Tag Archives: Old Classic Hindi Poems

परशुराम की प्रतीक्षा: रामधारी सिंह दिनकर की कविता

परशुराम की प्रतीक्षा - रामधारी सिंह दिनकर

A just society does not occur spontaneously. It has to be nurtured and protected with valor. Here is a poem so characteristic of Ramdhari Singh Dinkar. Compare with his other works like “Shakti Aur Kshma“, “Vijayi Ki Sadrish Jiyo Re” and Rashmirathi in this collection. Before the contemporary poem evolved as an expression of self, there were poets like Dinkar …

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Maha Shivaratri Bhajans For Hindu Devotees

Maha Shivaratri Bhajans: Hindu Culture & Traditions

Mahashivaratri is an auspicious occasion for Hindus. It is the festival when Lord Shiva, one of the deities of Hindu Trinity (the other two being Lord Brahma and Lord Vishnu), is worshiped with immense devotion. The ceremonious occasion, which honors Lord Shiva, falls on the moonless 14th night of the new moon in the Hindu month of Phalgun, which corresponds …

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Shiva Chalisa: Maha Shivaratri Prayer in Hindi

Shiva Chalisa: Maha Shivaratri Culture & Traditions

Mahashivaratri is a special day for the devotees of Lord Shiva. On the festival, people would observe a fast for the entire day and sing bhajans and songs in the praise of the deity. Lord Shiva temples are flocked by devotees, as special puja is conducted all through the day. Different types of Abhishek are performed, with the use of …

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बिहारी के प्रसिद्द दोहे हिंदी अर्थ सहित

बिहारी के प्रसिद्द दोहे

महाकवि बिहारीलाल का जन्म 1603 के लगभग ग्वालियर (Gwalior is a city in the central Indian state of Madhya Pradesh) में हुआ। उनके पिता का नाम केशवराय था व वे माथुर चौबे जाति से संबंध रखते थे। बिहारी का बचपन बुंदेल खंड में बीता और युवावस्था ससुराल मथुरा में व्यतीत की। बिहारी की एकमात्र रचना सतसई (सप्तशती) है। यह मुक्तक …

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आओ तुम्हे बताऊ के माँ क्या है: कैफ़ी आज़मी

आओ तुम्हें बताऊ के माँ क्या हैं - कैफ़ी आज़मी Hindi Film Song on Mother

आओ तुम्हे बताऊ के माँ क्या है: कैफ़ी आज़मी आओ आओ तुम्हे बताऊ के माँ क्या है माँ एक ज्योति जीवन है बाकी सब अन्धियारा है माँ एक ज्योति जीवन है बाकी सब अन्धियारा है साच्ची उसके दुनिया में भगवान ने प्यार उतारा है माँ का दूजा नाम है प्यार मेरे साथी मेरे यार आओ आओ तुम्हे बताऊ के माँ …

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सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा: मुहम्मद इक़बाल

सारे जहां से अच्छा - मुहम्मद इक़बाल

This great poem was written by Allama Muhammad Iqbal, a great poet-philosopher and active political leader. Iqbal was born at Sialkot, Punjab, in 1877. He descended from a family of Kashmiri brahmins but his grandfather Sahaj Ram Sapru, had to embrace Islam (Reference). In 1904, Iqbal, then a young lecturer at the Government College, Lahore, was invited by his student …

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भारतमाता ग्रामवासिनी: सुमित्रानंदन पंत

भारतमाता ग्रामवासिनी - सुमित्रानंदन पंत

Soul of India resides in her villages. Agyeya said so in his poem “Hamara Desh” and in this famous poem Sumitranandan Pant Ji makes the point that the gentle, compassionate, enduring and caring Bharatmata lives in villages. भारतमाता ग्रामवासिनी: सुमित्रानंदन पंत भारत माता ग्रामवासिनी। खेतों में फैला है श्यामल, धूल भरा मैला सा आँचल, गंगा यमुना में आँसू जल, मिट्टी …

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जयद्रथ वध: राष्ट्र कवि मैथिली शरण गुप्त

जयद्रथ वध: राष्ट्र कवि मैथिली शरण गुप्त

Jayadrath Vadh is a famous Epic written by the Rashtra Kavi Maithili Sharan Gupt, and tells the story in Mahabharata of the killing of Jayadrath the Kaurava by Arjuna, the Pandava Warrior. In the excerpt given below, Abhimanyu, the 16 year old son of Arjuna is bent upon tackling a specially tricky Kaurav army formation (Chakraviyuh) that he alone can …

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अपराधी कौन: राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की देश प्रेम कविता

Hindi Poem on Desh Prem / Frustration अपराधी कौन - रामधारी सिंह दिनकर

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ भारत में हिन्दी के एक प्रमुख लेखक, कवि व निबन्धकार थे। वे आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हैं। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ स्वतन्त्रता पूर्व एक विद्रोही कवि के रूप में स्थापित हुए और स्वतन्त्रता के बाद ‘राष्ट्रकवि’ के नाम से जाने गये। वे छायावादोत्तर कवियों की पहली पीढ़ी के कवि …

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भये प्रगट कृपाला: तुलसीदास द्वारा रचित श्री राम स्तुति

भये प्रगट कृपाला - गोस्वामी तुलसीदास

भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी, मुनि मनहारी, अद्भुत रूप विचारी॥ लोचन अभिरामा, तनु घनस्यामा, निज आयुध भुज चारी। भूषन वनमाला, नयन बिसाला, सोभासिंधु खरारी॥ भावार्थ: दीनों पर दया करने वाले, कौसल्या के हितकारी कृपालु प्रभु प्रकट हुए। मुनियों के मन को हरने वाले उनके अद्भुत रूप का विचार करके माता हर्ष से भर गई। नेत्रों को …

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