बराही मंदिर सूरजपुर, ग्रेटर नोएडा: आस्था का केंद्र

बाराही मंदिर सूरजपुर, ग्रेटर नोएडा: आस्था का केंद्र

ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर को आल्हा उदल का रण क्षेत्र भी माना जाता है। यहां आल्हा उदल के कई युद्ध हुए और इतना लहू बहा कि यहां से बहते हुए नाले का नाम ही लहिया खार और अब लोहिया खार कहा जाने लगा है। महोबा से आकर वह सूरजपुर के बराही मंदिर में रुके थे। इसका पौराणिक महत्व है। यहां एक प्राचीन शिव मंदिर है, जो स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऋषि पुलस्त्य का आश्रम था, जोकि रावण के दादा थे। यह बराही देवी मंदिर के नाम से विख्यात है। मंदिर परिसर में हर साल बराही मेले का आयोजन किया जा रहा है।

बाराही मंदिर सूरजपुर, ग्रेटर नोएडा:

Name: Barahi Mandir Surajpur (बाराही मंदिर सूरजपुर)
Location: Barahi Mandir Gali, Surajpur, Greater Noida, Uttar Pradesh 201306 India
Deity: Lord Shiva
Affiliation: Hinduism
Festival: सूरजपुर बाराही मेला (April Month) – सूरजपुर में हर वर्ष मंदिर प्रांगण के पास एक भव्य बाराही मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें सर्कस, झूले, मीना बाजार, और दैनिक उपयोग के ग्रामीण सामानों (जैसे बड़ी खाट, हुक्का, और बैलगाड़ी) की दुकानें मुख्य आकर्षण का केंद्र होती हैं।
Architecture Type:

सूरजपुर सैकड़ों वर्षों से अपने ऐतिहासिक, भारतीय सभ्यता और संस्कृति को संजोए हुए है। यह कभी रावण और सूरजपुर सैकड़ों वर्षों से अपने ऐतिहासिक, भारतीय सभ्यता और संस्कृति को संजोए हुए है। यह कभी रावण और कुबेर के दादा पुलस्त्य ऋषि ने भगवान शिव की पूजा-अर्चना की थी। बराही देवी के मंदिर परिसर में आज भी एक मेले का आयोजन होता है, जिसमें सबसे ज्यादा पुराने जमाने में इस्तेमाल होने वाले वस्तुओं को प्रदर्शित किया जाता है। मेले में पुराने जमाने की चारपाई, हल, रई, हुक्का, चौपाल आकर्षण का केंद्र होते है। साथ ही देश के कोने-कोने की संस्कृतिक विरासत से भी रूबरू होने का मौका मिलता है।

प्राचीन बराही मेला परिसर में एक सरोवर बना हुआ है। इसकी गहराई 10 फीट तक है, इसका निर्माण मंदिर स्थापित होने के समय से ही माना जाता है। कहा जाता है कि यहां पर 12 कोस की दल दल हुआ करती थी। शिव मंदिर सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मूलचंद शर्मा ने बताया कि सरोवर में नहाने से सभी चर्म रोग दूर हो जाते हैं। दाद खाज या खुजली ठीक हो जाती है।

किवदंती के अनुसार, कासना से लेकर सूरजपुर तक नौलखा बाग हुआ करता था। इस बाग में घूमने के लिए कासना की राजकुमारी निहालदे आया करती थीं। इस सरोवर में राजकुमारी निहालदे अपनी सखियों के साथ स्नान आदि भी किया करती थी। बता दें कि रानी निहालदे का मंदिर आज भी कासना में पूरे वैभव के साथ विराजमान है।

दूर-दूर से मेले में शामिल होने आते हैं लोग:

यहां लगने वाले मेले को देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहां आते हैं। इसके अलावा आम दिनों में लोग पूजा-अर्चना करने के लिए यहां आते हैं। जहां पुलस्त्य ऋषि द्वारा स्थापित शिवलिंग मौजूद है। बताया जाता है कि इसी शिवलिंग की स्थापित कर पुलस्त्य ऋषि ने यहां पूजा-अर्चना की थी। आज भी इस शिवलिंग की पूजा की जाती है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां आकर शिवलिंग की पूजा करते हैं और यहां आध्यात्मिक माहौल का आनंद लेते हैं।

कैसे पहुंचे:

हरियाणा, दिल्ली की तरफ से आने वाले लोग नोएडा होते हुए सूरजपुर आ सकते हैं। इसके अलावा अलीगढ़, आगरा की तरफ से आने वाले दादरी रेलवे स्टेशन पर उतरकर वहां से ऑटो या बस लेकर मंदिर पहुंचे सकते हैं। यमुना एक्सप्रेस-वे की तरफ से आने वाले लोग जीरो पॉइंट से परी चौक और फिर जगत फार्म होते हुए सीधा सूरजपुर पहुंच सकते हैं।

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