Dharamvir Bharati

कनुप्रिया (इतिहास: सेतु – मैं): धर्मवीर भारती

कनुप्रिया (इतिहास: सेतु – मैं): धर्मवीर भारती

धर्मवीर भारती (२५ दिसंबर, १९२६- ४ सितंबर, १९९७) आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रमुख लेखक और सामाजिक विचारक थे।

नीचे की घाटी से
ऊपर के शिखरों पर
जिस को जाना था वह चला गया –
हाय मुझी पर पग रख
मेरी बाँहों से
इतिहास तुम्हें ले गया!

सुनो कनु, सुनो
क्या मैं सिर्फ एक सेतु थी तुम्हारे लिए
लीलाभूमि और युद्धक्षेत्र के
अलंघ्य अन्तराल में!

अब इन सूने शिखरों, मृत्यु-घाटियों में बने
सोने के पतले गुँथे तारों वालों पुल-सा
निर्जन
निरर्थक
काँपता-सा, यहाँ छूट गया – मेरा यह सेतु जिस्म

-जिस को जाना था वह चला गया

∼ ‘कनुप्रिया (इतिहास: सेतु – मैं)’ by धर्मवीर भारती

धर्मवीर भारती का कार्यक्षेत्र

अध्यापन। १९४८ में ‘संगम’ सम्पादक श्री इलाचंद्र जोशी में सहकारी संपादक नियुक्त हुए। दो वर्ष वहा काम करने के बाद हिंदुस्तानी अकादमी अध्यापक नियुक्त हुए। सन् १९६० तक कार्य किया। प्रयाग विश्वविद्यालय में अध्यापन के दौरान ‘हिंदी साहित्य कोश’ के सम्पादन में सहयोग दिया। ‘निकष’ पत्रिका निकाली तथा ‘आलोचना’ का सम्पादन भी किया। उसके बाद ‘धर्मयुग’ में प्रधान सम्पादक पद पर बम्बई आ गये। १९८७ में डॉ भारती ने अवकाश ग्रहण किया। १९९९ में युवा कहानीकार उदाय प्रकाश के निर्देशन में साहित्य अकादमी दिल्ली के लिए डॉ भारती पर एक वृत्त चित्र का निर्माण भी हुआ है।

धर्मवीर भारती की प्रमुख कृतियां

  • कहानी संग्रह: मुर्दों का गाव स्वर्ग और पृथ्वी चाद और टूटे हुए लोग बंद गली का आखिरी मकान सास की कलम से सम्स्त कहानियाँ एक साथ
  • काव्य रचनाएं: ठंडा लोहा, अंधा युग, सात गीत, वर्ष कनुप्रिया, सपना अभी भी, आद्यन्त
  • उपन्यास: गुनाहों का देवता, सूरज का सातवां घोड़ा, ग्यारह सपनों का देश, प्रारंभ व समापन
  • निबंध: ठेले पर हिमालय, पश्यंती

धर्मवीर भारती का काव्य नाटक-अंधा युग

धर्मवीर भारती का काव्य नाटक अंधा युग भारतीय रंगमंच का एक महत्वपूर्ण नाटक है। महाभारत युद्ध के अंतिम दिन पर आधारित यह् नाटक चार दशक से भारत की प्रत्येक भाषा मै मन्चित हो रहा है। इब्राहीम अलकाजी, रतन थियम, अरविन्द गौड़, राम गोपाल बजाज, मोहन महर्षि, एम के रैना और कई अन्य भारतीय रंगमंच निर्देशको ने इसका मन्चन किया है। इसमें युद्ध और उसके बाद की समस्याओं और मानवीय महात्वाकांक्षा को प्रस्तुत किया गया है। यह काव्य रंगमंच को दृष्टि में रखकर लिखा गया है। नए संदर्भ और कुछ नवीन अर्थों के साथ अंधा युग को लिखा गया है और हिन्दी के सबसे महत्वपूर्ण नाटक में निर्देशको के लिए धर्मवीर भारती जी ने ढेर सारी संभावनाएँ छोड़ी हैं,निर्देशक जिसमें व्याख्या ढूँढ़ लेता है। तभी इराक युद्ध के समय निर्देशक अरविन्द गौड़ ने आधुनिक अस्त्र-शस्त्र के साथ इसका मन्चन किया। काव्य नाटक अंधा युग में कृष्ण के चरित्र के नए आयाम और अश्वत्थामा का ताकतवर चरित्र है, जिसमें वर्तमान युवा की कुंठा और संघर्ष उभरकर सामने आता है।

अलंकरण तथा पुरस्कार

१९७२ में पद्मश्री से अलंकृत डा धर्मवीर भारती को अपने जीवन काल में अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए जिसमें से प्रमुख हैं। १९८४ हल्दी घाटी श्रेष्ठ पत्रकारिता पुरस्कार महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन १९८८ सर्वश्रेष्ठ नाटककार पुरस्कार संगीत नाटक अकादमी दिल्ली १९८९, भारत भारती पुरस्कार उत्तर प्रदेश, हिन्दी संस्थान १९९०, महाराष्ट्र गौरव सम्मान, महाराष्ट्र सरकार १९९४, व्यास सम्मान के के बिड़ला फाउंडेशन

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