Yearly Archives: 2015

ख़ुशी की खोज

ख़ुशी की खोज

अंजन मुनि अपने आश्रम में अनेक शिष्यों को शिक्षा देते थे। एक दिन वह अपने शिष्यों से बोले, “आज मैं तुम्हें बताऊंगा कि खुशी आसानी से किस तरह मिल सकती है?” सभी शिष्य बोले, “गुरुजी, जल्दी बताइए।” मुनि शिष्यों को एक कमरे में ले गए। वहां ढेर सारी एक जैसी पतंगें रखी हुई थीं। मुनि शिष्यों से बोले, “इन पतंगों …

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धार्मिक कार्यों में दिशाओं का महत्व

धार्मिक कार्यों में दिशाओं का महत्व

चार मुख्य दिशा, चार उप-दिशा एवं ऊर्ध्व-अधवरा दो दिशा मिलकर कुल दस दिशाएं होती हैं। सूर्योदय को पूर्व दिशा और सूर्यास्त को पश्चिम दिशा कल्पित करके आठ अन्य दिशाएं निश्चित की गई हैं। प्रात: संध्या में देवकार्य, यज्ञकार्य, आचमन और प्राणायाम के लिए पूर्व दिशा की तरफ मुंह रखा जाता है जबकि सायं संध्या में देव कार्य तथा पुण्य कार्य …

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