नया साल मुबारक: घनश्याम दास आहूजा की नव वर्ष पर हिंदी कविता

नया साल मुबारक: घनश्याम दास आहूजा की नव वर्ष पर हिंदी कविता

नया साल मुबारक: नया साल हमें नई परियोजनाएं शुरू करने के लिए प्रेरित करता है और हमें अपना जीवन नए उत्साह और आनंद के साथ जीने की ऊर्जा देता है। नए साल में हम पिछले साल की अपनी गलतियों से सीखते हैं, नया संकल्प या शपथ लेते हैं और पूरी ऊर्जा के साथ अपने काम को पूरा करने में लग जाते हैं, जिससे हमें सफलता मिलती है।

नया साल मुबारक: घनश्याम दास आहूजा

मेरे दोस्तों मेरे अज़ीज़ों तुमको,
ये नया साल मुबारक।

बीते वर्ष को छोड़ो यारों,
आया है नया काल मुबारक।

खुशी के इस अवसर पर वाद्ययंत्रों की,
मधुर ताल मुबारक।

खिंच कर चले आए परिवार छोड़,
परदेस ने बुना वो जाल मुबारक।

उठो भई रिंग करो घर पे लेन-देन हो,
खुशियों का अहवाल मुबारक।

रानी बिटिया राजा बेटे के थपथपाओ,
प्यार से फ़ोन पर तुम गाल मुबारक।

वीडियों फैशन और हालीवुड चेनल पर,
सुंदर बालाओं की चाल मुबारक।

बाइस वर्षों के बाद आस्ट्रेलिया पर विजय,
खुशी का थाल मुबारक।

बनती है जो प्रतिदिन बिना नागा,
कैंटीन की दाल मुबारक।

दिल है छोटा-सा छोटी-सी आशा,
पहनी है शेरों जैसी खाल मुबारक।

ग़म की परछाइयाँ भी छूने न पाएँ,
रहे सबका ही चंगा हाल मुबारक।

आओ हम सब मिल कर नाचें,
नहीं चलेगी बहाने की ढाल मुबारक।

इतराते रहो अपने कालों पर,
हमको तो ये सफ़ेद बाल मुबारक।

थोड़ा भी आनंदित किया हो तो,
आप सबको राजस्थान का यह लाल मुबारक।

∼ ‘नया साल मुबारक‘ poem by ‘घनश्याम दास आहूजा

  • नाम: घनश्याम दास आहूजा
  • जन्मतिथि: 12 जून 1953 कोटा राजस्थान भारत में।
  • कार्यक्षेत्र: लिखने का शौक हाई स्कूल के समय से है। मनोभावों का काग़ज़ पर हूबहू चित्रण करना तो असंभव-सा है लेकिन जब मन में कोई लहर-सी उठती है तो लेखनी स्वयं चल पड़ती है। अब तक केवल शौकिया तौर पर दिल की बातों का संकलन किया है। कोशिश रहती है सभी विषयों का समावेश करने की ।पहली बार अंतर्राष्ट्रीय मंच पर आपके समक्ष प्रस्तुत।
  • संप्रति: कोटा और मुंबई में फर्टीलाईज़र कंपनी में कार्य करने के पश्चात अब संयुक्त अरब इमारात में ऑयल कंपनी में कार्यरत।

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