षट्कर्मणा शोधनं च आसनेन भवेद्दृढ़म्।
मुद्रया स्थिरता चैव प्रत्याहारेण धीरता॥
प्राणायामाल्लाघवं च ध्यानत्प्रत्यक्षमात्मनः।
समाधिना च निर्लिप्तं मुक्तिरेवं न संशयः॥
अर्थात् षटकर्मों से शरीर का शोधन, आसनों से दृढ़ता, मुद्राओं से स्थिरता, प्रत्याहार से धैर्य, प्राणायाम से हल्कापन, ध्यान से आत्म-साक्षात्कार एवं समाधि से निर्लिप्तता का भाव उत्पन्न होता है, जिससे मुक्ति में कोई संशय नहीं रहता।
योग संन्यासियों या मोक्ष चाहने वालों के लिए जितना उपयोगी है, उतना ही साधारण व्यक्ति के लिए भी महत्वपूर्ण है। योग अपने में पूर्ण विज्ञान है। योग से व्यक्ति पूर्ण स्वास्थ्य को प्राप्त कर सकता है। वह शारीरिक, मानसिक, सामाजिक व आध्यात्मिक स्वास्थ्य को प्राप्त करते हुए अपने जीवन को सार्थक कर सकता है। आज योग जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपना विशेष महत्व रखता है।
योग का अनेक क्षेत्रों में महत्व
(1) स्वास्थ्य के क्षेत्र में:
विश्व स्तर पर योग में हुए शोधों के परिणामों के आधार पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का यह मानना है कि योग मानसिक व शारीरिक रोगों को ठीक करने में कारगर है। यह एक सुव्यवस्थित व वैज्ञानिक जीवन-शैली है।
योगाभ्यास में, षटकर्मों से व्यक्ति के शरीर से विषैले पदार्थ बाहर जाते हैं। आसनों के अभ्यास से शरीर का पाचन सुदृढ़, मल निष्कासन सहज व हड्डियाँ लचकदार होने से हम शारीरिक स्तर पर स्वस्थ बनते हैं। प्राणायाम से शरीर में ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है। कार्बन डाइऑक्साइड का निष्कासन होता है व मन स्थिर बनता है। इससे ध्यान भी सहज रूप से लगने लगता है। ध्यान से हमारा अन्तःकरण शुद्ध होता है तथा चित्त की वृत्तियों का शोधन होता है। इस प्रकार, योग का अभ्यासी शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक स्वास्थ्य को प्राप्त करता है।
(2) रोगोपचार के क्षेत्र में:
योगाभ्यास हमारी दिनचर्या को ठीक कर हमारे शरीर की प्रतिरोधक शक्ति में सुधार करता है, जो रोगों को ठीक करने में कारगर साबित हो रही है। एलोपैथी में चिकित्सा के दौरान दवाइयों के शरीर पर दुष्प्रभाव भी देखे जाते हैं, जबकि योग एक हानिरहित चिकित्सा पद्धति के रूप में प्रसारित हो रहा है।
आज पूरे विश्व में योग चिकित्सा पर तरह-तरह के शोध कार्य हो रहे हैं। दमा, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, निम्न रक्तचाप, मोटापा, हड्डी रोग, तनाव, अनिद्रा व अवसाद आदि जैसे रोगों का उपचार योग द्वारा प्रभावी ढंग से किया जा रहा है, जिससे बहुत-से लोग लाभान्वित हो रहे हैं।
(3) खेल-कूद के क्षेत्र में:
खेल के क्षेत्र में भी योग का विशेष महत्व है। जब खिलाड़ी योगाभ्यास करता है तो उससे अपने खेल में उसकी कुशलता, क्षमता व योग्यता बढ़ती है। योगाभ्यास से शारीरिक क्षमता एवं लचक बढ़ती है, जिससे खिलाड़ी को अपने खेल में अच्छा प्रदर्शन करने में मदद मिलती है। यहाँ तक कि कई बार खेल में हार-जीत के कारण शरीर व मन के स्तर पर बनने वाले तनाव को योग द्वारा नियंत्रित करके खिलाड़ी अपनी सम अवस्था को बनाने में सफल होता है।
(4) शिक्षा के क्षेत्र में:
आज अधिक प्रतिस्पर्धी होने के कारण विद्यार्थियों में मानसिक तनाव बनता है। योगाभ्यास से मानसिक तनाव कम किया जा सकता है। यही कारण है कि अब स्कूल व कॉलेज के विद्यार्थियों में प्राणायाम व ध्यान से एकाग्रता व स्मरण-शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। योग के अभ्यास से विद्यार्थियों के नैतिक जीवन पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। उनका शारीरिक, मानसिक व नैतिक विकास होता है। उनकी एकाग्रता बढ़ने से परीक्षा के परिणामों में भी सुधार होता है। यही कारण है कि स्कूलों में योग की शिक्षा को महत्त्व दिया जाने लगा है। योग से विद्यार्थियों का व्यवहार अच्छा बनता है। वे अनुशासित बनते हैं। योग से विद्यार्थी बड़ों का आदर करने, संस्कारों के निर्माण तथा अपने भविष्य को बनाने में सफल होते हैं।
(5) पारिवारिक महत्व:
परिवार व्यक्ति के विकास की नींव है। परिवार का सौहार्दपूर्ण वातावरण व्यक्ति के विकास का मूल है। योग व्यक्ति के पारिवारिक मूल्यों को अच्छा बनाने में बहुत सहायक है। आधुनिक समय में बढ़ती हुई एकल परिवार प्रणाली ने अनेकों समस्याओं को जन्म दिया है, जिससे संवेदनहीनता, असहनशीलता, क्रोध, तनाव व अनेक शारीरिक व मानसिक रोग जन्म लेने लगते हैं। योगाभ्यास से व्यक्ति की सोच सकारात्मक बनती है। उसकी वाणी में मधुरता आती है। वह परिवार की प्रतिकूल परिस्थितियों को सहज रूप से अनुकूल करने में सफल होने लगता है। परिवार के सदस्यों में अच्छा समन्वय बनाकर गृहस्थ जीवन को सुखी बनाने में सफल होता है।
(6) सामाजिक क्षेत्र में योग का महत्व:
स्वस्थ व्यक्ति से स्वस्थ परिवार बनता है। स्वस्थ परिवार से स्वस्थ समाज बनता है। व्यक्ति धन कमाने या विलासिता के साधनों का संचय करने के लिए हिंसा, अविश्वास व भ्रष्टाचार के मार्ग को अपनाने लगता है। योग समाज में चोरी, बेईमानी, भ्रष्टाचार व अशान्ति को खत्म करने में सहयोगी है। योग समाज को सकारात्मक व शान्तिदायक दिशा प्रदान करता है। योग समाज में, “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः” की भावना को स्थापित करके एक अच्छे समाज का निर्माण करता है।
(7) आर्थिक क्षेत्र में महत्व:
योग का आर्थिक क्षेत्र में एक विशेष महत्व है। योगाभ्यास से एकाग्रता, बुद्धि व कार्य-क्षमता का विकास होता है। बड़े-बड़े उद्योगपति व फिल्म एक्टर आदि योग से अपने को स्वस्थ कर अधिक धन कमाते देखे जा सकते हैं। आधुनिक समाज में विश्व स्तर पर योग के शिक्षकों की मांग बढ़ने से योग प्रशिक्षित व्यक्तियों के लिए यह जीविकोपार्जन का साधन बन चुका है। इससे जहां योग शिक्षकों की मांग बढ़ रही है, वहीं योग की सामग्री का उत्पादन भी बड़े स्तर पर होने लगा है। इस प्रकार योग देश के आर्थिक विकास में भी सहयोगी साबित हो रहा है।
(8) आध्यात्मिक क्षेत्र में महत्व:
प्राचीन काल से योग विद्या का प्रयोग आध्यात्मिक विकास के लिए किया जाता रहा है। योग का एकमात्र लक्ष्य आत्मा-परमात्मा के मिलन द्वारा समाधि की अवस्था को प्राप्त करना है। साधक यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान व समाधि का क्रमबद्ध अनुष्ठान करते हुए कैवल्य को प्राप्त करता है। जीवन में योग को धारण करके व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बनाता है तथा उसका आध्यात्मिक विकास सहज रूप में होने लगता है।
ऊपर दिए गए योग के विभिन्न महत्वों के आधार पर हम कह सकते हैं कि योग एक वैज्ञानिक जीवन-शैली है। आधुनिक युग में योग की विद्या संन्यासियों तक सीमित न रहकर पूरे समाज के लिए एक आदर्श जीवन-पद्धति बन चुकी है। आज योग एक सुव्यवस्थित व वैज्ञानिक शैली के रूप में प्रमाणित हो चुका है।
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