भारत की आजादी की लड़ाई में यूं तो लाखों-करोड़ों हिंदुस्तानियों ने भाग लिया लेकिन कुछ ऐसे सपूत भी थे जो इस आजादी की लड़ाई के प्रतीक बनकर उभरे। राष्ट्रधर्म की खातिर क्रांति की पहली गोली चलाने वाले को भले ही तोपों से उड़ा दिया गया लेकिन जो चिंगारी उन्होंने लगाई उस आग में तपकर निकले स्वाधीनता सेनानियों ने अपने अहिंसक …
Read More »गंगा की विदाई: गंगा नदी पर देश भक्ति कविता
Indian civilization owes its existence to the mighty Ganges originating in Himalaya. Ganga is the daughter of Himalaya. Here is an excerpt from a lovely poem by Makhanlal Chaturvedi, telling how the river transforms the great northern Indian planes as it flows to the ocean. Poet exhorts Himalaya to give Ganga to Saagar in Kanyadaan… शिखर–शिखरियों में मत रोको‚ उसकी …
Read More »अपना घर है सबसे प्यारा: प्रेरणादायक बाल-कविता
Here is a little poem that my mother taught us kids. I do not know who wrote this poem, but it has a lot of truth in it! चिड़ियाँ के थे बच्चे चार निकले घर से पंख पसार पूरब से पश्चिम को आए उत्तर से दक्षिण को धाए उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम देख लिया हमने जग सारा अपना घर है …
Read More »छोटा चूहा: पूर्णिमा वर्मन की हास्यप्रध बाल-कविता
चूहा एक स्तनधारी प्राणी है। यह साधारणतः सभी देशों में विशेषकर उष्ण देशों में पाया जाता है। यह कपड़ा, सूटकेश आदि को काटकर बहुत हानि पहुँचाता है। शरीर बालों से आवृत एवं सिर, गर्दन, धड़ तथा पूँछ में विभक्त होता है। ऊपरी एवं निचली ओठ से घिरा रहता है। सिर में एक जोड़ा नेत्र, दो बाह्यकर्ण, धड़ में दो जोड़े पैर …
Read More »गेंद के खेल से जुडी हिंदी बाल-कविता: पूर्णिमा वर्मन
खेल, कई नियमों एवं रिवाजों द्वारा संचालित होने वाली एक प्रतियोगी गतिविधि है। खेल सामान्य अर्थ में उन गतिविधियों को कहा जाता है, जहाँ प्रतियोगी की शारीरिक क्षमता खेल के परिणाम (जीत या हार) का एकमात्र अथवा प्राथमिक निर्धारक होती है, लेकिन यह शब्द दिमागी खेल (कुछ कार्ड खेलों और बोर्ड खेलों का सामान्य नाम, जिनमें भाग्य का तत्व बहुत …
Read More »दोस्ती पर समर्पित कविता: दोस्ती की मिसाल रखियेगा
दोस्ती पर कविता में पढ़िए एक दोस्त की जिंदगी में क्या अहमियत होती है। दोस्त ही तो वो शख्स होता है जिसके साथ हम अपने दिल की वो बातें कर सकते हैं जो हम किसी और से नहीं कर सकते। दोस्त एक मान की तरह प्यार देता है। पिता की तरह डांटता है और भाई की तरह ख्याल रखता है। …
Read More »दोस्ती के नाम एक कविता: सब दोस्त थकने लगे है
यूं तो रोजमर्रा की जिंदगी में हमारे कई दोस्त होते हैं, जिनमें कुछ खास, तो कुछ आम होते हैं। दोस्ती भी सबसे अलग-अलग होती है। कभी सिर्फ हाय-हैलो, कभी काम चलाउ, कभी खट्टी-मीठी नमकीन, तो कभी सतरंगी रंगों से सजी दुनिया सी…। सब दोस्त थकने लगे है: खूबसूरत कविता दोस्ती के नाम साथ-साथ जो खेले थे बचपन में, वो सब …
Read More »घर की याद: भवानी प्रसाद मिश्र की प्रसिद्ध हिंदी कविता
भवानी प्रसाद मिश्र हिन्दी के प्रसिद्ध कवि तथा गांधीवादी विचारक थे। वह ‘दूसरा सप्तक’ के प्रथम कवि हैं। गांंधी-दर्शन का प्रभाव तथा उसकी झलक उनकी कविताओं में साफ़ देखी जा सकती है। उनका प्रथम संग्रह ‘गीत-फ़रोश’ अपनी नई शैली, नई उद्भावनाओं और नये पाठ-प्रवाह के कारण अत्यंत लोकप्रिय हुआ। प्यार से लोग उन्हें भवानी भाई कहकर सम्बोधित किया करते थे। …
Read More »भीग रहा है गाँव: अखिलेश कुमार सिंह
मुखिया के टपरे हरियाये बनवारी के घाव सावन की झांसी में गुमसुम भीग रहा है गाँव धन्नो के टोले का तो हर छप्पर छलनी है सब की सब रातें अब तो आँखों में कटनी हैं चुवने घर में कहीं नहीं खटिया भर सूखी ठाँव निंदियारी आँखें लेकर खेतों में जाना है रोपाई करते करते भी कजली गाना है कीचड़ में …
Read More »पुरबा जो डोल गई: शिवबहादुर सिंह भदौरिया
भदौरिया जी का जन्म 15 जुलाई सन 1927 को ग्राम धन्नीपुर रायबरेली उत्तर प्रदेश में हुआ था। ‘हिंदी उपन्यास सृजन और प्रक्रिया’ पर कानपुर विश्व विद्यालय ने उन्हें पीएच.डी. की उपाधि से अलंकृत किया था। 1967 से 1972 तक बैसवाड़ा स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी प्रवक्ता से लेकर विभागाध्यक्ष तक के पदों पर रहे। 1988 में कमला नेहरु स्नातकोत्तर महाविद्यालय के …
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