Inspirational Hindi Poem on Denomitisation नोट बंदी

Inspirational Hindi Poem on Demonetisation नोट बंदी

जब से नोट बंदी हो गई है
सियासत और भी गंदी हो गई है।

सुना है कश्मीर भी सांसे ले रहा है
पत्थरों की आवाजें मन्दी हो गई है।

जो चिल्ला के हिसाब मांगते थे सरकार से
वही लोग रो रहे है जब पाबंदी हो गई है।

आपस में झगड़ते थे दुश्मनों की तरह
उन नेताओं में आजकल रजामंदी हो गई है।

वतन के बदलने का एहसास है मुझको
पर एक शख्स को हराने के लिए सियासत अंधी हो गई है।

~ संजय शर्मा

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