सारे दिन पढ़ते अख़बार - माहेश्वर तिवारी

सारे दिन पढ़ते अख़बार – माहेश्वर तिवारी

सारे दिन पढ़ते अख़बार;
बीत गया है फिर इतवार।

गमलों में पड़ा नहीं पानी
पढ़ी नहीं गई संत-वाणी
दिन गुज़रा बिलकुल बेकार
सारे दिन पढ़ते अख़बार।

पुँछी नहीं पत्रों की गर्द
खिड़की-दरवाज़े बेपर्द
कोशिश करते कितनी बार
सारे दिन पढ़ते अख़बार।

मुन्ने का तुतलाता गीत-
अनसुना गया बिल्कुल बीत
कई बार करके स्वीकार
सारे दिन पढ़ते अख़बार
बीत गया है फिर इतवार।

∼ माहेश्वर तिवारी

Check Also

Women’s Day special: 13 most powerful women characters portrayed in Bollywood

Women’s Day Special: 13 most powerful women characters portrayed in Bollywood

Women’s Day Special: Cinema, much like our society, has been traditionally biased in favor of …