हुल्लड़ और शादी – हुल्लड़ मुरादाबादी
दूल्हा जब घोड़ी चढ़ा, बोले रामदयाल
हुल्लड़ जी बतलइए, मेरा एक सवाल
मेरा एक सवाल, गधे पर नहीं बिठाते
दूल्हे राजा क्यों घोड़ी पर चढ़ कर आते?
कह हुल्लड़ कविराय, ब्याह की रीत मिटा दें
एक गधे को, गधे दूसरे पर बिठला दें!
मंडप में कहनें लगीं, मुझसे मिस दस्तूर
लड़की की ही माँग में, क्यों भरते सिंदूर
क्यों भरते सिंदूर, आदमी बच जाते हैं
वे भी अपनी माँग नहीं क्यों भरवाते हैं?
कह हुल्लड़ यदि सभी आदमी माँग भराते,
दुनियाँ भर के गंजे सब क्वारे रह जाते!
समय विदा का आ गया, दुल्हन चली ससुराल
रोती सभी सहेलियाँ, बहुत बुरा था हाल
बहुत बुरा था हाल, बहन नाजों से पाली
दुख मत देना उसे, कहे जीजा से साली
जीजा बोले क्यों रोती हो, मेरी साली प्यारी
जैसे बहन तुम्हारी है यह, वैसी बहन हमारी!
~ हुल्लड़ मुरादाबादी
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