क्या आपने कभी सोचा है कि जमीन के नीचे पानी दिखाई नहीं देता, फिर भी बोरिंग करने वाली मशीनें अक्सर ठीक उसी जगह खुदाई शुरू करती हैं, जहां कुछ समय बाद पानी निकल आता है? आखिर उन्हें कैसे पता चलता है कि नीचे पानी है? क्या उनके पास कोई ऐसी खास मशीन होती है जो जमीन के अंदर झांक सकती है, या फिर यह सिर्फ किस्मत का खेल है? आइए, इस रोचक विज्ञान को आसान भाषा में समझते हैं।
जमीन के नीचे पानी कैसे ढूंढ़ते हैं वैज्ञानिक
क्या होती है बोरिंग या बोरवैल?
हर घर तक पानी की पाइपलाइन या खेत तक सिंचाई के लिए नहर नहीं पहुंचती। कई जगह पाइपलाइन का पानी पर्याप्त नहीं होता। ऐसे में लोग भूजल का सहारा लेते हैं। भूजल तक पहुंचने के लिए मशीन की मदद से जमीन में गहरा छेद किया जाता है। इसे बोरिंग या बोरवैल कहते हैं।
जब छेद तैयार हो जाता है, तो उसमें मजबूत पाइप डाले जाते हैं। फिर सबमर्सिबल पम्प लगाया जाता है, जो जमीन के नीचे से पानी खींचकर ऊपर लाता है।
आज गांवों से लेकर शहरों तक करोड़ों लोग बोरवैल के पानी का उपयोग करते हैं।

क्या हर जगह एक ही गहराई पर पानी मिलता है?
बिल्कुल नहीं। हर इलाके की जमीन अलग होती है। कहीं 100 फुट की गहराई पर पानी मिल जाता है, तो कहीं 500 या 700 फुट तक खुदाई करनी पड़ती है इसलिए बोरिंग शुरू करने से पहले यह जानना जरूरी होता है कि पानी मिलने की संभावना सबसे अधिक कहां है।
जमीन के नीचे पानी का पता कैसे चलता है?
आज इसके लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाते हैं। विशेषज्ञ केवल जमीन को देखकर फैसला नहीं करते। वे ऐसी मशीनों का उपयोग करते हैं, जो जमीन के भीतर की परतों का अध्ययन करती हैं।
सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली तकनीकों में से एक है ‘इलैक्ट्रिकल रैजिस्टिविटी सर्वे‘। इसमें जमीन के भीतर बहुत हल्का विद्युत प्रवाह (इलैक्ट्रिक करंट) भेजा जाता है। मिट्टी, रेत, चट्टान और पानी बिजली को
अलग-अलग तरीके से गुजरने देते हैं। मशीन इन संकेतों का विश्लेषण करके बताती है कि किस गहराई पर पानी मिलने की संभावना सबसे अधिक है।
हालांकि यह तरीका बहुत उपयोगी है, फिर भी यह 100 प्रतिशत गारंटी नहीं देता, क्योंकि भूजल पूरी तरह प्राकृतिक स्रोत है।
पड़ोस की जानकारी भी होती है काम की अगर आपके आसपास पहले से बोरवैल बने हुए हैं, तो उनकी जानकारी बहुत उपयोगी साबित होती है। विशेषज्ञ यह पता करते हैं कि पड़ोस में कितनी गहराई पर पानी मिला था, पूरे साल पानी आता है या नहीं और मोटर कितनी गहराई पर लगाई गई है। यदि आसपास के कई घरों में लगभग एक जैसी गहराई पर पानी मिला है, तो नई बोरिंग की योजना भी उसी आधार पर बनाई जाती है। इससे समय, मेहनत और काफी पैसा बच सकता है।
क्या नारियल या लकड़ी से पानी खोजा जा सकता है?
कभी-कभी आपने लोगों को नारियल, Y आकार की लकड़ी या लोहे की छड़ों के साथ जमीन पर चलते हुए देखा होगा। वे दावा करते हैं कि इस तरीके से पानी का पता लगाया जा सकता है। इस विधि को डाऊजिंग कहा जाता है लेकिन अब तक कोई वैज्ञानिक शोध यह साबित नहीं कर पाया है कि यह तरीका भरोसेमंद है। इसलिए वैज्ञानिक और भूवैज्ञानिक हमेशा आधुनिक मशीनों और वैज्ञानिक सर्वेक्षण पर ही भरोसा करने की सलाह देते हैं।
क्या ज्यादा गहरी बोरिंग में ज्यादा पानी मिलता है?
बहुत से लोग सोचते हैं कि जितनी गहरी बोरिंग होगी, उतना अधिक पानी मिलेगा लेकिन यह हमेशा सही नहीं होता। कई बार 120 फुट पर ही भरपूर पानी मिल जाता है, जबकि कहीं 500 फुट तक खुदाई करने के बाद भी बहुत कम पानी निकलता है। असल में सबसे महत्वपूर्ण बात है उस क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना यानी जमीन के नीचे मिट्टी, चट्टानों और जलभंडार की स्थिति कैसी है।
क्या आप जानते हैं?
पृथ्वी पर मौजूद मीठे पानी का एक बड़ा हिस्सा भूजल के रूप में जमीन के नीचे जमा रहता है। यही कारण है कि दुनिया के करोड़ों लोग पीने और खेती के लिए भूजल पर निर्भर हैं इसलिए इसका सोच-समझकर उपयोग करना और वर्षा जल को जमीन में पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
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