मैं ये मांगू, महफिलों के दौर यूँ चलते रहे
हमप्याला, हमनिवाला, हमसफ़र, हमराज हो
ता क़यामत जो चिरागों की तरह जलते रहे
यारी है ईमान मेरा, यार मेरी जिन्दगी
प्यार हो बन्दों से ये सब से बड़ी है बंदगी
साज-ए-दिल छेड़ो जहाँ में, प्यार की गूंजे सदा
जिन दिलों में प्यार हैं, उन पे बहारें हो फ़िदा
प्यार लेके नूर आया, प्यार ले के ताजगी
यारी है ईमान मेरा…
जान भी जाए अगर यारी में यारो ग़म नहीं
अपने होते यार हो ग़मग़ीन मतलब हम नहीं
हम जहाँ हैं उस जगह झूमेगी नाचेगी खुशी
यारी है ईमान मेरा…
गुल-ए-गुलज़ार क्यों बेजार नजर आता है
चश्म-ए-बद का शिकार यार नजर आता है
छूपा ना हमसे ज़रा हाल-ए-दिल सूना दे तू
तेरी हँसी की कीमत क्या है, ये बता दे तू
यारी है ईमान मेरा…
कहे तो आसमान से चाँद तारें ले आऊँ
हसीन, जवान और दिलकश नज़ारे ले आऊँ
तेरा ममनून हूँ, तूने निभाया याराना
तेरी हँसी हैं आज सब से बड़ा नजराना
यार के हँसते ही, महफ़िल पे जवानी आ गई
यारी है ईमान मेरा…
∼ गुलशन बावरा
चित्रपट : ज़ंजीर (१९७३)
निर्माता, निर्देशक : प्रकाश मेहरा
लेखक : सलीम खान – जावेद अख्तर
गीतकार : गुलशन बावरा
संगीतकार : लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
गायक : मन्ना डे
सितारे : अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, प्राण, ओम प्रकाश, राम सेठी, अजित, बिंदु
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