जापान का एक युवा तीरंदाज खुद को दुनिया का सबसे बड़ा धनुर्धर मानने लगा। जहां भी वह जाता लोगों को मुकाबले की चुनौती देता और हराकर उनका खूब मजाक उड़ाता। एक बार उसने एक जेन गुरु बोकोशु को चुनौती दी। गुरु ने पहले तो उसे समझाना चाहा लेकिन जब वह अपने गुमान में अड़ा ही रहा तो बोकोशु ने चुनौती …
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माहिष्मती साम्राज्यम्: बाहुबली गान – मनोज मुन्ताशिर
माहिश्मती साम्राज्यम् सर्वोत्तम् अजेयम् दसो दिशाएं आगे आ सब इसको करते प्रणाम खुशहाली वैभवशाली समृद्धियाँ निराली धन्य धन्य है यहाँ प्रजा शक्ति का ये स्वर्ग था घन गरज जो किलके यहाँ दिग दिगंत में है कहाँ शीश तो यहाँ झुका ज़रा यशास्वीनी है ये धरा महिष्मति की पताका सदा यूँही गगन चूमे अश्व दो और सूर्य देव मिलके स्वर्ग सिंघासन …
Read More »शरद की हवा – गिरिधर गोपाल जी द्वारा शब्द चित्रण
शरद की हवा ये रंग लाती है, द्वार–द्वार, कुंज–कुंज गाती है। फूलों की गंध–गंध घाटी में बहक–बहक उठता अल्हड़ हिया हर लता हरेक गुल्म के पीछे झलक–झलक उठता बिछुड़ा पिया भोर हर बटोही के सीने पर नागिन–सी लोट–लोट जाती है। रह–रह टेरा करती वनखण्डी दिन–भर धरती सिंगार करती है घण्टों हंसिनियों के संग धूप झीलों में जल–विहार करती है दूर …
Read More »हाथ पाँव की कायली, मुह में मूंछें जायँ Folktale on Hindi Proverb
एक आलसी आदमी था। उसका परिवार खाता – पीता सम्पन था। इसलिए वह काम पर भी कभी कभी जाता था। जब भी जाता था, दो – चार घंटो से अधिक दुकान पर नहीँ बैठता था। खाने – पीने मेँ चुस्त था लेकिन अपनी देखभाल करने मेँ बहुत आलसी था। कपड़े तो उसकी पत्नी और लड़के धो देते थे। लेकिन सिर के …
Read More »गए थे नमाज पढ़ने, रोजे गले पड़ गए Folktale on Hindi Proverb
एक मोहल्ले में काजी का परिवार था। सब मोहल्ले वाले काजी के परिवार का सम्मान करते थे। इस परिवार के सभी बच्चे पढ़ने में होशियार थे। सभी काम में लगे हुए थे। लेकिन उस परिवार में एक लड़का ऐसा था कि उसके आचार – विचार घर के लोगों से अलग थे। परिवार के सब लोग नमाज पढ़ते थे और धार्मिक …
Read More »बात चलती है, तो दूर तक जाती है Folktale on Hindi Proverb
एक गाँव के दो परिवारों में बहुत घनिष्टता थी। दोनों परिवार के लोग एक – दुसरे के यहाँ आते – जाते थे, उठते – बैठते थे। यदि कभी एक परिवार परेशानी में होता था, तो दूसरा परिवार उसकी मदद करने को तैयार रहता था। गाँव में किसी से कहा – सुनी हो जाए या झगड़ा हो जाए, तो दोनों परिवार मिलकर …
Read More »अँधा बांटे रेबड़ी, घूम – धूम अपने को देय Folktale on Hindi Proverb
एक गड़रियों का गाँव था। ये लोग अधिकतर बकरियां और भेड़े चराने का काम करते थे। उनमें कई लोग ऊंट भी रखते थे। ऊंट से गाँव के आस – पास लगने वाले हाटों का सामान लाते, ले जाते थे। एक दिन एक गड़रिया ऊंट खरीदकर लाया। उसने इस ख़ुशी में लोगों को प्रसाद बांटना चाहा। उसने दो व्यक्तियों को बनिया की …
Read More »अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे Folktale on Hindi Proverb
अनाज तथा अन्य सामान की ढुलाई बैलजाड़ियां, घोड़ों, ऊंटों आदि से होती थी। सामान को लाने – ले – जाने के यही साधन थे। एक आदमी ऊंट से सामान लाने – ले – जाने का काम करता था। कभी वह खलिहानों से अनाज बाज़ार में ले जाता था। कभी सामान को एक स्थान से दुसरे स्थान पर ले जाता था। …
Read More »ऊंट की चोरी निहुरे – निहुरे Folktale on Hindi Proverb
एक चोर था। वह जानवरों की चोरी किया करता था। कभी कहीं से गाय चुरा लेता था। कहीं से बैल चुरा लेता था। चोरी किए गए चौपायों को वह बहुत दूर जाकर बेच आता था। कभी – कभी वह जानवरों के मेलों में बेच आता था। कई बार वह पकड़ा भी गया था। खूब पीटा भी था। कभी – कभी वह …
Read More »बिटौरे से तो उपले ही निकलेंगे Folktale on Hindi Proverb
एक अहींरो का गाँव था। उसमे एक युवक था। उसकी चोरी करने की आदत छुटपन से ही पड़ गई थी। वैसे तो इस प्रवृत्ति के दो – चार व्यक्ति और भी थे इस गांव मेँ। उससे पूरा परिवार दुखी रहता था। चोरी – चकारी मे जब उसका नाम आता था, परिवार के लोगो की निगाहें नीची हो जाती थी। बड़ी …
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