सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई : सिद्धिविनायक, गणेश जी का सबसे लोकप्रिय रूप है। गणेश जी की जिन प्रतिमाओं की सूंड दाईं तरफ मुड़ी होती है, वे सिद्धपीठ से जुड़ी होती हैं और उनके मंदिर सिद्धिविनायक कहलाते हैं।
कहते हैं कि सिद्धिविनायक की महिमा अपरम्पार है, वह भक्तों कौ मनोकामना को तुरन्त पूरा करते हैं। मान्यता है कि ऐसे गणपति बहुत ही जल्दी प्रसन्न होते हैं और उतनी ही जल्दी कुपित भी होते हैं।

बैसे तो सिद्धिविनायक के भक्त दुनिया के हर कोने में हैं, लेकिन महाराष्ट्र में ये सबसे अधिक हैं मुंबई के प्रभादेवी स्थित सिद्धिविनायक मंदिर उन गणेश मंदिरों में से एक है, जहां केवल हिंदू ही नहीं, बल्कि हर धर्म के लोग दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं।
| Name: | सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई (Shri Siddhivinayak Ganapati Mandir Mumbai) |
| Location: | SK Bole Road, Prabhadevi, Dadar, Mumbai, Maharashtra 400028 India |
| Deity: | Ganesha |
| Affiliation: | Hinduism |
| Architecture: | Hindu Temple Style |
| Governing Body: | Shree Siddhivinayak Ganapati Temple Trust |
| Festivals: | Ganesh Chaturthi |
| Created by: | Laxman Vithu & Deubai Patil |
हालांकि, इस मंदिर की न तो महारष्ट के ‘अष्टविनायकों’ में गिनती होती है और न ही सिद्धटेक से इसका कोई संबंध है, फिर भी यहां गणपति पूजा का खास महत्व है। इसे जागृत स्थल माना जाता है।
महाराष्ट्र में गणेश दर्शन के आठ सिद्ध ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल हैं, जो ‘अष्टविनायक’ के नाम से प्रसिद्ध हैं लेकिन अष्टविनायकों से अलग होते हुए भी इसकी महत्ता किसी सिद्ध-पीठ से कम नहीं है।
सिद्धिविनायक की सबसे बड़ी विशेषता हैकि यह चतुर्भुजी विग्रह है। उनके ऊपरी दाएं हाथ में कमल और बाएं हाथ में अंकुश है और नीचे के दाहिने हाथ में मोतियों की माला और बाएं हाथ में मोदक से भरा हुआ कटोरा है। गणपति के दोनों ओर उनकी दोनों पत्नियां रिद्धि-सिद्धि मौजूद हैं, जो धन, आश्रय, सफलता और सभी मनोकामनाओं को हे करनेकी प्रतीक। मस्तक पर अपने पिता शिव के समान एक तीसरा नेत्र और गले में हार के स्थान पर एक सर्प लिपटा है। सिद्धिविनायक का विग्रह अढ़ाई फुट ऊंचा है और यह 2 फुट चौड़े एक ही काले शिलाखंड से बना होता है। निर्माण के लिए 20 हजार वर्ग फुट को जमीन प्रदान की।
पांच मंजिला इमारत
मदिर के ‘गभारा’ यानी गर्भगृह को इस तरह बनाया गया है, ताकि अधिक से अधिक भक्त गणपति का सभामंडप से सीधे दर्शन कर सकें। पहली मंजिल की गैलरियां भी इस तरह बनाई गई हैं कि भक्त वहां से भी सीधे दर्शन कर सकते हैं। अष्टभुजी गर्भग्रह तकरीबन 10 फुट चौड़ा और 13 फुट ऊंचा है।
गर्भगृह के चबूतरे परस्वर्ण शिखर वाला चांदी का सुंदर मंडप है, जिसमें सिद्धिविनायक विराजते हैं। गर्भगृह में भक्तों के जाने के लिए तीन दरवाजे हैं, जिन पर अष्टवनायक, अष्टलक्ष्मी और दशावतार की आकृतियां चित्रित हैं। वर्तमान मे सिद्धिविनायक मंदिर की इमारत पांच मंजिला है और यहां प्रवचन ग्रह, गणेश संग्रहालय व गणेश विद्यापीठ के अलावा दूसरी मंजिल पर अस्पताल भी है, जहां रोगियों की मुफ्त चिकित्सा की जाती है। इसी मंजिल पर रसोई घर भी है।

लागू किया गया ड्रेस कोड
मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में इस वर्ष जनवरी से श्रद्धालुओं के लिए ड्रैस कोड लागू किया गया था। इस नई व्यवस्था के तहत स्कर्ट, कटे-फटे कपड़े और रिवीलिंग ड्रैस पहनकर मंदिर में प्रवेश नहीं मिलेगा।
सिद्धिविनायक मंदिर ट्स्ट के कोषाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी ने कहा कि मुंबई स्थित सिद्धिविनायक मंदिर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के सनातनी और गणेश भक्तों की आस्था का एक प्रमुख केंद्र है। यहां पर लाखों लोग दर्शन के लिए आते हैं और आने वाले श्रद्धालुओंके जीवन का मनोरथ पूरा होता है लेकिन, जब लोग किसी पवित्र स्थल पर जाते हैं, तो वहां कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है, ताकि उस स्थान की पवित्रता बनी रहे।मंगलवार को यहां इतनी भीड़ होतीहै कि लाइन में चार- पांच घंटे खडे होनेके बाद दर्शन हो पाते हैं।
हर साल गणपतिपूजा महोत्सव यहां भाद्रपद की चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक विशेष समारोह पूर्वक मनाया जाता है। वर्ष 2024- 25 में मंदिर को 133 करोड़ रुपए की रिकॉर्ड आय हुई जो इससे गत वर्ष से 15 प्रतिशत ज्यादा है।
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