Tag Archives: Manjari Shukla Stories Collection

चूहों की दिवाली: चतुर चूहों की चटपटी कहानी

चूहों की दिवाली: चतुर चूहों की चटपटी कहानी

चूहों की दिवाली: जब से चूहों को पता चला था कि दिवाली आने वाली है तो उनमें कानाफूसी शुरू हो गई थी। सबने मिलकर एक शाम को एक मीटिंग करने का निश्चय किया। छोटा चूहा, मोटा चूहा, लम्बा चूहा, नाटा चूहा, कोई भी नहीं छूटा… सब भागते हुए मीटिंग अटेंड करने जा पहुँचे थे। मीटिंग की राय देने वाले नाटू चूहे की तो ख़ुशी …

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बिट्टू की दिवाली: प्रेरणादायक हिंदी बाल-कहानी

बिट्टू की दिवाली: प्रेरणादायक हिंदी बाल-कहानी

बिट्टू की दिवाली: प्रेरणादायक हिंदी बाल-कहानी – बहुत सारे पटाखे, मिठाई और नए नए कपड़े चाहिए मुझे इस दिवाली पर… कहता हुआ नन्हा बिट्टू पैर पटककर माँ के सामने जमीन पर ही लोट गया। उसकी मम्मी ने अपनी हँसी को दबाते हुए कहा – “हाँ – हाँ, सब ले आयेंगे”। यह सुनकर बिट्टू बड़े ही लाड़ से माँ के गले में …

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नन्हे पेड़ की दिवाली: पेड़ों में दिवाली के उत्साह पर मंजरी शुक्ला की कहानी

नन्हे पेड़ की दिवाली: पेड़ों में दिवाली के उत्साह पर मंजरी शुक्ला की कहानी

नन्हे पेड़ की दिवाली: दिवाली आने वाली थी और सबसे मज़ेदार बात ये थी कि इस साल पेड़ सबसे ज़्यादा खुश थे। छोटे पेड़ बड़े पेड़ों से पूछा करते थे कि दिवाली आने में कितने दिन बचे हैं और बड़े पेड़ मुस्कुराते हुए कहते की दिन भर में पचास बार पूछने से दिवाली जल्दी नहीं आ जाएगी। सबसे ज़्यादा हैरान …

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अनोखा दशहरा: मंजरी शुक्ला की हास्यप्रद कहानी सोने के पत्तों की

अनोखा दशहरा: मंजरी शुक्ला

अनोखा दशहरा: बहुत समय पहले की बात हैं। उदयपुर राज्य में एक राजा राज्य करता था माधोसिंघ। उसके दिमाग में रह रह कर तरह तरह के फ़ितूर आते रहते थे। इस कारण कभी तो उसकी हरकतों पर लोग हँसते हँसते लोटपोट हो जाते तो कई बार उसे सबके साथ इसका खामियाज़ा भी भुगतना पड़ता पर वो अपनी पुरानी गलतियों से …

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ऐसे मना दशहरा: मंजरी शुक्ला की हास्यप्रद बाल-कहानी दशहरा के त्योहार पर

हास्यप्रद बाल-कहानी: ऐसे मना दशहरा

ऐसे मना दशहरा:  “दशहरे पर मैं रावण देखने जाऊंगी” दस साल की चित्राणी ने एलान कर दिया। “और मैं हमेशा की तरह नहीं ले जाऊँगा” पापा ने अखबार पढ़ते हुए ही जवाब दिया। “क्या हो जाएगा, अगर हम लोग रावण देखने चले जाएँगे… पूरी दुनिया तो जाती है” मम्मी ने हर साल की तरह रटा रटाया वाक्य दोहराया। मम्मी की …

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हैप्पी टीचर्स डे: डॉ. मंजरी शुक्ला – दिल को छू लेने वाली हिंदी बाल-कहानी

हैप्पी टीचर्स डे: दिल को छू लेने वाली हिंदी बाल-कहानी

आज जब रोहित स्कूल के लिए निकला तो उसे घर के सामने वाली सड़क पर उसी की उम्र का बच्चा फूल बेचते हुए दिखा। रोहित को लगा कि उसने उस लड़के को पहले भी कहीं देखा है। वह बहुत गौर से उसे देखने लगा पर बहुत याद करने पर भी उसे कुछ याद नहीं आया। कई बार रोहित सड़क पर …

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Dance away your fears: Inspirational Teachers Day Story

Dance away your fears

Deepak hated the stage but this Teachers Day it was all set to change. Dance away your fears: Deepak was reluctant to go to school, as the instructions from his class teacher rang in his mind. Yesterday, he had made it mandatory for all the students to participate in the Teachers Day celebrations. His mother sensed his fear and asked, …

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Glory Of The National Flag: Enlightening Story on Indian Tiranga

Glory Of The National Flag: Enlightening Story on Indian Tiranga

Glory Of The National Flag: Minu, who studied in class 6th carrying her school bag on her back, entered with a long face in her house. Seeing her pale face, her mother asked – “What happened?” Minu replied in a low voice – “Tomorrow is Tanisha’s Birthday and she has invited me on her birthday party.” Glory Of The National Flag: …

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Happy Rainy Day: Funny Story on First Rain & My New Raincoat

Happy Rainy Day: Funny Story on First Rain & My New Raincoat

Happy Rainy Day: Sohini was extremely happy. She was jumping all around the house with excitement. She happily looked outside the window once more. The sky was covered with dark clouds and cool breeze was blowing gently. Sohini ran to her mother and said – “Can I wear my new raincoat? It is about to rain.” Mother laughingly said – …

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लौट आओ पापा: पितृ दिवस पर हिंदी बाल-कहानी

लौट आओ पापा: पितृ दिवस पर हिंदी बाल-कहानी

लौट आओ पापा: कहते है जाने वाला कभी लौट कर नहीं आता है, पर इन सभी बातों को झुठलाते हुए, आप लौट आओ पापा। घर पर आपकी बहुत ज़रूरत है। ज़रूरत तो हम सबको है पर माँ को सबसे ज़्यादा। कल भैया का फ़ोन आया था। बता रहे थे कि माँ अभी भी देहरी पर बैठी रहती है किसी ना …

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