New Year Eve Party: Celebrating New Year

नव वर्ष मुबारक: शबनम शर्मा

नव वर्ष मुबारक: शबनम शर्मा – यूं तो पूरे विश्व में नया साल अलग-अलग दिन मनाया जाता है, और भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में भी नए साल की शुरूआत अलग-अलग समय होती है। लेकिन अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 1 जनवरी से नए साल की शुरूआत मानी जाती है। चूंकि 31 दिसंबर को एक वर्ष का अंत होने के बाद 1 जनवरी से नए अंग्रेजी कैलेंडर वर्ष की शुरूआत होती है। इसलिए इस दिन को पूरी दुनिया में नया साल शुरू होने के उपलक्ष्य में पर्व की तरह मनाया जाता है।

चूंकि साल नया है, इसलिए नई उम्मीदें, नए सपने, नए लक्ष्य, नए आईडियाज के साथ इसका स्वागत किया जाता है। नया साल मनाने के पीछे मान्यता है कि साल का पहला दिन अगर उत्साह और खुशी के साथ मनाया जाए, तो साल भर इसी उत्साह और खुशियों के साथ ही बीतेगा।

हालांकि हिन्दू पंचांग के अनुसार के मुताबिक नया साल 1 जनवरी से शुरू नहीं होता। हिन्दू नववर्ष का आगाज गुड़ी पड़वा से होता है। लेकिन 1 जनवरी को नया साल मनाना सभी धर्मों में एकता कायम करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है, क्यों इसे सभी मिलकर मनाते हैं। 31 दिसंबर की रात से ही कई स्थानों पर अलग-अलग समूहों में इकट्ठा होकर लोग नए साल का जश्न मनाना शुरू कर देते हैं और रात 12 बजते ही सभी एक दूसरे को नए साल की शुभकामनाएं देते हैं।

नव वर्ष मुबारक: शबनम शर्मा

नव वर्ष, हथेलियाँ
ज़मीन पर टिकाए
सिर्फ़ सीटी बजने
की इंतज़ार में
पलों, दिनों, सप्ताहों,
महीनों के साथ
बाधा दौड़ में
कुलांचे भरने को
तैयार,
भूल गए, धूमिल
हो गए वो पल,
रेल हादसे, तूफ़ान
भूकंप के झटके
व अनेकों विपदाएँ
इक सैलाब भींचे
मुट्ठियाँ, आँखें मूँद कर
इसमें डूबने को आतुर
कहते हुए ‘नव वर्ष
मुबारक हो।’
काश कि सबकी दुआ
कबूल हो, जी भर के
खुशियाँ आएँ, तरक्की हो,
मानवता की हर राह पर,
खुशहाल हो संपूर्ण विश्व
व इक पक्की-सी सरहद की
दीवार बन जाए विश्व व
विपदाओं के बीच, कि इक दूसरे
को ये कभी छू न सकें।

∼ “नव वर्ष मुबारक” Hindi poem by ‘शबनम शर्मा’

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