बिटौरे से तो उपले ही निकलेंगे-Folktale on Hindi Proverb

बिटौरे से तो उपले ही निकलेंगे Folktale on Hindi Proverb

एक अहींरो का गाँव था। उसमे एक युवक था। उसकी चोरी करने की आदत छुटपन से ही पड़ गई थी। वैसे तो इस प्रवृत्ति के दो – चार व्यक्ति और भी थे इस गांव मेँ। उससे पूरा परिवार दुखी रहता था। चोरी – चकारी मे जब उसका नाम आता था, परिवार के लोगो की निगाहें नीची हो जाती थी। बड़ी बेइज्जती महसूस करता था वह परिवार।

एक दिन वह कहीँ से चोरी करके लाया। लूटा माल घर न लाकर कही बाहर छिपा आया। वह घरवालोँ से डरता था। कहीँ पोल न खुल जाए, इसलिए वह घर नहीँ लाया। इस माल के लूटने मेँ उस गांव के दो और व्यक्ति शामिल थे। रात को ही उन्होंने अपना – अपना बटवारा कर लिया था। लेकिन उनमेँ से एक चोर था चंट था ओर वह उसका पीछा करता रहा ओर माल छुपाने की जगह को देखकर वापस चला गया।

उस गांव मेँ हल्ला मच गया कि पडोस के गांव मे चोरी हुई है। एक दिन सैनिक उस गाँव मेँ भी घूमकर चले गए थे।

कई दिन बाद उसने बिटौरा के उपले हटाना शुरु किए। उसका पिता भी उस समय आ गया था। उसका पिता उसे उपले हटाते हुए देखता रहा। संयोग से उसका वह चोर साथी भी आ गया जिसने उस बिटौरे मे माल छुपाते देखा था।

जब बिटौरे के थोड़े उपले उठाने को रह गए, तो उसके पिता को कुछ शक हुआ। और वे यह भी समझ गए कि माल रखते हुए किसी ने देख लिया होगा। बाद मेँ उसने माल निकाल लिया होगा।

अंत मेँ उसके बाप ने कहा, “बेटा क्या ढूंढ रहे हो? ‘बिटौरे से उपले ही निकलेंगे‘।”

इतना सुनते ही वह अपने बाप को आँखे फाड़कर देखता रहा।

Check Also

Dussehra Greetings

Dussehra Greetings: Vijayadashami Picture Message Cards for Social Media

Dussehra Greetings for Students And Children: In the months of Ashwin and Kartik, Hindus observe …