Haryanavi poem on lost Indian culture ढूंढते रह जाओगे

ढूंढते रह जाओगे Haryanavi poem on lost Indian culture

Haryanvi poem on lost Indian culture [1]

ढूंढते रह जाओगे: Harynvi poem

लुगाईयाँ का घाघरा
खिचड़ी का बाजरा
सिरसम का साग
सर पै पाग
आँगण मै ऊखल
कूण मै मूसल
ढूंढते रह जाओगे!

घरां मै लस्सी
लत्ते टाँगण की रस्सी
आग चूल्हे की
संटी दुल्हे की
कोरडा होली का
नाल मौली का
पहलवानां का लंगोट
हनुमानजी का रोट
ढूंढते रह जाओगे!

घूंघट आली लुगाई
गाँम मै दाई
लालटेण का चानणा
बनछटीयाँ का बालणा
बधाई की भेल्ली
गाम मै हेल्ली
घरां मै बुड्ढे
बैठकाँ मै मुड्ढे
ढूंढते रह जाओगे!

बास्सी रोटी अर अचार
गली मै घूमते लुहार
खांड का कसार
टींट का अचार
काँसी की थाली
डांगरां के पाली
बीजणा नौ डांडी का
दूध दही घी हांडी का
रसोई मै दरात
बालकां की दवात
ढूंढते… !

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