किसी भी देश की आर्थिक मजबूती में गोल्ड रिजर्व यानी स्वर्ण भंडार की बड़ी भूमिका होती है।
भारतीय रिजर्व बैंक लगातार अपने स्वर्ण भंडार को बढ़ा रहा है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर भारत अपना इतना सोना कहां रखता है।
भारत किस देश के बैंक में रखता है अपना सोना?
भारत के पास कितना गोल्ड रिजर्व?
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2024 तक भारत के पास कुल 822.10 टन सोना था। पिछले कुछ वर्षों में RBI ने लगातार सोने की खरीद बढ़ाई।
भारत में कितना और विदेश में कितना रखा है सोना?
RBI अपने पूरे गोल्ड रिजर्व को भारत में नहीं रखता है। रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार देश के कुल स्वर्ण भंडार का बड़ा हिस्सा विदेशों में सुरक्षित रखा गया है। दरअसल, भारत का काफी सोना इंग्लैंड की राजधानी लंदन में मौजूद ‘बैंक ऑफ इंग्लैंड’ में रखा है। इसके अलावा कुछ सोना स्विट्जरलैंड स्थित ‘बैंक फॉर इंटरनैशनल सैटलमैंट्स’ के पास भी सुरक्षित है।
आंकड़ों के अनुसार लगभग 296 टन सोना भारत में रखा गया है, जबकि 410 टन से ज्यादा सोना विदेशी बैंकों में जमा है, जिसमें सबसे ज्यादा सोना ‘बैंक ऑफ इंग्लैंड’ के पास रखा गया है। वहीं भारत में आर.बी.आई. अपना सोना मुख्य रूप से मुंबई के मिंट रोड स्थित रिजर्व बैंक भवन और नागपुर की विशेष तिजोरियों में सुरक्षित रखता है। इन वॉल्ट्स में सोना गोल्ड बार (ईंटों) के रूप में रखा जाता है। एक गोल्ड बार का वजन करीब 12.5 किलोग्राम होता है।
विदेश में सोना क्यों रखता है RBI?
विदेश में सोना रखने के पीछे आर.बी.आई. कई बड़े कारण बताता है। सबसे अहम वजह सुरक्षा और वैश्विक वित्तीय जरूरतें हैं। बड़ी मात्रा में सोने को खरीद कर भारत लाना आसान काम नहीं होता। इसके लिए विशेष परिवहन, सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स की जरूरत पड़ती है, जिस पर भारी खर्च आता है।
इसके अलावा अगर किसी आर्थिक संकट के दौरान सोने को गिरवी रखने या अंतर्राष्ट्रीय लेन-देन में इस्तेमाल करने की जरूरत पड़े तो विदेशों में रखा सोना तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस वजह से दुनिया के कई केंद्रीय बैंक अपना गोल्ड रिजर्व लंदन जैसे वित्तीय केंद्रों में रखते हैं। ‘बैंक ऑफ इंग्लैंड’ लंबे समय से दुनिया के कई देशों के लिए गोल्ड स्टोरेज सैंटर की तरह काम करता रहा है।
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