माँ मैं एक पार्टी में गया था. तूने मुझे शराब नहीं पीने को कहा था, इसीलिए बाकी लोग शराब पीकर मस्ती कर रहे थे और मैं सोडा पीता रहा. लेकिन मुझे सचमुच अपने पर गर्व हो रहा था माँ, जैसा तूने कहा था कि ‘शराब पीकर गाड़ी नहीं चलाना’. मैंने वैसा ही किया. घर लौटते वक्त मैंने शराब को छुआ तक नहीं, भले ही बाकी दोस्तों ने मौजमस्ती के नाम पर जमकर …
Read More »जीवन का लक्ष्य
एक किसान के घर एक दिन उसका कोई परिचित मिलने आया। उस समय वह घर पर नहीं था। उसकी पत्नी ने कहा-‘वह खेत पर गए हैं। मैं बच्चे को बुलाने के लिए भेजती हूं। तब तक आप इंतजार करें।’ कुछ ही देर में किसान खेत से अपने घर आ पहुंचा। उसके साथ-साथ उसका पालतू कुत्ता भी आया। कुत्ता जोरों से हांफ रहा था। उसकी यह हालत …
Read More »संत की मज़ार
किसी मज़ार पर एक फकीर रहते थे। सैकड़ों भक्त उस मज़ार पर आकर दान-दक्षिणा चढ़ाते थे। उन भक्तों में एक बंजारा भी था। वह बहुत गरीब था, फिर भी, नियमानुसार आकर माथा टेकता, फकीर की सेवा करता, और फिर अपने काम पर जाता, उसका कपड़े का व्यवसाय था, कपड़ों की भारी पोटली कंधों पर लिए सुबह से लेकर शाम तक …
Read More »दोस्ती
“देख दोस्त तुझे ये करना तो पड़ेगा ही।” सिगरेट को आगे करते हुए मीनेश ने दर्पण से कहा। कबीर इंडस्ट्रीज के मालिक करण मल्होत्रा का एकलोता पुत्र दर्पण जो बचपन से पढ़ाई में होशियार था। आज अपने एक टपोरी दोस्त मीनेश के साथ बगीचे में बैठा था। मीनेश ने सिगरेट का कश लेकर हवा में धुवा उड़ाते हुए दर्पण से …
Read More »किसका भगवान श्रेष्ठ?
किसी जंगल मे दो कबिले “इनसा” ओर “परिकान” थे। दोनो कबिलो मे संप्रदायीक लड़ाईया होती रहेती थी। इन लड़ाइयों में कई लोगो की जाने गई, कई परिवार ख़त्म हुए, पर इनकी दुश्मनी ख़त्म ना हुई! उस गॉव मे एक समझदार बूढ़ा रहता था। उसने इस लडाई को ख़त्म करने की ठानी, उसने दोनो गावो के मुखिया किंबो ओर ओलान्गो को …
Read More »परोपकारी राजा
एक राजा बहुत बड़ा प्रजापालक था, हमेशा प्रजा के हित में प्रयत्नशील रहता था। वह इतना कर्मठ था कि अपना सुख, ऐशो-आराम सब छोड़कर सारा समय जन-कल्याण में ही लगा देता था। यहां तक कि जो मोक्ष का साधन है अर्थात भगवत-भजन, उसके लिए भी वह समय नहीं निकाल पाता था। एक सुबह राजा वन की तरफ भ्रमण करने के …
Read More »अंदर बाहर – भाग 2
अब तक आपने पढ़ा की एक गाँव मे हुई तेज बारिश से बचने के लिए लोगो ने एक मंदिर का सहारा लिया। एक एक करके लोग बढ़ने लगे। तब सब ने निर्णय लिया की जो बहार है उसे बहार ही रहने दो, सभी के मना करने के बावजूद मुखिया ने एक बूढ़े को मंदिर के अंदर लिया, जब एक दूसरी …
Read More »अंदर बाहर
एक बार एक गाँव में जबरदस्त बारिश हुई, आसपास के सारे झोपडे ओर कई लोग बारिश में बह गये। जो बचे थे उन्होने अपनी जान बचाने के लिए गाँव के एक उंचे टिल्लेपे आए मंदिर में सहारा लीया। मंदिर उचाई पर था सो उसे बारिश के बहते पानी से कम नुकसान हो रहा था, गाँव वाले वहा सही सलामत थे, …
Read More »बच गया रे… बच गया…
गाँव में झलूस था! सीमा पार के उस कुए पर हर साल की तरह इस साल भी मुर्गो कि बली दि जा रही थी। पंडित जी जोरो शोरो से मंत्र तंत्र पढ रहे थे, गाँव का उस्तव संपन्न हुआ ओर सभी अपने अपने घर लोटने लगे। रास्ते में छोटे सागर ने अपने पिताजी मनोहर का हाथ थाम और पुछा “पिताजी …
Read More »कभी गाड़ी नाव पर, कभी नाव गाड़ी पर – कहानियां कहावतो की
कभी गाड़ी नाव पर, कभी नाव गाड़ी पर – कहानियां कहावतो की एक दिन एक आदमी अपने लड़के के साथ बाज़ार जा रहा था। बाज़ार पहुंचकर उसने कुछ सामान खरीदा। सामान लेकर बाप-बेटे, दोनों बातें करते चले आ रहे थे। सामने से एक बैलगाड़ी आ रही थी। जब पास आ गयी, तो बाप-बेटे से बोला, “देखो बेटे, गाड़ी नाव पर जा …
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