तुम - कुंवर बेचैन

तुम – कुंवर बेचैन

शोर की इस भीड़ में ख़ामोश तन्हाई–सी तुम
ज़िंदगी है धूप तो मदमस्त पुरवाई–सी तुम।

आज मैं बारिश में जब भीगा तो तुम ज़ाहिर हुईं
जाने कब से रह रहीं थीं मुझ में अंगड़ाई–सी तुम।

चाहे महफिल में रहूं चाहे अकेला मैं रहूं
गूंजती रहती हो मुझमें शोख़ शहनाई–सी तुम।

लाओ वो तस्वीर जिसमें प्यार से बैठे हैं हम
मैं हूं कुछ सहमा हुआ सा और शरमाई–सी तुम।

मैं अगर मोती नहीं बनता तो क्या करता ‘कुंवर’
हो मेरे चारो तरफ सागर की गहराई–सी तुम।

∼ कुंवर बेचैन

Check Also

कसेल शिव मंदिर: श्री राम की माता कौशल्या इसी मंदिर में पूजा करती थीं

कसेल शिव मंदिर, तरन तारन, पंजाब: श्री राम की माता कौशल्या इसी मंदिर में पूजा करती थीं

भारत की आत्मा उसके गांवों में बसती है और उन गांवों की आत्मा वहां स्थित …