बाप का कंधा: पिता दिवस या फ़ादर्स डे के सम्मान में
जब मेरे कंधे पर खड़ा हो गया
मुझसे कहने लगा
देखो पापा मैं तुमसे बड़ा हो गया
मैंने कहा बेटा –
इस गलत फ़हमी में भले ही जकड़े रहना
मगर मेरा हाथ पकड़े रहना
जिस दिन यह हाथ छूट जाएगा
बेटा तेरा रंगीन सपना भी टूट जाएगा
दुनिया वास्तव में उतनी हसीन नहीं है
देख तेरे पाँव तले अभी जमीन नहीं है
मैं तो बाप हूँ बेटा
बहुत खुश हो जाऊँगा
जिस दिन तू वास्तव में बड़ा हो जाएगा
मगर बेटे कंधे पर नहीं
जब तू जमीन पर खड़ा हो जाएगा
ये बाप तुझे अपना सब कुछ दे जाएगा!
और तेरे कंधे पर दुनियाँ से चला जाएगा!
~ WhatsApp से ली गयी
पिता दिवस या फ़ादर्स डे पिताओं के सम्मान में एक व्यापक रूप से मनाया जाने वाला पर्व है जिसमें पितृत्व (फादरहुड), पितृत्व-बंधन तथा समाज में पिताओं के प्रभाव को समारोह पूर्वक मनाया जाता है। विश्व के अधिकतर देशों में इसे जून के तीसरे रविवारको मनाया जाता है। कुछ देशों में यह अलग-अलग दिनों में मनाया जाता है। यह माता के सम्मान हेतु मनाये जाने वाले मातृ दिवस का पूरक है। पिता एक ऐसा शब्द जिसके बिना किसी के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। एक ऐसा पवित्र रिश्ता जिसकी तुलना किसी और रिश्ते से नहीं हो सकती। बचपन में जब कोई बच्चा चलना सीखता है तो सबसे पहले अपने पिता की उंगली थामता है। नन्हा सा बच्चा पिता की उँगली थामे और उसकी बाँहों में रहकर बहुत सुकून पाता है। बोलने के साथ ही बच्चे जिद करना शुरू कर देते है और पिता उनकी सभी जिदों को पूरा करते हैं। बचपन में चॉकलेट, खिलौने दिलाने से लेकर युवावर्ग तक बाइक, कार, लैपटॉप और उच्च शिक्षा के लिए विदेश भेजने तक आपकी सभी माँगों को वो पूरा करते रहते हैं लेकिन एक समय ऐसा आता है जब भागदौड़ भरी इस ज़िंदगी में बच्चों के पास अपने पिता के लिए समय नहीं मिल पाता है। इसी को ध्यान में रखकर पितृ दिवस मनाने की परंपरा का आरम्भ हुआ।
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