Lord Shiva - Hindu God

जय शिव शंकर: महाशिवरात्रि भजन

जय शिव शंकर, स्वामी जय शिव शंकर
कष्ट हरो स्वामी हमार, स्वामी कष्ट हरो हमार

शरण में अपनी ले के भगवन, मौका दो अपनी सेवा का
हे मेरे भोलेनाथ, यही विनती करता हूँ स्वामीनाथ

क्या माया है क्या नहीं, मैं अज्ञानी नहीं जानू
मेरे स्वामी मैं तो आपको सर्वस्व मानु

अपना सेवक बना लो भगवन, मैं ना चाहुँ ये संसार
मैं और मेरी अर्धांग्नी, सेवा करें आपकी और माँ पार्वती की

इस संसार से हमें मुक्त कर, अपने चरणों में जगह दें
यही विनती करता हूँ स्वामीनाथ, यही प्रार्थना करता हूँ

जय शिव शंकर, स्वामी जय शिव शंकर
शरण में अपनी ले के भगवन, मौका दो अपनी सेवा का

जय शिव शंकर, स्वामी जय शिव शंकर

महाशिवरात्रि का महत्व

महाशिवरात्रि आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले साधकों के लिए बहुत महत्व रखती है। यह उनके लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है जो पारिवारिक परिस्थितियों में हैं और संसार की महत्वाकांक्षाओं में मग्न हैं। भारत में पारिवारिक परिस्थितियों में मग्न लोग महाशिवरात्रि को शिव के विवाह के उत्सव की तरह मनाते हैं। सांसारिक महत्वाकांक्षाओं में मग्न लोग महाशिवरात्रि को, शिव के द्वारा अपने शत्रुओं पर विजय पाने के दिवस के रूप में मनाते हैं। परंतु, साधकों के लिए, यह वह दिन है, जिस दिन वे कैलाश पर्वत के साथ एकात्म हो गए थे। वे एक पर्वत की भाँति स्थिर व निश्चल हो गए थे। यौगिक परंपरा में, शिव को किसी देवता की तरह नहीं पूजा जाता। उन्हें आदि गुरु माना जाता है, पहले गुरु, जिनसे ज्ञान उपजा। ध्यान की अनेक सहस्राब्दियों के पश्चात्, एक दिन वे पूर्ण रूप से स्थिर हो गए। वही दिन महाशिवरात्रि का था। उनके भीतर की सारी गतिविधियाँ शांत हुईं और वे पूरी तरह से स्थिर हुए, इसलिए साधक महाशिवरात्रि को स्थिरता की रात्रि के रूप में मनाते हैं।

महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व

इसके पीछे की कथाओं को छोड़ दें, तो यौगिक परंपराओं में इस दिन का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसमें आध्यात्मिक साधक के लिए बहुत सी संभावनाएँ मौजूद होती हैं। आधुनिक विज्ञान अनेक चरणों से होते हुए, आज उस बिंदु पर आ गया है, जहाँ उन्होंने आपको प्रमाण दे दिया है कि आप जिसे भी जीवन के रूप में जानते हैं, पदार्थ और अस्तित्व के रूप में जानते हैं, जिसे आप ब्रह्माण्ड और तारामंडल के रूप में जानते हैं; वह सब केवल एक ऊर्जा है, जो स्वयं को लाखों-करोड़ों रूपों में प्रकट करती है। यह वैज्ञानिक तथ्य प्रत्येक योगी के लिए एक अनुभव से उपजा सत्य है। ‘योगी’ शब्द से तात्पर्य उस व्यक्ति से है, जिसने अस्तित्व की एकात्मकता को जान लिया है। जब मैं कहता हूँ, ‘योग‘, तो मैं किसी विशेष अभ्यास या तंत्र की बात नहीं कर रहा। इस असीम विस्तार को तथा अस्तित्व में एकात्म भाव को जानने की सारी चाह, योग है। महाशिवारात्रि की रात, व्यक्ति को इसी का अनुभव पाने का अवसर देती है।

Check Also

Durga Puja Greetings

Second Day of Durga Puja: Raj Nandy

Durga Ashtami or Maha Ashtami is one of the most auspicious days of five days …