जेब में कुछ नहीं है – अभिनव शुक्ला

एक बार एक प्रेमी
अपनी रूप से लथपथ
मेकअप से सनी हुयी
और नाजुक फूलों के
डंठलों से बानी हुई
प्रेमिका से बोला

पुराने शहर की
पुरानी गली में
पुराना सा एक
दरवाजा लगा है
जहाँ छत टपकती है
बरसात भर
मेरा घर वहीँ है।

प्रेमिका दूर हटते हुए बोली
पहले क्यों नहीं बताया कि
रेशम की कमीज
जेब में कुछ नहीं है।

∼ अभिनव शुक्ला

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