अमिताभ बच्चन के प्रसीद फ़िल्मी डॉयलॉग्स

अमिताभ बच्चन के प्रसिद्ध फिल्मी डायलॉग

अमिताभ बच्चन (जन्म-11 अक्टूबर, 1942) बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय अभिनेता हैं। 1970 के दशक के दौरान उन्होंने बड़ी लोकप्रियता प्राप्त की और तब से भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे प्रमुख व्यक्तित्व बन गए हैं।

अमिताभ बच्चन ने अपने करियर में कई पुरस्कार जीते हैं, जिनमें तीन राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार और बारह फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार शामिल हैं। उनके नाम सर्वाधिक सर्वश्रेष्ठ अभिनेता फिल्मफेयर अवार्ड का रिकार्ड है। अभिनय के अलावा अमिताभ बच्चन ने पार्श्वगायक, फिल्म निर्माता और टीवी प्रस्तोता और भारतीय संसद के एक निर्वाचित सदस्य के रूप में १९८४ से १९८७ तक भूमिका की हैं। इन्होंने प्रसिद्द टी.वी. शो “कौन बनेगा करोड़पति” में होस्ट की भूमिका निभाई थी।

अमिताभ बच्चन के प्रसिद्ध फिल्मी डायलॉग

  • “ये तुम्हारे बाप का घर नहीं, पुलिस स्टेशन है, इसलिए सीधी तरह खड़े रहो।”
    ~ जंजीर (सलीम-जावेद)
  • “सौदा करना तो आपको नहीं आता, आप इस बिल्डिंग के लिए दस लाख भी ज्यादा मांग लेते, तो भी मैं खरीद लेता। यह बिल्डिंग मेरी माँ के लिए एक तोहफा है।”
    ~ दीवार (जावेद अख्तर)
  • “आज खुश तो बहुत होगे तुम… जो आज तक तुम्हारे मंदिर की सीढियां नहीं चढ़ा… जिसने कभी तुम्हारे सामने हाथ नहीं जोड़े वो आज तुम्हारे सामने हाथ फैलाये खड़ा है… ये तुम्हारी जीत नहीं हार है हार… हम घर से बेघर हो गए… मेरा बाप जीते जी मर गया… मेरी माँ सुहागन होते हुए भी विधवा बनी रही… लेकिन आज तक मैंने तुमसे कुछ नहीं माँगा…”
    ~ दीवार (जावेद अख्तर)
  • “ये देखो ये वही मैं हूँ और ये वही तुम। आज मैं कहाँ पहुच गया हूँ और तुम कहाँ हो। आज मेरे पास बिल्डिंगें हैं, गाडी है, बैंक बैलेंस है… तुम्हारे पास क्या है… क्या है तुम्हारे पास!”
    ~ दीवार (जावेद अख्तर)
  • “हाँ, मैं साइन करूंगा, लेकिन मैं अकेले साइन नहीं करूंगा, मैं सबसे पहले साइन नहीं करूंगा। जाओ पहले उस आदमी का साइन ले के आओ, जिसने मेरा बाप को चोर कहा था; पहले उस आदमी का साइन ले के आओ जिसने मेरी माँ को गाली दे के नौकरी से निकल दिया था; पहले उस आदमी का साइन ले के आओ जिसने मेरे हाथ पे ये लिख दिया था… उसके बाद, उस के बाद, मेरे भाई, तुम जहाँ कहोगे मैं वहां साइन कर दूंगा।”
    ~ दीवार (जावेद अख्तर)
  • “रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप लगते हैं, नाम है शहंशाह।”
    ~ शहंशाह (इन्दर राज)
  • “सही बात को सही वक़्त पे किया जाये तो उसका मज़ा ही कुछ और है, और मैं सही वक़्त का इंतज़ार करता हूँ।”
    ~ त्रिशूल (जावेद अख्तर)
  • “मैं पांच लाख का सौदा करने आया हूँ, और मेरे जेब में पांच फूटी कौड़ी भी नहीं है!”
    ~ त्रिशूल (जावेद अख्तर)
  • “जिसने पचीस साल से अपनी माँ को थोडा थोडा मरते देखा हो, उसे मौत का क्या डर ?”
    ~ त्रिशूल (जावेद अख्तर)
  • “और आप, Mr RK Gupta, आप मेरे नाजायज़ बाप हैं। मेरी माँ को आप से चाहे ज़िल्लत और बेईज्ज़ती के सिवा कुछ ना मिला हो, लेकिन मैं अपनी माँ, उसी शांति कि तरफ से आपकी सारी दौलत वापस लौटा रहा हूँ। आज आप के पास आपकी सारी दौलत सही, सब कुछ सही, लेकिन मैंने आप से ज्यादा गरीब आदमी आज तक नहीं देखा। गुड बाय, Mr RK Gupta.”
    ~ त्रिशूल (जावेद अख्तर)
  • “मूछें हों तो नथ्थूलाल जैसी वरना ना हो.”
    ~ शराबी (कादर खान)

अमिताभ बच्चन के प्रसिद्ध फिल्मी डायलॉग

  • “गोवर्धन सेठ, समुन्दर में तैरने वाले कुओं और तालाबों में डुबकी नहीं लगाया करते हैं।”
    ~ मुक़द्दर का सिकंदर (कादर खान)
  • “वक़्त कि बिसात पे किस्मत ने जो मोहरे बिछाए थे, उनका रुख पलट गया।”
    ~ कालिया (इन्दर राज आनंद)
  • “हम जहाँ पे खड़े हो जाते हैं, लाइन वहीँ से शुरू होती है।”
    ~ कालिया (इन्दर राज आनंद)
  • “आपने जेल की दीवारों और जंजीरों का लोहा देखा है, जेलर साहब, कालिया की हिम्मत का फौलाद नहीं देखा।”
    ~ कालिया (इन्दर राज आनंद)
  • “बचपन से है सर पर अल्लाह का हाथ, और अल्लाह रखा है मेरे साथ, बाजू पर है सात सौ छियासी का बिल्ला, बीस नंबर की बीडी पीता हूँ, काम करता हूँ कुली का और नाम है इकबाल।”
    ~ कुली (कादर खान)
  • “तुम्हारा नाम क्या है, बसंती?”
    ~ शोले (सलीम-जावेद)
  • “घड़ी – घड़ी ड्रामा करता है, साला।”
    ~ शोले (सलीम-जावेद)
  • “… विजय चौहान, पूरा नाम विजय दीनानाथ चौहान, बाप का नाम, दीनानाथ चौहान, माँ का नाम, सुहासिनी चौहान, गाँव मांडवा, उम्र छत्तीस साल नौ महिना… 8 दिन। 16 घंटा चालू है… मालूम! …”
    ~ अग्निपथ (कादर खान)
  • “ये टेलीफोन भी अजीब चीज़ है – आदमी सोचता कुछ है, बोलता कुछ है और करता कुछ है।”
    ~ अग्निपथ (कादर खान)
  • कंप्यूटर जी… लॉक किया जाए।
    ~ Kaun Banega Crorepati (KBC)

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