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ध्यान रखेंगे – दिविक रमेश

मेरी बिल्ली आंछी-आंछी, अरे हो गया उसे जुकाम। जा चूहे ललचा मत जी को, करने दो उसको आराम। दूध नहीं अब चाय चलेगी, थोड़ा हलुवा और दवाई। लग ना जाए आंछी हमको, ध्यान रखेंगे अपना भाई। ∼ डॉ. दिविक रमेश

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हाथी बोला – दिविक रमेश

सूँड उठा कर हाथी बोला बोला क्या तन उसका डोला बोला तो मन मेरा बोला देखो देखो अरे हिंडोला “आओ बच्चो मिलजुल आओ आओ बैठो तुम्हें डुलाऊँ मस्त मस्त चल, मस्त मस्त चल झूम झूम कर तुम्हें घुमाऊँ घूम घूम कर, झूम झूम कर ले जाऊँगा नदी किनारे सूँड भरूँगा पानी से मैं छोडूँगा तुम पर फव्वारे।” ∼ डॉ. दिविक रमेश

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हाथी राजा बहुत भले

हाथी राजा बहुत भले। सूंड हिलाते कहाँ चले ? कान हिलाते कहाँ चले ? मेरे घर भी आओ ना, हलवा पूरी खाओ ना। आओ बैठो कुर्सी पर, कुर्सी बोले चटर मटर।

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हम भी वापस जायेंगे – अभिनव शुक्ला

आबादी से दूर, घने सन्नाटे में, निर्जन वन के पीछे वाली, ऊँची एक पहाड़ी पर, एक सुनहरी सी गौरैया, अपने पंखों को फैलाकर, गुमसुम बैठी सोंच रही थी, कल फिर मैं उड़ जाऊँगी, पार करुँगी इस जंगल को, वहां दूर जो महके जल की, शीतल एक तलैया है, उसका थोड़ा पानी पीकर, पश्चिम को मुड़ जाऊँगी, फिर वापस ना आऊँगी, …

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संत की मज़ार

संत की मज़ार

किसी मज़ार पर एक फकीर रहते थे। सैकड़ों भक्त उस मज़ार पर आकर दान-दक्षिणा चढ़ाते थे। उन भक्तों में एक बंजारा भी था। वह बहुत गरीब था, फिर भी, नियमानुसार आकर माथा टेकता, फकीर की सेवा करता, और फिर अपने काम पर जाता, उसका कपड़े का व्यवसाय था, कपड़ों की भारी पोटली कंधों पर लिए सुबह से लेकर शाम तक …

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बच्चों की रेल

बच्चों की यह रेल है, बड़ा अनोखा खेल है। यह कोयला नहीं खाती है , इसे मिठाई भाती है। यह नहीं छोड़ती धुआं, मुड़ जाती देख कर कुआँ। चलते-चलते जाती रुक, छुक-छुक, छुक-छुक, छुक-छुक, छुक-छुक।

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जन्म दिन मुबारक हो – मूलचंद गुप्ता

जन्म दिन मुबारक हो, मुबारक हो जन्मदिन। आपके जीवन में, बार – बार आये यह दिन॥ दुनिया का मालिक, आपको बख्शे अच्छी सेहत। खुशियाँ ही खुशियाँ, बरसाती रहे उसकी नेमत॥ माना आइना नहीं जाता मेघ मल्हार, बुजुर्गों के किये। फिर भी बहुत कुछ हो सकता है बुजुर्गों के लिए॥ शारीरिक शक्ति, अगर कुछ कम हो भी गयी तो क्या है? …

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जीवन दीप – विनोद तिवारी

मेरा एक दीप जलता है। अंधियारों में प्रखर प्रज्ज्वलित, तूफानों में अचल, अविचलित, यह दीपक अविजित, अपराजित। मेरे मन का ज्योतिपुंज जो जग को ज्योतिर्मय करता है। मेरा एक दीप जलता है। सूर्य किरण जल की बून्दों से छन कर इन्द्रधनुष बन जाती, वही किरण धरती पर कितने रंग बिरंगे फूल खिलाती। ये कितनी विभिन्न घटनायें, पर दोनों में निहित …

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जय हिन्द – महजबीं

देखो बच्चों यह झंडा प्यारा, तीन रंगों का मेल सारा। रहे सदा ये झंडा ऊँचा आकाश को रहे यह छूता। सदा करो तुम इसका मान, कभी न करना इसका अपमान। झंडा है यह देश की शान, बना रहे यह सदा महान। जय हिन्द ! ∼ महजबीं

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