आरसी प्रसाद सिंह जी की प्रेम कविता - चाँद को देखो

आरसी प्रसाद सिंह जी की प्रेम कविता – चाँद को देखो

चाँद को देखो चकोरी के नयन से
माप चाहे जो धरा की हो गगन से।

मेघ के हर ताल पर
नव नृत्य करता
राग जो मल्हार
अम्बर में उमड़ता

आ रहा इंगित मयूरी के चरण से
चाँद को देखो चकोरी के नयन से।

दाह कितनी
दीप के वरदान में है
आह कितनी
प्रेम के अभिमान में है

पूछ लो सुकुमार शलभों की जलन से
चाँद को देखो चकोरी के नयन से।

लाभ अपना
वासना पहचानती है
किन्तु मिटना
प्रीति केवल जानती है

माँग ला रे अमृत जीवन का मरण से
चाँद को देखो चकोरी के नयन से
माप चाहे जो धरा की हो गगन से।

आरसी प्रसाद सिंह

आपको आरसी प्रसाद सिंह जी की यह कविता “चाँद को देखो” कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

यदि आपके पास Hindi / English में कोई poem, article, story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें। हमारी Id है: submission@sh035.global.temp.domains. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ publish करेंगे। धन्यवाद!

Check Also

Con City: 2026 Arjun Das & Yogi Babu Tamil Mystery Comedy Family Drama Film Trailer & Review

Con City: 2026 Arjun Das & Yogi Babu Tamil Mystery Comedy Family Drama Film Trailer & Review

Movie Name: Con City Directed by: Harish Durairaj Starring: Arjun Das, Yogi Babu, Anna Ben, …