जन्मकुंडली में शनि ग्रह और उसका अशुभ प्रभाव

जन्मकुंडली में शनि ग्रह और उसका अशुभ प्रभाव

जन्मकुंडली में शनि ग्रह और उसका अशुभ प्रभाव – शनिदेव की कृपा पाने के लिए शास्त्रों में बहुत से उपाय बताए गए हैं। जिन्हें अपनाकर शनि को प्रसन्न करने का प्रयास किया जाता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार शनिवार को शनिदेव की आराधना करने से विशेष लाभ मिलता है। ग्रहों में न्यायाधीश का पद शनिदेव को प्राप्त है। वह ताकत एवं ऊंचे पद का दुरुपयोग व बुरे कर्म करने वालों को उनके कर्मों के अनुसार सजा देते हैं तथा मेहनती एवं सद्कर्म करने वालों की उन्नति के रास्ते खोल देते हैं।

जन्मकुंडली में शनि ग्रह और उसका अशुभ प्रभाव

जन्मकुंडली में शनि ग्रह अशुभ प्रभाव में होने पर व्यक्ति को निर्धन, आलसी, दुःखी, कम शक्तिवान, व्यापार में हानि उठाने वाला, नशीले पदार्थों का सेवन करने वाला, अल्पायु निराशावादी, जुआरी, कान का रोगी, कब्ज का रोगी, जोड़ों के दर्द से पीड़ित, वहमी, उदासीन, नास्तिक, बेईमान, तिरस्कृत, कपटी, अधार्मिक तथा मुकदमें व चुनावों में पराजित होने वाला बनाता है। शनि की अनुकूलता हेतु शास्त्रों मे कई उपाय निर्देषित किए गए हैं। शनिवार के दिन इनकी विशेष कृपा भक्तों पर होती है।

शुक्रवार की रात काले तिल, शतपुष्पी, काले उड़द, लौंग, लोधरे के फूल तथा सुगन्धित फूलों को शुद्ध जल में भिगो कर रख दें। शनिवार को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्य क्रियाओं से निवृत्त होने के बाद पूरे शरीर पर तेल लगाएं। रात को भिगोई हुई सामग्री को छान लें उसमें काला नमक मिला कर इस मंत्र से अभिमंत्रित करें:

मंत्र: क्कं द्द्वीं शं शनैश्चराय नमः

अब इस जल से स्नान करें। ऐसा करने से आपको आरोग्य और यश की प्राप्ती होगी।

~ आचार्य कमल नंदलाल

Check Also

Environment Quotes in Hindi पर्यावरण पर अनमोल विचार

पर्यावरण पर अनमोल विचार विद्यार्थियों के लिए

पर्यावरण पर अनमोल विचार विद्यार्थियों और बच्चों के लिए: एक स्वच्छ वातावरण एक शांतिपूर्ण और …