मेरे पीछे इसीलिये तो धोकर हाथ पड़ी है दुनिया मैंने किसी नुमाइश घर में सजने से इन्कार कर दिया। विनती करती, हुक्म चलाती रोती, फिर हँसती, फिर गाती; दुनिया मुझ भोले को छलने, क्या–क्या रूप बदल कर आती; मंदिर ने बस इसीलिये तो मेरी पूजा ठुकरा दी है, मैंने सिंहासन के हाथों पुजने से इन्कार कर दिया। चाहा मन की …
Read More »Yearly Archives: 2017
गाँव जाना चाहता हूँ: रामावतार त्यागी
ओ शहर की भीड़ अब मुझको क्षमा दो लौट कर मैं गाँव जाना चाहता हूँ। तू बहुत सुंदर बहुत मोहक कि अब तुझसे घृणा होने लगी है अनगिनत तन–सुख भरे हैं शक नहीं है किंतु मेरी आत्मा रोने लगी है गाँव की वह धूल जो भूली नहीं है फिर उसे माथे लगाना चाहता हूँ। कीमती पकवान मेवे सब यहाँ हैं …
Read More »गाली अगर न मिलती: रामावतार त्यागी
गाली अगर न मिलती तो फिर मुझको इतना नाम न मिलता, इस घायल महफिल में तुमको सुबह न मिलता शाम न मिलता। मैं तो अपने बचपन में ही इन महलों से रूठ गया, मैंने मन का हुक्म न टाला चाहे जितना टूट गया, रोटी से ज्यादा अपनी आजादी को सम्मान दिया, ऐसी बात नहीं है मुझको कोई घटिया काम न …
Read More »तुझे कैसे भूल जाऊं: दुष्यंत कुमार
अब उम्र की ढलान उतरते हुए मुझे आती है तेरी याद‚ तुझे कैसे भूल जाऊं। गहरा गये हैं खूब धुंधलके निगाह में गो राहरौ नहीं हैं कहीं‚ फिर भी राह में – लगते हैं चंद साए उभरते हुए मुझे आती है तेरी याद‚ तुझे कैसे भूल जाऊं। फैले हुए सवाल सा‚ सड़कों का जाल है‚ ये सड़क है उजाड़‚ या …
Read More »इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है: दुष्यंत कुमार
इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है, नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है। एक चिनगारी कही से ढूँढ लाओ दोस्तों, इस दिए में तेल से भीगी हुई बाती तो है। एक खंडहर के हृदय-सी, एक जंगली फूल-सी, आदमी की पीर गूंगी ही सही, गाती तो है। एक चादर साँझ ने सारे नगर पर डाल …
Read More »सूना घर: दुष्यंत कुमार
सूने घर में किस तरह सहेजूँ मन को। पहले तो लगा कि अब आईं तुम, आकर अब हँसी की लहरें काँपी दीवारों पर खिड़कियाँ खुलीं अब लिये किसी आनन को। पर कोई आया गया न कोई बोला खुद मैंने ही घर का दरवाजा खोला आदतवश आवाजें दीं सूनेपन को। फिर घर की खामोशी भर आई मन में चूड़ियाँ खनकती नहीं …
Read More »New Year Recipes: World Culture and Traditions
New Year celebrations are popular around the world. In fact, there is hardly any part of the globe that doesn’t welcome the coming year in a grand fashion. Bidding good bye to the passing year, people look forward to the coming year with great hopes and aspirations. New Year is one of the festive occasions, which are synonymous with treating …
Read More »New Year Party: Celebration Culture & Traditions
Come New Year and everybody looks forward to party the night away. Right from the kids to the oldies, everyone automatically prepares for bidding farewell to the by-gone year and usher in the New Year in style. Almost every household in the vicinity is found to be busy preparing for throwing a party, as it is the perfect time for …
Read More »Subrahmanyan Chandrasekhar Biography for Students and Children
Subrahmanyan Chandrasekhar, FRS (October 19, 1910 – August 21, 1995), was an Indian American astrophysicist born in Lahore, Punjab (Now in Pakistan). Chandrasekhar was awarded, along with William A. Fowler, the 1983 Nobel Prize for Physics, with Chandrasekhar cited for his mathematical theory of the physical processes of importance to the structure and evolution of the stars. This work led to …
Read More »मत कहो, आकाश में कोहरा घना है: दुष्यंत कुमार
मत कहो, आकाश में कोहरा घना है, यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है। सूर्य हमने भी नहीं देखा सुबह से, क्या करोगे सूर्य का क्या देखना है। इस सड़क पर इस कदर कीचड़ बिछी है, हर किसी का पाँँव घुटनों तक सना है। पक्ष औ’ प्रतिपक्ष संसद में मुखर हैं, बात इतनी है कि कोई पुल बना है। रक्त वर्षों …
Read More »
Kids Portal For Parents India Kids Network