया जहान की खबरें पढ़ता रहता है किंतु अपनों का दिल टूटने और दिल के रोने की आवाज को नहीं सुन पाता। हम अक्सर अपने आसपास देख नहीं पाते। अपने ही रिश्तों से घुटते रहते हैं और यही घुटन अवसाद (डिप्रैशन) बनती है वक्त रहते हम महसूस नहीं कर पाते और जब एहसास होता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

डिप्रैशन – अवसाद मनोरोग क्या है:

मानसिक रोग मनुष्य की सोच और व्यवहार को प्रभावित करते हैं। नकारात्मक विचारों के भंवर में डूब कर स्वयं को उससे बाहर निकाल पाने में असमर्थ लोग अवसाद का शिकार होते हैं जिसका सीधा असर व्यक्ति के रिश्तों, कार्यों, व्यापार और सामाजिक प्रतिष्ठा पर होता है। आज हर आयु के लोग किसी न किसी तनाव का शिकार हैं।

कारण:

  1. असीमित तृष्णाएं: आज सब कुछ पाने की तृष्णा मनुष्य में हर पल बनी रहती है, जिनका कभी अंत नहीं होता। तन, मन, धन पद प्रतिष्ठा से संबंधित यह तृष्णाएं कभी न समाप्त होने वाली हैं।
  2. असंतोष: जो प्राप्त है उससे संतुष्ट न होकर अधिक पाने की होड़ में खुद को समय न देकर मशीननुमा व्यक्तित्व बन जाना।
  3. दिखावे का जीवन: अधिकतर लोग अपनी हैसियत से अधिक दिखावे का जीवन जीना पसंद करने के कारण कर्ज में फंस जाते हैं और फिर अनुचित मार्ग अपनाते हैं जो अवसाद का कारण बनता है।
  4. प्रतिस्पर्धा: प्रतिस्पर्धा आज हर क्षेत्र में विकराल रूप लिए हुए है। खुद को दूसरे से श्रेष्ठ सिद्ध करने के प्रयास में तन-मन की स्थितियां कब असंतुलित हो जाती हैं, पता ही नहीं चलता। इसका शिकार आज के युवा और अधिकतर बच्चे हैं।

अवसाद, मनोरोग के उपचार में देरी:

जिस प्रकार तन रोगी होता है उसी प्रकार मन भी रोगी हो सकता है किंतु तन के रोगी होने पर उसका उपचार सहजता से हो जाता है, परंतु मन के रोगी होने पर उसका उपचार सही समय पर नहीं करवा पाते।

देरी के कारण:

  1. मनोरोगी होने के लक्षणों की सही जानकारी न होना
  2. रोगी की आदतों व स्वभाव के कारण लक्षण समझ न आना
  3. भूत-प्रेत का साया समझ कर भ्रमित होकर झाड़-फूंक के चक्करों में पड़ना और
  4. यह समझना कि रोगी जानबूझकर ऐसी हरकतें कर रहा है

देरी तथा रोगी को सही समय पर सही उपचार मिलने से उसकी मनोदशा और अधिक खराब होने लगती है और वह पागलपन की स्थिति तक पहुंच जाता है।

अत्यधिक दुर्भाग्यपूर्ण है कि अधिकांश लोग मनोरोग विशेषज्ञों के पास जाते हुए शर्म व संकोच महसूस करते हैं। यह एक भ्रांति है कि मनोरोग चिकित्सकों को पागलों का डाक्टर और मनोरोगियों को पागल समझा जाता है जो पुर्णतः अनुचित है। मनोरोग से पीड़ित अवसाद डिप्रैशन से पीड़ित रोगियों की अत्यधिक संभाल और समय पर अच्छे उपचार की आवश्यकता होती है।

मनोरोग के प्रकार:

  1. स्कीजोफ्रेनिया डिसऑर्डर (Schizophrenia Disorder): इससे ग्रस्त रोगी अपनी वास्तविक दुनिया से कट जाता है। उसे दूसरी आवाजें सुनाई देती हैं वह बड़ाबड़ाता रहता है और स्वयं से ही बातें करता रहता है।
  2. मेनिया (Hypomania / Manic Depression – Also called Bipolar Disorder): व्यक्ति स्वयं को कल्पना में बड़ी हस्ती मानकर बड़ी-बड़ी डींगे मारते हैं।
  3. वहम: इसमें व्यक्ति हर बात, विषय, वस्तु को शक की नजर से देखता है।
  4. डिसोसिएटिव डिसऑर्डर (Dysfunctional Disorder): इससे ग्रस्त रोगी अपना व्यक्तित्व भूलकर किसी दूसरे व्यक्ति जैसा व्यवहार करता है जिसे लोग भूत-प्रेत का साया समझने लगते हैं।

डिप्रैशन के शिकार लोग जिंदगी से हार कर स्वयं को बिलकुल अकेला समझते हैं। अंधेरे में एकांत में रहना पसंद करते हैं। लोगों में बैठे हुए भी चुपचाप रहते हैं, जीवन को नीरसता से जीने लगते हैं।

अवसाद मनोरोग से बचने के उपाय:

  • परिवारिक सदस्यों के बदलते स्वभाव, हावभाव, खानपान पर ध्यान दें।
  • बच्चों की रूचि के अनुसार उन्हें अध्ययन की प्रेरणा दें। उन पर दबाव बनाने की बजाय उनसे सहयोग करें।
  • स्वस्थ व तनावमुक्त जीवनशैली के लिए योग, सैर और संगीत अपनाएं।
  • दिखावे का जीवन जीने की अपेक्षा सादगीपूर्ण जीवन जीएं। स्वयं को ध्यान जैसी क्रियाओं से जोड़ें। प्रेरणादायक साहित्य पढ़ें व संगीत सुनें।
  • सकारात्मक सोच के लोगों के साथ समय बिताएं, नकारात्मक सोच वाले लोगों से दूरी बनाएं।
  • अनावश्यक खर्च न करें।
  • अवसादग्रस्त रोगियों के साथ अधिक से अधिक समय बिताना चाहिए इन्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। सही समय पर इनको सही उपचार अवश्य दिलाना चाहिए।
  • दुर्भाग्यपूर्ण है कि 21वीं सदी में भी लोग अज्ञानतापूर्ण झाड़-फूंक, तांत्रिकों के चक्कर में, अपने ही लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ करते हैं और उन्हें सही उपचार नहीं देते। भारतीय समाज में फैली हुई ऐसी कुरीतियों और पाखंड फैलाने वालों का भरपूर विरोध करें ताकि ऐसे मनोरोग वालों का भरपूर विरोध करें ताकि ऐसे मनोरोग ग्रस्त रोगियों के जीवन को बचाया जा सके उन्हें सही उपचार दिया जा सके। अवसाद पीड़िता का इलाज करवाने में संकोच न करें।

~ साध्वी कमल वैष्णव

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