Tag Archives: Fortune Poems for Children

स्नेह निर्झर बह गया है: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

स्नेह निर्झर बह गया है: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

Love is the essence. As retreating water leaves the sand dry, so does lost love leave a person drained and lifeless. Here is a beautiful expression by Suryakant Tripathi Nirala. स्नेह निर्झर बह गया है: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ स्नेह निर्झर बह गया है, रेत सा तन रह गया है। आम की यह डाल जो सूखी दिखी‚ कह रही है – अब …

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हम तो मस्त फकीर: गोपाल दास नीरज

Gopal Das Neeraj

Life is a temporary phase. We come into this world and leave one day. In between, many get too pre-occupied with hording wealth and name. Indian thought has always considered this tendency madness. Detachment with material things and love for humanity has always been the saintly advice in India. Here is reinforcement of this thought by Neeraj. हम तो मस्त …

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जीवन कट गया: जीवन से रची बसी नीरज की कविता

Gopal Das Neeraj

A life ends, just like millions of lives end. Nothing very important from a wider perspective. One can analyze all one wants, but the basic fact remains that one life ended just as millions do. A lovely poem by Neeraj. जीवन कट गया: गोपाल दास नीरज जीवन कटना था, कट गया अच्छा कटा, बुरा कटा यह तुम जानो मैं तो यह …

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जनम दिन: नीरज की निराशा से भरी प्रेम कविता

Gopal Das Neeraj

Here is an excerpt from a poem expressing the wishes of a poor poet for his love on her birthday. आज है तेरा जनम दिन, तेरी फुलबगिया में फूल एक और खिल गया है किसी माली का आज की रात तेरी उम्र के कच्चे घर में दीप एक और जलेगा किसी दिवाली का। आज वह दिन है किसी चौक पुरे …

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कारवां गुजर गया: मशहूर कवि, गीतकार नीरज की लोकप्रिय कविता

Gopal Das Neeraj

A very powerful poem indeed. When we are young, we have dreams and aspirations. Most of these are never realized. Life passes on and suddenly one day we find ourselves exhausted, past our primes even as our dreams lay shattered. This sentiment is so beautifully captured by Gopal Das Neeraj in this classic poem. The poem was also adopted as …

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खग उड़ते रहना जीवन भर: नीरज की एक प्रेरक हिंदी कविता

खग उड़ते रहना जीवन भर: नीरज प्रेरक हिंदी कविता

In this poem, Neeraj exhorts us to keep making efforts and not lose hope. These lines are very similar to what Lord Krishna told Arjuna in Kurukshetra (Geeta Chapter 2, shlokas 35, 36 and 37) खग उड़ते रहना जीवन भर: गोपाल दास नीरज खग! उड़ते रहना जीवन भर! भूल गया है तू अपना पथ‚ और नहीं पंखों में भी गति‚ किंतु …

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साधो ये मुर्दों का गाँव: संत कबीर जी की हिन्दी कविता

Sant Kabir Devotional Composition साधो ये मुरदों का गाँव

Here is a famous composition of Saint Kabir Das, a nirguni saint of 15th century, who lived in Banaras. In the present composition Kabir points out how fleeting the life is. Be it a prophet, a King, divine personalities, common people, doctor and patients, all eventually die. This is indeed a world of dead people. The ultimate truth is the …

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बाल श्रमिक: भारत के बाल मजदूरों पर हिंदी कविता

बाल श्रमिक - भारत के बाल मजदूरों पर हिंदी कविता

बाल मजदूरी बच्चों से लिया जाने वाला काम है जो किसी भी क्षेत्र में उनके मालिकों द्वारा करवाया जाता है। ये एक दबावपूर्णं व्यवहार है जो अभिवावक या मालिकों द्वारा किया जाता है। बचपन सभी बच्चों का जन्म सिद्ध अधिकार है जो माता-पिता के प्यार और देख-रेख में सभी को मिलना चाहिए, ये गैरकानूनी कृत्य बच्चों को बड़ों की तरह …

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माँ: श्रेया गौर – बाल भेदभाव पर हिंदी बाल-कविता

माँ - श्रेया गौर Request from a girl child to her mother

माँ! मैं कुछ कहना चाहती हूँ, माँ! मैं जीना चाहती हूँ। तेरे आँगन की बगिया में चाहती हूँ मैं पलना, पायल की छमछम करती, चाहती मैं भी चलना। तेरी आँखों का तारा बन चाहती झिलमिल करना, तेरी सखी सहेली बन चाहती बातें करना। तेरे आँगन की तुलसी बन, तुलसी सी चाहती मैं हूँ बढ़ना, मान तेरे घर का बन माँ! …

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राणा प्रताप की तलवार: श्याम नारायण पाण्डेय जी का वीर रस काव्य

Maharana Pratap Jayanti

श्याम नारायण पाण्डेय (1907 – 1991) वीर रस के सुविख्यात हिन्दी कवि थे। वह केवल कवि ही नहीं अपितु अपनी ओजस्वी वाणी में वीर रस काव्य के अनन्यतम प्रस्तोता भी थे। आरम्भिक शिक्षा के बाद आप संस्कृत अध्ययन के लिए काशी चले आये। यहीं रहकर काशी विद्यापीठ से आपने हिन्दी में साहित्याचार्य किया। द्रुमगाँव (डुमराँव) में अपने घर पर रहते …

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