पंचू डोला मेला: Panchu Dola Melana - Chilika Lake, Odisha Festival of Colors

पंचू डोला मेला: Panchu Dola Melana – Chilika Lake, Odisha Festival of Colors

सदियों पुरानी परंपरा जब मंदिरों से निकल गाँव में जुटते हैं ‘भगवान’, लगती है देव सभा: जानें – ओडिशा के ‘पंचू डोला मेला’ का इतिहास

पंचू डोला मेला करीब 4 शताब्दियों से मनाया जाता है। यह क्षेत्र की स्थाई सांस्कृतिक परंपराओं में से एक बन गया है। हजारों भक्तों और मेहमानों के आकर्षण का केन्द्र लोगों की गहरी आस्था का केन्द्र है।

पंचू डोला मेला: ओडिशा का इतिहास रंगों का पर्व

होली के रंगोत्सव के बाद ओडिशा में एक और रंगों का पर्व मनाया जाता है। इसे पंचू डोला मेला कहा जाता है। भुवनेश्वर से 15 किलोमीटर दूर खुर्दा जिले के हरिराजपुर गाँव में इसकी शुरुआत डोला पूर्णिमा के कुछ दिनों बाद होती है। राधा- कृष्ण की भक्ति से जुड़े इस त्योहार की धूम से पूरा ओडिशा रंगमय हो जाता है। इसलिए इसे होली-2 भी कहा जाता है। इसमें गुलाल की बौछार, पारंपरिक मिठाईयाँ और ईश्वर के प्रति आस्था का गजब का मेलजोल है।

Devotees carrying idols wade through waters of Chilika Lake during Panchu Dola Melana festival
Devotees carrying idols wade through waters of Chilika Lake during Panchu Dola Melana festival

इस दौरान फूलों से सजाए गए राधा-कृष्ण की मूर्तियों को झूलों पर रख कर गाँवों में घुमाया गया। फाल्गुन महीने की पूर्णिमा के पाँच दिन बाद शुरू होता है। 2026 में मार्च के दूसरे सप्ताह में ये महोत्सव शुरू हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त एकत्रित हुए। नृत्य संगीत से साथ उत्साहपूर्वक लोगों ने भव्य यात्रा निकाली।

देवता जुटते हैं एक जगह

इस उत्सव की खासियत यह है कि भुवनेश्वर के आसपास के कई गाँवों से देवी-देवता भव्य जुलूसों के साथ एकत्र होते हैं। गाँव-गाँव के लोग और इस रंगारंग कार्यक्रम को देखने आये आगंतुक एक साथ जुटते हैं हरिराजपुर में।

यहाँ अधिष्ठाता देवता पश्चिमासंभू सोमनाथ देव का वास है। वे प्रतिकात्मक तौर पर सभी मंदिर के देवताओं को उत्सव में शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हैं। राधा-कृष्ण और भगवान शिव की मूर्तियाँ खास तरह से सजाए गए डोला बिमान नाम की खूबसूरत लकड़ी की पालकियों में आती हैं। इन पालकियों की बनावट भी मंदिर की तरह होती है। पालकियों को भक्त प्रणाम कर अपनी श्रद्धा दिखाते हैं।

जैसे ही हर देवता उत्सव स्थल पर पहुँच जाते हैं। पूरा वातावरण उत्साह से भर उठता है। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शंख की आवाज और ढोल की थाप पर लोग नाचते गाते रंग बिरंगे गुलाल से उनका स्वागत करते हैं। एक- एक कर पालकी कतार में लगाई जाती है। इसके बाद भव्य आध्यात्मिक सभा का आयोजन होता है। इसमें अनेक गाँवों के लोग और उनके देवता मौजूद रहते हैं।

Panchu Dola Melana festival celebrated primarily in parts of Odisha such as Khurda Balasore and the coastal areas surrounding Chilika
Panchu Dola Melana festival celebrated primarily in parts of Odisha such as Khurda Balasore and the coastal areas surrounding Chilika

4 शताब्दी पुरानी परंपरा

छोटे से गाँव में आसपास के दर्जनों देवी-देवता इस खास कार्यक्रम में आते हैं, जिससे छोटा सा गाँव भक्तिमय हो जाता है। भक्तों के लिए इन देवताओं का एक साथ मिलन काफी मायने रखता है। इस दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा होते हैं। इसे अत्यंत शुभ और विकास का प्रतीक माना जाता है।

शाम होते ही पंचू डोला मेला की दिव्य सभा के पास सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होता है। कीर्तन और भक्तिगीतों से इलाका गूँज उठता है। गाँव की गलियाँ रोशनी से जगमगा उठती हैं । खाने-पीने के स्टॉल लगते हैं और लोग इसका आनंद उठाते हैं। ढोल और झांझरियाँ की गूँज रातभर सुनाई देती है। स्टॉलों में स्थानीय हस्तशिल्प की वस्तुएँ भी मिलती हैं।

The ritual symbolises the ceremonial meeting of deities from different villages — a spiritual gathering known as Melana
The ritual symbolises the ceremonial meeting of deities from different villages — a spiritual gathering known as Melana

भक्तों और वहाँ पहुँचे मेहमानों के लिए सबसे खास होता है देर रात देवताओं की पालकियों में निकलने वाला जुलूस। ये जुलूस सुबह तक निकलते हैं, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पालकी के साथ चलते हैं, गीत गाते हैं और मिल कर उत्सव मनाते हैं। खूबसूरत आतिशबाजी से आसमान जगमगा उठता है। गीतों, जयकारों और आतिशबाजी से पूरे वातावरण में जादुई दृश्य छा जाता है।

ओडिशा का यह उत्सव चार शताब्दियों से मनाया जाता है। शुरुआत में यह एक गाँव में होने वाला उत्सव था, जिसमें धीरे धीरे कई गाँव शामिल हुए और यह ओडिशा का बड़ा महोत्सव बन गया। अनुष्ठानों और उत्सवों के अलग यह एक गहरी भावना को दर्शाता है।

While Parikuda’s celebration is particularly striking because of its water procession across the lagoon, other major observances of Panchu Dola Melana take place in heritage villages like Harirajpur and Maluda in the Puri region.
While Parikuda’s celebration is particularly striking because of its water procession across the lagoon, other major observances of Panchu Dola Melana take place in heritage villages like Harirajpur and Maluda in the Puri region.

उत्सव के दौरान भक्तिमय वातावरण में लोग प्रार्थना करते हैं, पारंपरिक मिठाइयाँ बाँटते हैं और घर पर मेहमानों को आमंत्रित करते हैं। एक तरह से यह उत्सव पारिवारिक मिलन का भी जरिया बन जाता है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि महोत्सव आस्था, संस्कृति और आनंद का संगम बन जाता है, जो लोगों को उनकी साझा विरासत की याद दिलाता है।

पंचू डोला मेला में जुटने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह एक महज त्योहार नहीं है। यह ओडिशा की परंपराओं का जीवंत उत्सव है, जहाँ भक्ति रंगों से सराबोर हो जाते हैं, संगीत हवा में गूँजता है और पूरा समुदाय उत्सव की खुशी में रंग जाता है।

Check Also

Top 20 Telugu Songs

Top 10 Telugu Songs March 2026: Ranking, Title, Best Album

Top 10 Telugu Songs March 2026: Telugu cinema, also known by its nickname Tollywood, is …

Leave a Reply