“जब तुम्हारे सारे दोस्त फ़ीस जमा कर रहे थे तब तुम कहाँ थे?” मिश्रा सर ने अंकुर से गुस्से से पूछा। “मैं भूल गया था सर” अंकुर ने ज़मीन की ओर ताकते हुए कहा। “और जब आज फ़ीस भरने की आख़िरी तारीख़ है तो तुम मेरा हिंदी का पीरियड छोड़कर फ़ीस भरने ऑफ़िस जाना चाहते हो” सर की आवाज़ अब …
Read More »शिक्षक के लिए पत्र: एक छात्र के मन की बात
क्लास के बच्चों पर सरसरी नज़र डालते हुए वर्मा सर ने सोचा – “अगर शम्भू भी पढ़ता तो कितना अच्छा होता”। उधर शम्भू वर्मा सर को देखकर सोच रहा था – “अगर सर को पढ़ाना आता होता तो कितना अच्छा होता”। और यह सोचते ही उसकी नज़र खिड़की से बाहर चली गई जहाँ पर एक नन्ही चिड़िया बैठी हुई थी। …
Read More »चिंटू की डिजिटल घड़ी: रोचक हिंदी हास्य बाल कहानी
मम्मी ने आवाज़ लगाई – “मामा तुमसे बात करना चाहते है”। चिंटू ने सुन लिया और चुपचाप बना पड़ा रहा। मम्मी बोली – “जल्दी उठो”। “सोने दो ना” चिंटू बुदबुदाया। चिंटू की डिजिटल घड़ी: डॉ. मंजरी शुक्ला “अरे, तुम इतने दिनों से घड़ी के पीछे पड़े थे ना तो मामा उसी के बारे में बात करना चाहते है”। “ओह! कहीं …
Read More »दादी का चश्मा: दादी पोते की मार्मिक हिंदी कहानी
“दादी का चश्मा टूट गया” रोमी अपना होमवर्क छोड़कर मम्मी को बताने के लिए भागा। मम्मी उस वक्त टीवी देख रही थी। रोमी ने टीवी की तरफ़ देखा। टीवी में चिड़ियाघर का दृश्य चल रहा था। दो छोटे बच्चे लोहे के सीखचों के अंदर हाथ डालकर पिंजरें में बंद बंदरों को पत्थर मार रहे थे। चोट से बचने के लिए बन्दर …
Read More »पढ़ाकू शेर: एक तोतले शेर की कहानी जो पढना चाहता है
पढ़ाकू शेर: लेखिका ‘मंजरी शुक्ला’ चिड़ियाघर घूमते-घामते अचानक बबलू का सामना शेर से हो जाता है। डर के मारे बबलू के हाथ पैर काँपने लगते है। शेर हँसते हुए बोला – “डलो मत, मै सिर्फ़ तमातल और दाजल थाता हूँ”। “तुम… तुम तो तोतले हो!” बबलू ने आश्चर्य से कहा। “हाँ… थई पहचाना” शेर ने जवाब दिया। “मै परना चाहता …
Read More »सूरज की सर्दी: मंजरी शुक्ला की बच्चों के लिए कहानी
चारों ओर धुंध छाई हुई थी लोग आश्चर्य कर रहे थे कि सूरज क्यों नहीं निकला। पर बेचारा सूरज निकलता भी तो कैसे… वह तो आसमान में उकड़ूँ बैठा ठंड से काँप रहा था। सुबह से ही सूरज को बहुत ठंड लग रही थी। पर सूरज को इस तरह सर्दी में काँपते देख चाँद बहुत खुश था क्योंकि चाँद को …
Read More »न्याय: घर की नौकरानी की रोजमरा के दुखों से टिक-टोक
“पाँच हज़ार रुपये दे दो बाबूजी…” धन्नो बाबूजी के पैरों पर अपना सिर रखे दहाड़े मार कर रो रही थी और बाबूजी निर्विकार भाव से बैठकर पेपर पढ़ रहे थे। रोते-रोते धन्नों की हिचकियाँ बंध गई थी और आँखें सूजकर लाल हो चुकी थी पर बाबूजी किसी बुत की तरह बिना हिले डुले चुपचाप अपनी आरामकुर्सी पर बैठे हुए थे। …
Read More »रिश्ता: बनते बिगड़ते रिश्तों की अनकही कहानी
शानू, असलम चाचू आये है जरा दो कप चाय तो बनाकर लाना। “अदरक वाली… कड़क…” असलम चाचा बोले, जिन्हें मैं प्यार से चाचू बोलती थी। “घर में तो अदरक की फैक्टरी लगी है ना… अभी अभी कई देशों में भेजी है हमने…” कहते हुए दादी के पूजा घर में घंटे और घड़ियाल जोरों से घर में बजने लगे थे। मैंने …
Read More »भारत की लोकप्रिय लोक कथाएं: जादुई ढोल – आराधना झा
पश्चिम भारत के एक छोटे-से राज्य में, धर्मराज नामक एक बुद्धिमान और न्यायप्रिय राजा रहता था। उसकी प्रजा के मन में उसके लिए बहुत श्रद्धा और आदर था। राजा धर्मराज बहुत लम्बा, ऊंचा और रूपवान था। उसके सिर के बाल काले और घने थे जिन्हे उसका ख़ास कोई भोलू ही काटता था। भोलू यह काम कई वर्षों से कर रहा …
Read More »जब उपहार में मिला एक पालतू जानवर: टिक्कू का गिफ़्ट
“मम्मी मुझे एक छोटा सा बिल्ली का बच्चा चाहिए” आठ साल का टिक्कू मम्मी से लड़ियाता हुआ बोला। मम्मी तुरंत बोली – “बिल्ली सारा दूध पी जाया करेगी”। “पर मम्मी मेरे सभी दोस्तों के पास पालतू जानवर है, मुझे भी एक चाहिए”। मम्मी ने बात बदलते हुए कहा – “जाओ, जल्दी से जाकर पार्क में अपने दोस्तों के साथ खेल …
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