मंगल हमारे सौरमंडल में सूर्य से चौथा ग्रह है। यह केवल बुध से बड़ा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मंगल ग्रह पर पानी (मुख्य रूप से बर्फ के रूप में) मौजूद है।
मगल ग्रह लाल क्यों है?
यह ग्रह अपने अनोखे रंग के कारण शुरू से ही इंसानों के लिए आकर्षण का विषय रहा है। अपने जंग लगे रंग के कारण इसे ‘लाल ग्रह’ का उपनाम दिया गया है। लेकिन सवाल उठता है कि आखिर इस ग्रह को लाल रंग किस वजह से मिला है। आइए जानते हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि मंगल ग्रह का रंग उसकी सतह पर मौजूद जंग के रंग की धूल के कारण है। इसे “फेरिहाइड्राइट” कहा जाता है। यही धूल मंगल ग्रह को लाल रंग प्रदान करती है। इसका खुलासा मंगल ग्रह पर भेजे गए अंतरिक्ष यान और लैंडर से मिले डेटा के आधार पर किया गया है।
उन्होंने बताया कि पृथ्वी पर होने वाली रासायनिक प्रक्रिया की तरह, जब-जब चट्टानों में मौजूद लोहा पानी या मंगल के वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन के साथ मिला, तो इससे आयरन ऑक्साइड बना।
इसके बाद मंगल ग्रह की हवाओं ने अरबों साल में आयरन ऑक्साइड को पूरे ग्रह पर फैलाया और इसे धूल में बदल दिया। इसी कारण मंगल ग्रह को इसका खास लाल रंग मिला।
चूँकि मंगल पर अब तरल पानी नहीं है, इसलिए वैज्ञानिकों का पहले मानना था कि इसका जंग-लाल रंग धूल में मौजूद “हेमेटाइट” जैसे सूखे आयरन ऑक्साइड की वजह से है। हालांकि, सैटेलाइट डेटा और प्रयोगशाला प्रक्रियाओं के नए विश्लेषण के अनुसार, ग्रह के लाल रंग के लिए “फेरिहाइड्राइट” एक बेहतर व्याख्या हो सकती है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि मंगल ग्रह की धूल के एक प्रमुख घटक के रूप में “फेरिहाइड्राइट” की पहचान मंगल ग्रह के अतीत और अलौकिक जीवन की संभावना के बारे में हमारे ज्ञान के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ रखती है। मंगल ग्रह पर “फेरिहाइड्राइट” का अस्तित्व यह दर्शाता है कि ग्रह पर मूल रूप से एक तरल जल वातावरण था, जो जीवन के लिए आवश्यक है।
नासा का पर्सिवियरेंस रोवर मंगल ग्रह से कई तरह के नमूने एकत्रित कर रहा है और जब यह पृथ्वी पर वापस आएगा, तो वैज्ञानिक इस बात की पुष्टि कर सकेंगे कि “फेरिहाइड्राइट” का यह विचार सही है या नहीं।
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