अहंकार का त्याग: अमरीश नामक एक राजा था। जिसने परमात्मा को खोजना चाहा। वह किसी आश्रम में गया। उस आश्रम के प्रधान साधु महाराज ने कहा कि जो कुछ तुम्हारे पास है, उसे छोड दो। परमात्मा को पाना तो बहुत सरल है। अमरीश राजा ने यही किया। उस राजा ने राज्य छोड़ दिया और अपनी सारी संपत्ति गरीबों में बाँट …
Read More »परशुराम की रोचक कहानियाँ: Amazing Story of Parshuram
परशुराम का जन्म त्रेता युग में रामायण काल में हुआ था। वह एक ब्राह्मण थे। उनको विष्णु का छठा अवतार भी कहा जाता है। भृगुश्रेष्ठ महर्षि जमदग्नि द्वारा पुत्र पुत्रेष्टि यज्ञ करने पर देवराज इंद्र ने पुत्र होने का वरदान दिया था। उसी के फलस्वरूप परशुराम ने अपनी माता रेणुका के गर्भ से वैशाख की शुक्ल तृतीया को जन्म लिया था। परशुराम अपने क्रोध के …
Read More »शिलाद पत्नी दुर्गावती: वीर राजपूत नारी की लोक कथा
शिलाद पत्नी दुर्गावती: ‘हम लोगों ने खुन की नदी बहा दी थी, महाराज!’ खिन्न सैनिक ने कहा। ‘पर महाराज को बहादुरशाह के क्रूर सैनिकों ने बंदी बना लिया।’ सैनिक ने सिर निचा कर लिया। शिलाद पत्नी दुर्गावती: वीर राजपूत नारी की लोक कथा ‘बहादुरशाह तो हुमायूँ का एक छोटा सरदार है’ राय ने दुर्ग की अधिपति शिलाद के छोटे भाई …
Read More »महाराणा प्रताप की रानी: वीर राजपूत नारी की लोक कथा
महाराणा प्रताप की रानी: वीर राजपूत नारी की लोक कथा – वर्ष 1576 ई० में हल्दी घाटी का विकट युद्ध हुआ। यदि राणा चाहते तो अपने भाले की नोक से बाबर के घर का चिराग गुल कर देते, शहजादा सलीम के हाथी पर चेतक अपने अगले चरण रख चुका था। राजपूतों ने बड़ी वीरता दिखायी, मान का अभिमान विजयी हुआ। …
Read More »बीकानेर की वीरांगना: वीर राजपूत नारी की लोक कथा
बीकानेर की वीरांगना: अपने सतीत्व और पतिव्रता – धर्म की रक्षा करना ही भारतीय स्त्रियों के जीवन का एक अनुपम और पवित्र आदर्श रहा है। उनके सतीत्व के वज्राघात से बड़े-बड़े साम्राज्यों की नींव हिल उठी, राजमुकुट धूलि में लोटने लगे, मानव – वेषधारी दानवों की दानवता और व्यभिचारमूल्क अत्याचार का अन्त हो गया। किरण देवी या राजरानी किरण देवी …
Read More »रूपनगढ़ की राजकुमारी: वीर राजपूत नारी की लोक कथा
रूपनगढ़ की राजकुमारी: वीर राजपूत नारी की लोक कथा – ‘अपनी कन्या को शाही बेगम बनने के लिये तुरंत दिल्ली भेज दो!’ औरंगजेब के इस संदेश के साथ दिल्ली से एक सेना भी रूपनगढ़ के राजा विक्रम सोलंकी के पास पहुँची। अनेक राजपूत नरेशों ने अपनी कन्याएँ दिल्ली को भेज दी थीं। विरोध करने में केवल सर्वनाश ही था। कोई …
Read More »मातृशक्ति – देशभक्ति को प्रेरित करता लेख
मातृशक्ति: प्रात: काल के समय सुंदर-सुंदर चिड़ियाँ चहचहाती हैं। नन्हीं-नन्हीं कलियाँ अपना हास्य मुख खोले हुए अठखेलियाँ करती हैं और छोटे-छोटे बच्चे हँसते-खेलते दिखाई देते हैं। आम की सुपुष्पित डाल में से कोयल के संगीत की मधुर ध्वनी कानों में सुन पड़ती है। विशाल वृक्ष झूम-झूमकर जगदीश को प्रणाम करते जान पड़ते हैं। सम्पूर्ण सृष्टि में नवीन जीवन दिखायी पड़ता …
Read More »मूर्ख से न रखो मित्रता: पंचतंत्र की कहानी हिंदी में
एक गधे से दिन भर धोबी खूब मेहनत का काम लेता और रात को चरने के लिए खुला छोड़ देता था। घूमते-घूमते उसे एक सियार मिला और दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई। सियार ने कहा, तुम चिता न करो, हम मिलकर रहेंगे तो खूब मौज करेंगे। तुम्हारे सारे दुख दूर हो जाएंगे। सचमुच सियार की दोस्ती में गधा अपने …
Read More »पिज्जा: घर में काम करने वाली बाई की कहानी
पत्नी ने कहा: “आज धोने के लिए ज्यादा कपड़े मत निकालना…” पति: “क्यों”? उसने कहा: “अपनी काम वाली बाई दो दिन नहीं आएगी…” पति: “क्यों”? पत्नी: “गणपति के लिए अपने नाती से मिलने बेटी के यहाँ जा रही है, बोली थी…” पति: “ठीक है, अधिक कपड़े नहीं निकालता…” पत्नी: “और हाँ! गणपति के लिए पाँच सौ रूपए दे दूँ उसे? …
Read More »जैसे को तैसा: पंचतंत्र की कहानी – बच्चों के लिए लघु नैतिक बाल-कहानी
जैसे को तैसा: एक स्थान पर जीर्णधन नामक लड़का रहता था। धन की खोज में उसने परदेस जाने का विचार किया। उसके घर में विशेष सम्पत्ति तो थी नहीं, केवल एक मन भर भारी लोहे की तराजू थी। उसे एक महाजन के पास धरोहर रखकर वह विदेश चला गया। विदेश से वापस आने के बाद उसने महाजन से अपनी धरोहर …
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